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आपूर्ति बढऩे से एल्युमीनियम होगा नरम

जयजित दास | भुवनेश्वर May 20, 2018 09:45 PM IST

अप्रैल में तेजी के बाद अंतरराष्ट्रीय एल्युमीनियम के दामों में आने वाले महीनों में नरमी आने की संभावना है। यूसी रसल पर अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से कीमतों पर पड़ा असर कम होने से ऐसा हो रहा है। इसके अलावा, पर्यावरण संबंधी प्रतिबंधों में ढील के कारण चीन से आपूर्ति में इजाफे के कारण वैश्विक आपूर्ति में तेजी आएगी, जिससे कीमतों पर कम होने का दबाव बनेगा। फोकसइकोनॉमी द्वारा किए गए शोध से पता चलता है कि लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) पर एल्युमीनियम के दाम कैलेंडर वर्ष 2018 की अंतिम तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में गिरकर 2,146 डॉलर प्रति टन पर आ गए हैं। कैलेंडर वर्ष 2019 की समान अवधि के दौरान दामों में 2,175 डॉलर प्रति टन के साथ कुछ मजबूती आने का रुख नजर आता है। फोकसइकोनॉमी ने एल्युमीनियम क्षेत्र के लिए अपने पूर्वानुमान में कहा है कि विश्व भर में एल्युमीनियम की मांग में इजाफा होगा, क्योंकि चीनी अर्थव्यवस्था का अल्प निवेश-गहन विकास प्रारूप उत्तरोत्तर बढ़ेगा। 18 मई को नकद खरीदारों के लिए एलएमई के दाम 2,296 डॉलर प्रति टन चल रहे थे। 

 
एल्युमीनियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष तथा नैशनल एल्युमीनियम कंपनी (नालको) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक टीके चंद ने कहा कि एल्युमीनियम के दाम आगे नरम हो सकते हैं, लेकिन भारत में मांग मजबूत रहेगी। हमारा एल्युमीनियम उपभोग उत्पादन से आगे निकल चुका है। अप्रैल के शुरू में रसल पर लगाए जाने वाले अमेरिकी फैसले ने एल्युमीनियम बाजार को कष्टïकारी स्थिति में धकेल दिया था। चूंकि, रसल विश्व के एल्युमीनियम उत्पादन का छह प्रतिशत उत्पादन करती है, इसलिए बाजार में आपूर्ति में कमी का डर फैल गया था। इससे इस धातु के दाम कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गए थे। 19 अप्रैल को एलएमई पर एल्युमीनियम के दाम सात वर्ष के अपने उच्च स्तर 2,718 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गए थे। ऐसे हालात में अमेरिका को अपने प्रतिबंधों पर फिर से विचार करना पड़ा। इसलिए अमेरिकी सरकार ने जमा हुए स्टॉक का निपटान करने के लिए रसल की निर्धारित समय सीमा अक्टूबर तक बढ़ा दी और प्रतिबंध हटा लिए। 
 
चूंकि रसल पर अमेरिका के रवैये में नरमी आ गई, इसलिए इससे आपूर्ति बाधित होने और दाम गिरने का डर कम हो गया। मार्च के दौरान चीन में औद्योगिक उत्पादन में उम्मीद से अधिक कमी होने और मई में अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र में कमजोर अवधारणा होने के कारण एल्युमीनियम के दामों को आगे और कमी का सामना करना पड़ा।
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