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लागत बढऩे से सिंथेटिक धागा महंगा

विनय उमरजी | अहमदाबाद May 25, 2018 08:27 PM IST

कच्चे तेल की कीमतें बढऩे और रुपये में गिरावट की वजह से पेट्रो रसायन प्यूरीफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (पीटीए) और मोनो-एथिलीन ग्लाइकोल (एमईजी) जैसे  कच्चे माल में 20-25 प्रतिशत की तेजी से सिंथेटिक धागा उद्योग प्रभावित हो रहा है। लागत बढऩे से सिंथेटिक धागा 10-15 प्रतिशत तक महंगा हो गया है जिससे उसकी घरेलू बिक्री भी घट रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सभी पेट्रो रसायनों, पॉलिमर्स और सॉल्वेंट की कीमतों में अप्रैल के बाद से तेज वृद्घि देखी गई है और भारत में इनका आयात रुपये में गिरावट के अनुपात में महंगा हुआ है। अप्रैल से अब तक कई पेट्रो रसायनों में 4-18 प्रतिशत की कीमत वृद्घि दर्ज की गई है और प्लास्टिक सामान के लिए प्रमुख कच्चे माल पॉलिमर्स की कीमतों में भी इसी तरह की वृद्घि देखी गई है।

 
बेंजीन 885 डॉलर प्रति टन, टोलेन 805 डॉलर, नेफ्था 685 डॉलर, एमईजी 975 डॉलर, फिनॉल 1,500 डॉलर, एचडीपीई 1,390 डॉलर और एलडीपीई 1,160 डॉलर प्रति टन पर कारोबार कर रहे हैं। सोनकमल एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और एसिटोन तथा फिनॉल के बड़े कारोबारी जनक लाढानी ने कहा, 'इन पेट्रो रसायनों की कीमत कच्चे तेल का प्रभाव दिखने से पहले काफी चढ़ गई थी, क्योंकि कुछ संयंत्र रख-रखाव के लिए बंद किए गए थे। हालांकि अब आयात ज्यादा फायदे का सौदा नहीं रह गया है और इसमें कमी भी आई है, क्योंकि एक नई कंपनी ने इन पेट्रो रसायनों के उत्पादन में दस्तक दी है।' उन्होंने कहा कि बाजार में अस्थिरता पैदा हुई है।
 
उद्योग के सूत्रों के अनुसार, पीटीए और एमईजी की कीमतें पिछले एक महीने में 20-25 प्रतिशत तक चढ़ी हैं। कच्चे तेल की कीमत बढऩे से वैश्विक रुझानों में आए बदलाव की वजह से इन पीटीए और एमईजी की कीमतों में तेजी आई है। सिंथेटिक धागे, खासकर पॉलिएस्टर के लिए प्रमुख कच्चा माल होने की वजह से पीटीए और एमईजी की कीमतों का धागे पर ऐसे समय में विपरीत प्रभाव पड़ा है कि जब बाजार में मांग धीमी बनी हुई है। बॉम्बे यार्न ट्रेडर्स एसोसिएशन के जयेश पाठक ने कहा, 'धागे की कीमतों में तेजी की दो मुख्य वजह हैं - कच्चे तेल की कीमत और रुपये में गिरावट। मौजूदा समय में उद्योग पूरी तरह वैश्विक हो गया है और कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना के आधार पर तय होती हैं। इसका सिंथेटिक धागे की कीमतों पर प्रभाव पड़ा है जिनमें 10-15 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।'
 
पाठक का कहना है कि पीटीए और एमईजी जैसे कच्चे माल की कीमतें चीन द्वारा उत्पादन में कटौती किए जाने की वजह से पैदा हुई आपूर्ति किल्लत से चढ़ी हैं। उन्होंने कहा, 'पिछले एक महीने में कच्चे माल की कीमतें 20-25 प्रतिशत तक चढ़ी हैं।' सिंथेटिक धागे में घरेलू बिक्री की भागीदारी निर्यात की तुलना में काफी अधिक है। इसे देखते हुए यह उद्योग रुपये में गिरावट का लाभ उठाने से भी वंचित है, जबकि निर्यातकों को इसका लाभ मिल सकता है। उदाहरण के लिए, शानदार निर्यात की वजह से इंडो रामा सिंथेटिक्स लिमिटेड पर इस रुझान का काफी मामूली प्रभाव देखा गया। सिंथेटिक ऐंड रेयॉन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एसआरटीईपीसी) के चेयरमैन नारायण अग्रवाल ने कहा कि यह प्रभाव सूरत में अधिक स्पष्टï रूप से दिखा है, जहां क्षमता उपयोग घटकर 60 प्रतिशत से नीचे रह गया है। 
 
अग्रवाल ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'सिंथेटिक धागे की कीमतें भी 20-25 प्रतिशत तक बढ़कर 100 रुपये प्रति किलोग्राम, जबकि नायलॉन की कीमतें बढ़कर 240 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई हैं। उत्पादन 40 अरब डॉलर का है जिसमें छह अरब डॉलर का निर्यात होता है और शेष को घरेलू बाजार में बेचा जाता है। रुपये में गिरावट की वजह से घरेलू बाजार में दबाव बढ़ गया है।' 
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