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'अलग क्षेत्र में हाथ आजमाना चाहता हूं'

दिलीप कुमार झा |  May 13, 2018 09:38 PM IST

श्री रेणुका शुगर्स को भारत की सबसे बड़ी चीनी उत्पादक बनाने के लिए 18 साल तक कड़ी मेहनत करने के बाद कंपनी के प्रवर्तक और प्रबंध निदेशक नरेंद्र मुरकुंबी इससे बाहर निकल रहे हैं। वह अपनी नियंत्रण लायक हिस्सेदारी बहुराष्ट्रीय कंपनी विल्मर इंटरनैशनल को बेच रहे हैं। उन्होंने दिलीप कुमार झा के साथ एक साक्षात्कार में अतीत और भविष्य के बारे में बात की। बातचीत के अंश: 

 
श्री रेणुका शुगर्स की उत्तराधिकार योजना क्या है? 
 
अदाणी विल्मर के पूर्व कार्यकारी अधिकारी अतुल चतुर्वेदी को कार्यकारी चेयरमैन चुना गया है। चतुर्वेदी को जिंस क्षेत्र में लंबा अनुभव है। विल्मर का ओपन ऑफर (अल्पांश शेयरधारकों की हिस्सेदारी के लिए) पूरा होने तक मैं प्रबंध निदेशक रहूंगा। यह ऑफर संभवतया जून के अंत तक पूरा हो जाएगा। उसके बाद चतुर्वेदी प्रभार संभालेंगे। 
 
आपकी आगे की योजना? 
 
हमारा सौर ऊर्जा में रवींद्र एनर्जी के नाम से एक कारोबार है, जिसमें मुरकुंबी परिवार की हिस्सेदारी 70 फीसदी है। यह एक सूचीबद्ध कंपनी है, जो सौर छत, सौर परियोजना, सौर पंप के सेगमेंट और किसानों के लिए नलकूप के लिए करीब 250 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम कर रही है। यह कारोबार पहले से ही स्थापित है। मैं इस कंपनी के लिए काम करना जारी रखूंगा। मैं अपनी रुचि के अन्य क्षेत्रों के बारे में भी विचार कर रहा हूं। सौर ऊर्जा कृषि क्षेत्र से जुड़ा है, जिसमें काम करने में मुझे आनंद आता है। 
 
चीनी और सौर ऊर्जा में क्या तालमेल है, जिसकी वजह से आप इनमें उतरे? 
 
यह तालमेल नहीं बल्कि उद्यमिता का मामला है। मैं नए उत्साह और लक्ष्यों के साथ एक अलग क्षेत्र में हाथ आजमाना चाहता हूं। हमारे चीनी कारोबार के लिए हमारा किसानों से सीधा संपर्क था। सौर ऊर्जा से भी हम किसानों के साथ जुड़े रहेंगे। हम उस कारोबार को बढ़ाना चाहते हैं। 
 
क्या विल्मर के साथ करार में गैर-प्रतिस्पर्धा खंड भी है। 
 
मेरी मां और मैंने चीनी कारोबार 18 साल पहले शुरू किया था और यह हमारे दिल के बहुत करीब है। संस्थापकों के रूप में हम श्री रेणुका शुगर्स की मदद करते रहेंगे। भविष्य में चीनी कारोबार में उतरने की कोई योजना नहीं है। हालांकि विल्मर के साथ करार में गैर-प्रतिस्पर्धा खंड नहीं है। 
 
आपका सबसे बड़ा पछतावा? 
 
ब्राजील में अधिग्रहण का हमारा कारोबारी फैसला गलत था। हमने ब्राजील में संयंत्रों का अधिग्रहण चीनी क्षेत्र के सबसे अच्छे दौर में किया था। अब कमजोरी का दौर तेजी के दौर से लंबा खिंच गया है। उद्यमियों को चीनी कारोबार में चीनी क्षेत्र के कमजोर दौर में प्रवेश करना चाहिए। 
 
आप आगे श्री रेणुका शुगर्स के कारोबार को कैसे देखते हैं? 
 
विल्मर सौदे के बाद हमारे (मुरकुंबी) परिवार की कंपनी में हिस्सेदारी घटकर 13 फीसदी रह गई है। मैं एक संस्थापक और बोर्ड सदस्य के रूप में कंपनी की मदद करता रहूंगा। 
 
आप नए उद्यम के लिए कार्यशील पूंजी कैसे जुटाएंगे? 
 
हम ऐसा करने के लिए श्री रेणुका शुगर्स में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचना पसंद करेंगे। 
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