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क्षमता विस्तार कर रहीं टायर कंपनियां

शैली सेठ मोहिले | मुंबई May 14, 2018 10:22 PM IST

भारत में टायर विनिर्माता कंपनियां वाहन विनिर्माताओं की तेजी से बढ़ रही मांग और रीप्लेसमेंट बाजार को ध्यान में रखकर आक्रामक रूप से क्षमता विस्तार पर जोर दे रही हैं। नोटबंदी और जीएसटी की सुस्ती से उबरने के बाद मौजूदा समय में वाहनों की बिक्री में तेजी आई है। टायर निर्माताओं द्वारा अगले 7-10 वर्षों के दौरान लगभग 136.4 अरब रुपये का निवेश किए जाने की संभावना है। इस विस्तार का बड़ा हिस्सा (5-7 वर्षों में पहली बार इतना बड़ा निवेश) नई इकाइयों के निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा।
 
आरपीजी गु्रप की कंपनी सिएट टायर्स ने मौजूदा उत्पादन क्षमता 35-40 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना बनाई है। सिएट के प्रबंध निदेशक अनंत गोयनका ने कहा कि गुजरात में अपने हलोल संयंत्र पर बस और ट्रक रेडियल के लिए क्षमता वृद्घि के साथ साथ कंपनी ने यात्री कार रेडियल टायरों के लिए एक नई इकाई लगाने की भी योजना बनाई है। सिएट ने 12-15 अरब रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा है। गोयनका ने कहा, 'रीप्लेसमेंट सेगमेंट के साथ साथ मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) से मांग मजबूत हुई है।'
 
शानदार दोपहिया और ट्रक बिक्री की मदद से भारत में वाहनों की बिक्री मासिक आधार पर तेजी से बढ़ी है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) के अनुसार उद्योग ने कुल 2.9 करोड़ वाहनों (सभी सेगमेंट शामिल) का निर्माण किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 14.78 फीसदी की वृद्घि है। निर्यात और घरेलू बाजारों से मजबूत ऑर्डर बुक, ऐंटी-डंपिंग नियमों पर सरकार के रुख में नरमी और अपेक्षाकृत मजबूत रबर कीमतें टायर निर्माताओं के लिए शुभ संकेत हैं। लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने कई कंपनियों पर चालू तिमाही से मुनाफे पर दबाव डाल दिया है। कच्चे तेल आधारित कच्चे माल कार्बन ब्लैक का टायर कंपनियों की लागत में लगभग 45 प्रतिशत का योगदान है। गोयनका ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें औसत 62 डॉलर से 75 डॉलर बढ़ी हैं। 
 
विश्लेषकों का कहना है कि लेकिन लगभग सभी सेगमेंटों से मजबूत मांग की वजह से कई टायर कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ कीमत वृद्घि के तौर पर दूर करने में सफल रही हैं। कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों निक्षित जालान और हितेश गोयल ने एक रिपोर्ट में कहा है, 'हमें उम्मीद है कि कच्चे माल की लागत अगली दो तिमाहियों के दौरान 3-4 प्रतिशत तक बढ़ेगी, क्योंकि हाल में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इस वजह से कंपनियों को 2-2.5 फीसदी के दायरे में कीमत वृद्घि की जरूरत होगी।'
 
सिएट की प्रतिस्पर्धी एमआरएफ और अपोलो टायर्स भी अपनी इकाइयों के विस्तार पर ध्यान दे रही हैं। तमिलनाडु से बाहर अपने पहली बड़ी विस्तार योजना में बस, ट्रक रेडियल और दोपहिया टायरों की दिग्गज कंपनी एमआरएफ ने अगले एक दशक के लिए गुजरात में 45 अरब रुपये का निवेश निर्धारित किया है। यह कंपनी की 9वीं इकाई होगी। एमआरएफ के कार्यकारी उपाध्यक्ष वर्गीज कोशी से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया हासिल नहीं की जा सकी है। जनवरी में अपोलो टायर्स ने कहा था कि वह आंध्र प्रदेश के चित्तूर में नई इकाई की स्थापना पर 18 अरब रुपये लगा रही है। सालाना 55 लाख टायर निर्माण की क्षमता के साथ यह इकाई घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ साथ निर्यात बाजार की जरूरत भी पूरी करेगी और अगले दो वर्षों में चालू हो जाएगी।
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