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विस्तार पर 200 अरब खर्च करेगी नालको

दिलीप सत्पथी और जयजित दास | भुवनेश्वर May 27, 2018 10:47 PM IST

सार्वजनिक उपक्रम नैशनल एल्युमीनियम कंपनी (नालको) अगले पांच वर्षों में 200 अरब रुपये का पूंजीगत व्यय करने जा रही है। इस रकम का इस्तेमाल अपने उपभोग के लिए ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और एल्युमीनियम एवं एल्युमिना के मौजूदा संयंत्रों के विस्तार के लिए किया जाएगा। 

कंपनी ने 90 अरब रुपये की लागत से अपने अंगुल संयंत्र में एल्युमीनियम उत्पादन 4.6 लाख टन से बढ़ाकर 10.6 लाख टन तक पहुंचाने के लिए काम शुरू कर दिया है। इसके साथ ही यह 60 अरब रुपये की लागत से अपने इस्तेमाल के लिए 1,320 मेगावॉट क्षमता का एक नया तापीय ऊर्जा संयंत्र भी बना रही है। इसी तरह कंपनी 55 अरब रुपये की लागत से कोरापुट जिले में दामनजोड़ी स्थित अपनी 21 लाख टन क्षमता की रिफाइनरी में 10 लाख टन एल्युमिना उत्पादन की क्षमता बढ़ाने वाली है। 

नालको के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक तपन कुमार चंद ने पूंजीगत व्यय की इन योजनाओं का ब्योरा देते हुए कहा कि इनके लिए ठेके दिए जा चुके हैं और जल्द ही जमीनी स्तर पर काम शुरू हो जाएगा। हालांकि रिफाइनरी विस्तार का काम वर्ष 2021 में पूरा हो जाएगा लेकिन धातु गलाने की नई स्मेल्टर लाइन और बिजली क्षमता वृद्धि में लगभग चार साल लग जाएंगे। चंद ने कहा कि इन सभी विस्तार योजनाओं से नालको का कारोबार वित्त वर्ष 2017-18 के 93.77 अरब रुपये से दोगुना होकर वर्ष 2023-24 में 180 अरब रुपये तक हो जाएगा।

 

अगले चरण में नालको ओडिशा के ढेंकनाल जिले में 100 अरब रुपये की अनुमानित लागत से 60 लाख टन क्षमता का स्मेल्टर संयंत्र लगाने की भी सोच रही है। हालांकि इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है लेकिन तकनीकी मदद देने वाली एल्युमीनियम पेचिनी इसके बारे में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर रही है और अगले वर्ष फरवरी तक इसके तैयार होने की उम्मीद है। इस स्मेल्टर से कंपनी वर्ष 2032 तक 320 अरब रुपये का कारोबार लक्ष्य हासिल करने का इरादा रखती है। ऐसा होने पर नालको के लिए महारत्न कंपनी का तमगा मिलना आसान हो जाएगा।

इस नालको की विस्तार योजनाओं से उसका पूंजीगत आधार भी 11 अरब रुपये से ऊपर हो जाएगा। चंद ने कहा, 'यह कोई बड़ी समस्या नहीं होगी। सुविधाजनक भंडार होने और नकदी प्रवाह बढऩे से हम अधिकांश खर्चों को आंतरिक स्रोतों से पूरा कर सकते हैं।' दरअसल अंतरराष्ट्रीय बाजार में एल्युमिना एवं एल्युमिनियम की कीमतों के बढऩे से नालको को अच्छा-खासा मुनाफा हुआ है। वित्त वर्ष 2017-18 में नालको ने 13.42 अरब रुपये का शुद्धï मुनाफा कमाया है जो पिछले 10 वर्षों में सर्वाधिक है। एक साल पहले नालको को 6.69 अरब रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था। 

नालको को कम लागत पर एल्युमिना बनाने का भी फायदा हो रहा है। वुड मैकिंजी ने नालको को दुनिया का सबसे कम लागत वाला एल्युमिना उत्पादक बताया है। चालू वित्त वर्ष में नालको बॉक्साइट उत्पादन के मामले में भी सबसे कम लागत वाला उत्पादक बनना चाहती है। नालको तीन वर्षों के भीतर अपने शुद्ध लाभ में 9.35 अरब रुपये की वृद्धि करने के लिए नया कारोबारी मॉडल अपनाने की सोच रहा है। मुनाफे में अतिरिक्त वृद्धि को कई तरह की कारोबारी गतिविधियों से हासिल करने की तैयारी है। चंद ने कहा, 'हम इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही तक उत्कल-डी कोयला ब्लॉक के परिचालन, 10 लाख टन की एल्युमिना रिफाइनरी की शुरुआत, कॉस्टिक सोडा संयंत्र और कोलतार संयंत्र को शुरू करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।'

 

कंपनी को उत्कल-डी कोयला ब्लॉक से 4.6 अरब रुपये का शुद्ध लाभ होने की संभावना है। कॉस्टिक सोडा संयंत्र को गुजरात एल्कलीज ऐंड केमिकल्स लिमिेटड के साथ मिलकर गुजरात के दहेज में 19.9 अरब रुपये की लागत से स्थापित किया जाएगा। अगले दो साल में यह संयंत्र बनकर तैयार हो जाएगा। इससे एल्युमिना उत्पादन के अहम अवयव कॉस्टिक सोडा के मामले में नालको की क्षमता बढ़ जाएगी और उसे 80 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ होने की भी संभावना है।

 

नालको अपने कोलतार संयंत्र को सार्वजनिक उपक्रम नीलाचल इस्पात निगम के साथ मिलकर स्थापित करने जा रही है। इसके लिए कच्चा माल नीलाचल के कलिंगनगर कोक संयंत्र से मिलेगा। नई विस्तार योजनाओं से उत्साहित नालको ने अगले तीन वर्षों के बाद 12-13 अरब रुपये का शुद्ध लाभ जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 
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