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'इस्पात के घरेलू और निर्यात मूल्य समान हो'

मेघा मनचंदा | नई दिल्ली May 22, 2018 09:55 PM IST

इस्पात के घरेलू और निर्यात मूल्य में एकरूपता लाने के उद्देश्य से इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद, भारत (ईईपीसी इंडिया) ने केंद्र सरकार से देसी और निर्यात किए जाने वाले इस्पात के मूल्य में समानता लाने तथा कुछ इस्पात उत्पादों पर मूल सीमा शुल्क में कटौती करने सहित विभिन्न उपायों पर विचार करने की मांग की है। इंजीनियरिंग निर्यात निकाय ने बार-बार कहा है कि निर्यातकों द्वारा खरीदे जाने वाले घरेलू इस्पात के दाम निर्यात किए जाने वाले इस्पात की लागत से अधिक होते हैं। निर्यातकों के इस समूह ने एक अन्य सुझाव यह दिया है कि घरेलू रूप से विनिर्मित इस्पात के दाम कम करने के उद्देश्य से कुछ इस्पात उत्पादों पर मूल सीमा शुल्क को समाप्त कर दिया जाना चाहिए। 
 
ईईपीसी इंडिया के अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक सुरंजन गुप्ता ने कहा, 'जब हम मूल सीमा शुल्क घटाते हैं, तो घरेलू इस्पात के दाम नीचे चले जाते हैं।' केंद्र सरकार के सामने रखी गई अपनी मांग में ईईपीसी ने ऐसे उत्पादों का चयन किया, जिनका इंजीनियरिंग उद्योग में व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। ईईपीसी इंडिया का यह विश्लेषण इंजीनियरिंग उद्योग में व्यापक तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ प्राथमिक इस्पात उत्पादों तक ही सीमित है। यह विश्लेषण हॉट रॉल्ड कॉइल पर किया गया है और साथ ही यह वायर रॉड, पिग आयरन, ब्लूम और बिलेट जैसे कच्चे माल के आंकड़े भी उपलब्ध कराता है।   ईईपीसी इंडिया ने कहा कि विभिन्न स्रोतों द्वारा किए मूल्यांकन में भी भारत के घरेलू दामों में भिन्नता होती है। स्टील बिजनेस ब्रिफिंग और मेटल बुलेटिन जैसी विदेशी एजेंसियों और इस्पात मंत्रालय से हासिल की गई कीमतें संयुक्त संयंत्र समिति (जेपीसी) से प्राप्त कीमतों के मुकाबले कम होती हैं। 
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