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आयात मंजूरी से किसान नाराज

राजेश भयानी | मुंबई May 21, 2018 08:48 PM IST

किसान संगठन केंद्र सरकार द्वारा 15 लाख क्विंटल अरहर आयात को मंजूरी दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। केंद्र की यह अधिसूचना पिछले सप्ताह जारी की गई थी। महाराष्ट्र तथा कर्नाटक खरीफ फसल अरहर के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। महाराष्ट्र राज्य किसान सभा का कहना है कि अभी अरहर के दाम सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे हैं, साथ ही किसानों के पास करीब पांच लाख टन स्टॉक पड़ा हुआ है। माना जाता है कि सरकारी एजेंसियों के पास 10 लाख टन का स्टॉक है। 
 
किसान सभा के महासचिव अजित नवले कहते हैं कि महाराष्ट्र में अरहर विदर्भ जिले में व्यापक रूप में उगाई जाती है, जहां आमतौर पर किसान साल-दर-साल किसी न किसी परेशानी का सामना करते हैं। वे केवल कपास, अरहर और सोयाबीन ही उगा सकते हैं। संगठन का कहना है कि वह 1 जून को राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रहा है।  वर्ष 2016-17 में दाल के दाम 100-150 रुपये प्रति किलोग्राम थे। अगले साल किसानों ने दालों के रकबे में काफी इजाफा कर दिया। बढ़ते दामों के उस वर्ष में सरकार ने मोजाम्बिक से तीन सालों में 37.5 लाख क्विंटल दाल आयात का एक समझौता किया था। 2016 के बाद से 21.5 लाख क्विंटल का आयात किया गया और बाकी 15 लाख क्विंटल 18-19 में किया जाना था। नवी मुंबई में फ्रेंडशिप ट्रेडर्स के देवेंद्र वोरा ने कहा कि इस समय मोजाम्बिक से आयात किया जाने वाला कोटा जारी करने से किसानों को नुकसान होगा।
 
भारत के थोक बाजारों में फिलहाल अरहर के दाम 38-42 रुपये प्रति किलोग्राम हैं, जबकि एमएसपी 54 रुपये प्रति किलोग्राम है। मोजाम्बिक से दलहन आयात की लागत तकरीबन 28-30 रुपये प्रति किलोग्राम है। चूंकि, यह सौदा दो सरकारों के बीच हुआ है, इसलिए इसका सम्मान किया जाएगा। 2016-17 में भारत का अरहर उत्पादन 48.7 लाख टन था और 2017-18 में 41.8 लाख टन रहने का अनुमान है। इंडियन पल्सेज ऐंड ग्रेन्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विमल कोठारी ने कहा कि हमने सरकार को लिखा है कि अभी आयात कोटा नहीं खोला जाए, बल्कि जब कीमतें बढ़ें तब खोला जाए। त्योहारों के समय में कीमतें बढऩे की संभावना रहती है। उस अवधि के दौरान आयात की अनुमति देने से कीमतों में स्थिरता का प्रभाव होगा, अभी इससे कीमतें मंद हो जाएंगी।
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