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बनेगा चीनी का बफर स्टॉक

रॉयटर्स | नई दिल्ली May 22, 2018 09:56 PM IST

सरकार घरेलू बाजार में चीनी का सरप्लस कम करने के लिए इस जिंस का भंडार करेगी। दो आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। सरकार के इस कदम से घरेलू कीमतों में इजाफा होगा और चीनी बेचने में घाटा उठा रहीं मिलों को करोड़ों गन्ना किसानों का बकाया चुकाने में मदद मिलेगी।  एक सूत्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंत्रिमंडल 30 लाख टन चीनी का 'बफर स्टॉक' तैयार करने के लिए जल्द ही एक योजना को मंजूरी देगा ताकि घरेलू बाजार से अतिरिक्त आपूर्ति को सोखा जा सके और कीमतों में गिरावट पर अंकुश लगाया जा सके। बफर स्टॉक का मतलब सरकारी खरीद से है। दूसरे सूत्र ने कहा कि सरकार कीमतों को सहारा देने के लिए बफर स्टॉक तैयार करने के अलावा अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकती है। खाद्य मंत्रालय ने एक प्रवक्ता ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। देश में सरकारें पहले भी अतिरिक्त आपूर्ति की स्थिति से निपटने के लिए बफर स्टॉक कर चुकी हैं। 
 
सूत्रों ने कहा कि सरकार के बफर स्टॉक की योजना को मंजूरी दिए जाने के बाद चीनी मिलें अपने गोदामों में चीनी का स्टॉक करेंगी और सरकार उन्हें जिंस को रखने की लागत का भुगतान करेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना से सरकार पर करीब 12.15 अरब रुपये का बोझ आ सकता है।  सूत्रों ने कहा कि बफर स्टॉक तैयार करने के अलावा सरकार चीनी मिलों को सस्ता ऋण मुहैया कराने के बारे में भी विचार कर सकती है ताकि मिलें अपनी एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ा सकें। ब्राजील के बाद भारत विश्व का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है। देश में चीनी सीजन 2017-18 में रिकॉर्ड 303 लाख टन चीनी उत्पादिक होने का अनुमान है, जो पिछले साल 203 लाख टन रहा था। 
 
चीनी के उत्पादन में भारी बढ़ोतरी से इस जिंस की कीमतें 28 महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं। इससे मिलों के लिए गन्ना किसानों को गन्ने का भुगतान करना भी मुश्किल हो गया है। सरकार ने मार्च में चीनी निर्यात पर 20 फीसदी निर्यात शुल्क खत्म किया था और अप्रैल में मिलों से स्टॉक घटाने के लिए 20 लाख टन चीनी के निर्यात को कहा था। सरकार ने चीनी मिलों का कुछ बोझ भी खुद उठाने का फैसला किया है। सरकार ने एक ऐसी योजना को मंजूरी दी है, जिसमें वह गन्ना किसानों द्वारा चीनी मिलों को बेची गई उपज के लिए वित्तीय मदद मुहैया कराएगी। सरकार देश के 5 करोड़ गन्ना किसानों को राजी करना चाहती है, जो एक प्रभावी राजनीतिक लॉबी है। ऐसा करना इस समय ज्यादा अहम है क्योंकि अब मई, 2019 के आम चुनावों में मुश्किल से एक साल बचा है। 
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