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बिक्री पर दबाव और घटते रकबे को लेकर जूट बोर्ड ने चेताया

जयजित दास | भुवनेश्वर May 17, 2018 09:52 PM IST

जूट सलाहकार बोर्ड ने चालू वित्त वर्ष में कच्चे जूट की बिक्री पर दबाव के मद्देनजर उद्योग को चेताया है। इस फसल के अंतर्गत घटते रकबे को लेकर बोर्ड चिंतित है। बोर्ड को 2018-19 में जूट के कृषि योग्य क्षेत्र में वद्धि पर संशय है।जूट की खेती में किसानों की रुचि खत्म हो रही है, क्योंकि उन्हें अपने उत्पाद की बिक्री कम दामों पर करने को मजबूर होना पड़ रहा है। 2018-19 के लिए आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने कच्चे जूट पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को 2,000 रुपये प्रति टन तक बढ़ाकर 37,000 रुपये प्रति टन कर दिया है। हालांकि, जूट सलाहकार बोर्ड ने एक हालिया बैठक में पाया कि कच्चे जूट का बाजार मूल्य 2017-18 में लगातार एमएसपी से नीचे रहा है। 2013 के बाद से जूट के अंतर्गत रकबा 9.5 प्रतिशत तक कम हुआ है।

 
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि जूट की खेती 6.8 लाख हेक्टेयर में की जाती है, जबकि इसका लक्ष्य 8.3 लाख हेक्टेयर है। बिक्री में मंदी के अलावा जूट सलाहकार बोर्ड केंद्र, राज्यों और निजी जूट एजेंसियों द्वारा जूट के फसल अनुमान में बड़ी विभिन्नता को लेकर परेशान है। बोर्ड के अनुसार प्रत्येक वर्ष कृषि मंत्रालय और बोर्ड द्वारा लगाए गए अनुमानों में 20-25 लाख गांठों का अंतर रहता है। 2018-19 में भारतीय जूट निगम (जेसीआई) ने जूट और मेस्टा की 72 लाख गांठों के उत्पादन का अनुमान लगाया है, जबकि कृषि मंत्रालय ने 1.18 करोड़ गांठों का और जूट उद्योग ने 75 लाख गांठों का अनुमान लगाया है।
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