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महंगा होगा यूरिया आयात!

राजेश भयानी | मुंबई May 13, 2018 09:36 PM IST

ईरान पर अमेरिका के नए प्रतिबंधों के कारण भारत के यूरिया आयात की लागत बढऩे की संभावना है। 2017-18 में भारत का आयात 60 लाख टन था, जिसमें एक-तिहाई योगदान ईरान का था जो विश्व बाजार को 45 लाख टन सालाना की आपूर्ति करता है। इन प्रतिबंधों की वजह से अगर बाजार में यह आपूर्ति नहीं हो पाती है, तो वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी होगी। प्रतिबंधों से पहले भारत यूरिया का आयात यूएई के रास्ते से कर रहा था और उसकी मुद्रा दिरहम में भुगतान कर रहा था। सूत्रों का कहना है कि अब यूरिया के वैश्विक व्यापारियों को इस बात की चिंता है कि क्या यूएई इस समय भी सहायता करेगा।
 
यूरिया के दामों में पहले ही एक साल से इजाफा नजर आ रहा है। जुलाई 2017 से इसके दाम 20 प्रतिशत बढ़कर 255 डॉलर प्रति टन हो गए हैं। पर्यावरण आधार पर चीन ने यूरिया उत्पादन में कमी कर दी है और इससे बाजार में और तंगी आई है। लंदन स्थित सीआरयू के विश्लेषक दीपक चित्रोदा ने कहा कि ईरान आयात का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत था और 2017-18 में इसका योगदान पिछले साल से 27 प्रतिशत बढ़कर 34 प्रतिशत हो गया। खासतौर पर चीन की ओर से कम उपलब्धता के कारण ऐसा हुआ। आयात और दामों पर इसके असर का आंकलन करना अभी काफी जल्दबाजी होगी। फिलहाल, हमें अगले कुछ महीनों तक कीमतों के नरम रहने की उम्मीद है।
 
एक सूत्र ने कहा कि दो महीने पहले भारत सरकार ने एक मध्यस्थ एजेंसी - इंडियन पोटाश के जरिये 10 लाख टन यूरिया आयात की एक निविदा जारी की थी। इसका एक बड़ा हिस्सा ईरान से आयात के लिए आवंटित किया गया था। इन खेपों का एक भाग पहले ही यहां आ चुका है, लेकिन जो हिस्सा अभी आना है, उसके लिए मुश्किल हो सकती है, क्योंकि इसके लिए भुगतान किया जाना अब विवाद का विषय बन जाएगा। इस साल यूरिया की 10 लाख टन की उपलब्धता की उम्मीद से घरेलू उत्पादन क्षमता में वृद्धि के आसार नजर आ रहे हैं। सरकार उपभोग सीमित करने का प्रयास कर रही है।  कुछ महीने पहले सरकार ने खाद कंपनियों को यूरिया की पैकिंग 50 किलोग्राम वाले बोरों के बदले 45 किलोग्राम के बोरों में करने के लिए कहा था। 
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