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कोयला घटाएगा एल्युमीनियम की लागत

दिलीप सत्पथी | भुवनेश्वर May 10, 2018 11:20 PM IST

सरकारी स्वामित्व वाली नैशनल एल्युमीनियम कंपनी (नालको) लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) पर धातु की कीमतों में तेजी के कारण अप्रत्याशित लाभ के बाद अब अपने मुनाफे में आगे और बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही है। इसे अपने इस्तेमाल के लिए आवंटित किए गए कोयला ब्लॉक के शीघ्र ही परिचालित होने के बाद ऐसा हो सकता है। 

एल्युमीनियम की उत्पादन लागत में ऊर्जा की लागत का योगदान 40 प्रतिशत रहता है। इस तरह, अपने इस्तेमाल वाली (कैप्टिव) खदान के कोयले का प्रयोग करने से नालको की अंगुल स्थित धातु गलाने वाली इकाई के 4.6 लाख टन उत्पादन से प्रति टन एल्युमीनियम तकरीबन 500 डॉलर (करीब 35,000 रुपये) की बचत के साथ 25 फीसदी तक की बड़ी कटौती का अनुमान है। नालको को अपने इस्तेमाल के लिए 20 करोड़ टन के संयुक्त भंडार वाले दो कोयला ब्लॉक - उत्कल डी और ई आवंटित किए गए थे। कंपनी इस वर्ष के अंत तक या अगले वर्ष की शुरुआत में उत्कल डी ब्लॉक को संचालित करने की योजना बना रही है। नालको के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक टीके चंद ने कहा कि ब्लॉक की कानूनी मंजूरी के लिए ज्यादातर तैयारी हो चुकी है और यह कंपनी के लिए महत्त्वपूर्ण रहेगा।

ई-नीलामी के जरिये खरीद पर खर्च किए जाने वाले 4,000 रुपये प्रति टन की तुलना में ब्लॉक की शुरुआत से कोयले की खरीद लागत में 50 प्रतिशत तक की कमी आएगी। 10 लाख यूनिट बिजली उत्पादन के लिए आठ लाख टन कोयले की आवश्यकता होती है। उद्योग के सूत्रों ने कहा कि एलएमई पर हालिया कीमत बढ़ोतरी से नालको को जो बड़ा फायदा मिला, वह एल्युमिना की बिक्री से मिला था। एक टन एल्युमिना विनिर्माण के लिए कंपनी द्वारा तकरीबन 250 डॉलर खर्च करने से मार्जिन 200 प्रतिशत से भी अधिक रहा। 

सूत्रों ने कहा कि अंतरराष्टï्रीय एल्युमिना की कीमतों में थोड़ी मंदी आने से पहले नालको ने एल्युमिना को 718 डॉलर प्रति टन की रिकॉर्ड कीमत पर बेचा। तुलनात्मक रूप से एल्युमीनियम का मार्जिन कम हो गया है और वर्तमान में लागत प्रति टन 1,950 डॉलर होने से एलएमई पर प्रति टन 2,000 डॉलर की कीमत कंपनी के एल्युमीनियम परिचालन केलिए लाभकारी नहीं रही है।

इस पृष्ठïभूमि में, प्रति टन एल्युमीनियम पर 500 डॉलर की बचत से न केवल जोरदार अवधि के दौरान मार्जिन बढ़ेगा, बल्कि यह बुरे दौर में भी धातु गलाने वाली इकाई को पर्याप्त सहारा देगा। अपने इस्तेमाल वाले कोयले तक पहुंच केअलावा, कास्टिक सोडे के आंतरिक उत्पादन और बॉक्साइट खनन की लागत कम करने के कदमों से एल्युमीनियम की उत्पादन लागत में पर्याप्त बचत की भी उम्मीद है।

नालको दुनिया में एल्युमिना का सबसे सस्ता उत्पादन करने वाली कंपनी है। बॉक्साइट की सबसे कम लागत वाली उत्पादक के रूप में वेनेजुएला की एक खदान के बाद इसका स्थान दूसरे स्थान पर रहता है। टीके चंद ने कहा कि हमारी योजना दुनिया में बॉक्साइट की सबसे कम लागत वाली उत्पादक बनने की है। आधुनिक तकनीक जैसे - ट्रेंच खनन और पूर्ण मशीनीकरण के माध्यम से बॉक्साइट की बढ़ती लागत को लगभग एक डॉलर प्रति टन तक नीचे लाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इसी प्रकार, दहेज में गुजरात अल्कलीज के साथ संयुक्त उद्यम में नालको की कास्टिक सोडा परियोजना 2020 की पहली तिमाही में उत्पादन शुरू करेगी।

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