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अविश्वास के बाजार में धूमिल हीरा

सुशील मिश्र | मुंबई May 20, 2018 09:42 PM IST

एक ओर देश में गरमी बढ़ रही, वहीं दूसरी ओर हीरा कारोबार पूरी तरह से ठंडा है। बाजार में फैले अविश्वास के कारण घरेलू बाजार से ग्राहक नदारद हैं, तो विदेशी मांग भी साथ नहीं दे रही है। कमजोर मांग की वजह से कच्चे हीरे की कीमतें घट गई हंै और तैयार हीरे की चमक 20-25 फीसदी तक फीकी हुई है। बैंक हीरा कारोबारियों से तौबा कर चुके हैं। परेशान कारोबारी अपने कारखानों में ताला मारकर सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। नीरव मोदी कांड को करीब तीन महीने बीत जाने के बाद भी हीरा कारोबार से अविश्वास का माहौल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अïिवश्वास की वजह से कारोबारी आपस मेंं भी लेनदेन करने से बच रहे हैं, जिस कारण निर्यात भी प्रभावित हो रहा है। भारत से तैयार हीरों के आयातकों का कहना है कि हीरा कारोबार सबसे महंगा होने के साथ ही यह करीब 80 फीसदी उधारी पर चलता है। विदेशों में जो माल भेजा जाता है, उसका करीब 90 दिन का क्रेडिट होता है। नीरव मोदी कांड के बाद विदेशी ग्राहक भारतीय हीरों को शंका की दृष्टिï से देखते हैं, जिसका कारण पैसा फंसने का डर है। यही वजह है कि इस समय ज्यादा माल क्रेडिट पर भेजने से बचा जा रहा है। जिसका असर निर्यात पर पड़ रहा है। कारोबारियोंं के अनुसार, मौजूदा माहौल में कारोबार करना बहुत चुनौती भरा है। फिलहाल, घरेलू और निर्यात मांग में सुधार होने की उम्मीद अभी तक नहीं जगी है।
 
भारतीय हीरों के लिए सबसे बड़ा बाजार संयुक्त अरब अमीरात रहा है। अरब और खाड़ी देश छोटे हीरा कारोबारियों के लिए बेहतरीन बाजार रहे हैं, लेकिन वहां भी पांच फीसदी मूल्यर्वधित कर लगाए जाने के बाद मांग घटी है। इसका सबसे ज्यादा असर मुंबई और सूरत के छोटे कारोबारियोंं पर पड़ा है। घरेलू और निर्यात मांग कमजोर पडऩे से कारोबारियों ने उत्पादन भी कम कर दिया है। नाइन डायमंड के प्रबंध निदेशक संजय शाह कहते हैं कि गरमी की छुट्टïी चलने के कारण मुंबई और सूरत के कारोबारी भी अपने कारखानों में छुट्टïी कर रहे हैं। 
 
कारोबार न होने के कारण इस अवकाश को कारोबारियों ने एक सप्ताह और बढ़ा दिया है। संजय कहते हैं कि कारोबारियोंं की तरफ से मांग न होने के कारण ही कच्चे हीरे की आपूर्ति करने वाली कंपनी डीटीसी ने अपनी कीमतों में चार फीसदी की कटौती की है। इसके बावजूद खरीदार नहीं है। दूसरी तरफ, कारोबारियों ने अपने हीरों के दाम 10 फीसदी से 30 फीसदी तक कम कर दिए हैं। इसके बावजूद बिक्री मेंं बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। हीरा कारोबरी अरविंद शाह कहते हैं कि कच्चे हीरों के दाम कम होने का फायदा भारतीय कारोबारियों को नहीं मिला है, क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपये का भाव चार फीसदी से ज्यादा गिर गया है। कारोबारी माहौल सही न होने के कारण ही ज्यादातर हीरा कारोबारी इस समय ग्रीष्मकालीन छुट्टïी पर हैं।
 
रत्न एवं आभूषण उद्योग मेंं, विशेष कर हीरा कारोबार की हालात सबसे खराब है। इसकी वजह बैंकों द्वारा कर्ज देने से सीधे मना करना है। बैंकों के मौजूदा रुख से परेशान होकर हीरा कारोबार की संस्थाओं ने केंद्र सरकार से भी गुहार लगाई है कि वह बैंकों को रुख में नरमी लाने के लिए कहे। पिछले सप्ताह हीरा कारोबारियों और केंद्र सरकार के बीच हुई बैठक मेंं सरकार ने दो टूक शब्दों में हीरा कारोबारियोंं को कहा कि वह बैंकों को इस विषय में कोई आदेश नहीं दे सकती है। हालांकि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने कारोबारियों की समस्या को वाजिब करार देते हुए बैंकों से बात करने का आश्वसन जरुर दिया। कारोबारियों और प्रभु के साथ हुई बातचीत के बाद वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार मानती है कि चुनौती बड़ी है, लेकिन चुनौती बैंकों के सामने भी कम नहीं है। ऐसे में बैंकों को जोखिम लेने के लिए नहीं कहा जा सकता है। 
 
हीरा कारोबारियों की सरकार से गुहार पर हीरा मणिक समुह के मुखिया हार्दिक हुंडिया कहते हैं कि आज पूरी तरह से अविश्वास का माहौल है। अविश्वास सिर्फ बैंकों में नहीं, कारोबारियों के बीच भी है। ऐसे मेंं बैंकों के साथ कारोबारी भी एक-दूसरे से लेनदेन नहीं कर रहे हैं, जिससे कारोबार बर्बाद हो रहा है। रही बात बैंकों की, तो मेरा मानना है कि बैंकों को जोखिम नहीं लेना चाहिए। वे कर्ज देने के पहले पूरी तरह कर्ज वापसी के रास्ते जांच लें। हीरा कारोबार में प्रभावशाली कारोबारियों की कमी नहींं है और वे अपने प्रभाव के बल पर बैंंकों को प्रभावित करते हैं, जबकि कारोबार मेंं प्रभाव नहीं, बल्कि कारोबार की गहरी और सच्चाई परखी जाती है। गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पंजाब नैशलन बैंक में 13,000 करोड़ रुपये के नीरव मोदी घोटाले के बाद व्यापार वित्त पोषण के लिए व्यापक रुप से इस्तेमाल किये जाने वाले गारंटी पत्र (एलओयू) और आश्वासन पत्र (एलओसी) पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है जिसके बाद रत्न एवं आभूषण क्षेत्र वित्त पोषण की समस्या का सामना कर रहा है।
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