होम » Commodities
«वापस

इस साल कोयला आयात 8 प्रतिशत बढ़ा

जयजित दास | भुवनेश्वर May 18, 2018 09:57 PM IST

वर्ष 2014-15 के बाद लगातार दो साल की गिरावट के बाद वित्त वर्ष 18 में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ देश का कोयला आयात फिर से बढऩे लगा है। इस्पात क्षेत्र की ओर से कोकिंग कोयले की निरंतर मांग की वजह से आयात में इजाफा हुआ है। इसके अलावा, ऊर्जा और सीमेंट क्षेत्रों से भी स्टीम या थर्मल श्रेणी के कोयले की मांग वृद्धि स्थिर रही। सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़े बताते हैं कि मात्रा के रूप में 2017-18 में भारत का कोयला आयात 21.3 करोड़ टन था, जो वित्त वर्ष 17 में किए गए 19.5 करोड़ टन आयात से अधिक है। पिछले पांच सालों में देश का कोयला आयात 2014-15 में 21.5 करोड़ टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया था। इसमें थर्मल और कोकिंग कोयला दानों ही शामिल हैं। बाद के वर्षों में आयात 2015-16 में गिरकर 20.7 करोड़ टन तथा आगे 2016-17 में और गिरकर 19.5 करोड़ टन पर आ गया।

 
भारत सरकार द्वारा आयातित कोयल के स्थान पर घरेलू रूप से उत्सर्जित किए गए कोयले पर जोर दिए जाने से व्यापक तौर पर इस बात का पूर्वानुमान लगाया गया था कि वित्त वर्ष 18 में इसमें गिरावट आएगी। लेकिन संकीर्ण परिवहन व्यवस्था, खासतौर पर रेलवे रैक की कमी के कारण कोयला आपूर्ति ने निराश कर दिया। एक विश्लेषक ने कहा कि कोयला आयात में इजाफे का यह रुख जारी रहेगा क्योंकि अनुकूल मांग की मदद से इस्पात, विद्युत और सीमेंट उद्योग को और ऊंची क्षमता पर परिचालन करने की उम्मीद है। इसके अलावा, कुल घरेलू कोयला उत्पादन भी स्थिर रहने के आसार हैं, क्योंकि कोयला निकालने के लिए बुनियादी ढांचे या रेलवे रैक की उपलब्धता में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। इसके अतिरिक्त, पेट कोयले पर प्रतिबंध लगाने की चर्चा बाजार का रुख आयातित कोयले की ओर मोड़ देगी।
 
कोयले पर केयर रेटिंग्स की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर सरकार पेट कोयले के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के आदेश को मंजूरी दे देती है, जिससे सीमेंट उद्योग को ऊर्जा मिलती है, तो ऐसे में कोयले का कुल आयात 23.5-24.5 करोड़ टन के दायरे में रह सकता है। इसमें कोकिंग कोयला और स्टीम कोयला भी शामिल है। पेट कोयले पर प्रतिबंध की कमीबेशी पूरी करने के लिए 3.5-4 करोड़ टन अतिरिक्त स्टीम कोयले की जरूरत होगी। रिपोर्ट में इस वित्त वर्ष के दौरान घरेलू उत्पादन में मात्र 3.5-3 प्रतिशत वृद्धि के साथ 7.05-7.12 करोड़ टन का पूर्वानुमान जताया गया है। इसमें कहा गया है कि प्रति वर्ष पांच करोड़ टन के कोकिंग और स्टीम कोयला भंडार वाले कोयला खंडों की शीघ्र नीलामियों से आयातित आपूर्ति पर निर्भरता में कमी आएगी।
 
पिछले वित्त वर्ष में सरकार द्वारा संचालित दो उत्पादकों - कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) ने संयुक्त रूप से 62.94 करोड़ टन का उत्पादन दर्ज किया था, जिसमें पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले केवल 2.3 प्रतिशत की ही वृद्धि हुई है। घरेलू कोयला उत्पादन वित्त वर्ष 18 के लक्ष्य 66.2 करोड़ टन से कम रहा। ऊर्जा क्षेत्र ने सीआईएल द्वारा किए जाने वाले कोयले की आपूर्ति में कमी बताई है। इससे उनके परिचालनात्मक प्रदर्शन को नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा, तटवर्ती ऊर्जा संयंत्रों ने सस्ते घरेलू कोयले की अनुपलब्धता में आयातित कोयले को चुना है। इस्पात और सीमेंट क्षेत्रों ने वित्त वर्ष 18 में अधिक कोयले का उपभोग किया। जहां, एक ओर इस्पात क्षेत्र में 5.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ, वहीं दूसरी ओर सीमेंट क्षेत्र ने पिछले वित्त वर्ष में 6.3 प्रतिशत तक का विस्तार किया। देश ने वित्त वर्ष 18 में 4.65 करोड़ टन कोकिंग कोयले और 16.6 टन थर्मल व अन्य कोयले का आयात किया। इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका भारत को कोयला निर्यात करने वाले सबसे बड़े देश हैं, मात्रा के रूप में इनका योगदान 75-80 प्रतिशत रहता है।
कीवर्ड coal, import, steel,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक