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रुपया गिरा, पर नहीं थमी परिधान निर्यात में गिरावट

टी ई नरसिम्हन और विनय उमरजी | चेन्नई/अहमदाबाद May 27, 2018 10:50 PM IST

हाल के महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आई है और यह समय रुपया 68 प्रति डॉलर है। इसके बावजूद इस रुझान का देश के परिधान निर्यात को फायदा नहीं मिला है। परिधान निर्यात इस साल अप्रैल में डॉलर में 22.76 फीसदी गिरा है, जो लगातार सातवें महीने गिरावट है।  

अप्रैल, 2017 में परिधान निर्यात 174.74 करोड़ डॉलर का हुआ था, जो अप्रैल, 2018 में गिरकर 134.98 डॉलर पर आ गया। इस तरह इसमें 22.76 फीसदी गिरावट आई है। परिधान निर्यात अक्टूबर, 2017 से लगातार सातवें महीने गिरा है। इसके नतीजतन भारतीय निर्यातक प्रतिस्पर्धा से बाहर हो रहे हैं और नई वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली निर्यातकों के लिए अनुकूल नहीं है। निर्यातकों का मानना है कि नई कर प्रणाली में उनकी कार्यशील पूंजी की लागत बढ़ रही है और चुकाए गए कर के रिफंड में देरी के कारण नकदी की किल्लत झेलनी पड़ रही है। 

कमजोर रुपये की दरकार 

क्लोदिंग मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राहुल मेहता ने कहा, 'अगर रुपया अगले कुछ महीनों तक 68 या 69 के स्तर पर रहा तो यह कुछ हद तक ड्यूटी ड्रॉबैक के नुकसान की भरपाई कर सकता है और निर्यात में 3 से 5 फीसदी बढ़ोतरी हो सकती है।' 

निर्यातकों ने कहा है कि हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खपत केवल 1 से 2 फीसदी बढ़ रही है, लेकिन प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। अब म्यांमार और इथोपिया जैसे नए देशों से भी टक्कर मिल रही है। प्रतिस्पर्धी देशों की मुद्राओं का भी अवमूल्यन हो रहा है। इसके अलावा उनके सामने वे दिक्कतें भी नहीं हैं, जो भारतीय निर्यातकों के सामने हैं। 

परिधान का घटता उत्पादन 

परिधान निर्यात में गिरावट से इसके उत्पादन में भी कमी आई है। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के ताजा आईआईपी आंकड़ों के मुताबिक भारत के परिधान निर्यात में मार्च, 2018 में 18.6 फीसदी और अप्रैल-मार्च, 2017-18 में 11 फीसदी गिरावट आई है। यह परिधान उत्पादन में लगातार 11वीं मासिक गिरावट है।  

एईपीसी के चेयरमैन एचकेएल मागू ने कहा, 'पिछले साल (2017-18) में उद्योग ने तगड़ी वृद्धि दर्ज की थी, लेकिन जीएसटी और आरओएसएल (राज्य शुल्कों का रिफंड) का बकाया बने रहने से रुझान पर असर पड़ रहा है। हम चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द इस मसले का समाधान करे और स्थिर पड़ते निर्यात के रुझान को पलटे।'

अन्य लागतों में भी बढ़ोतरी 

बेस्ट कॉरपोरेशन मदरकेयर समेत वैश्विक ब्रांडों को आपूर्ति करती हैं। इसके प्रबंध निदेशक आर राजकुमार ने कहा कि शुल्कों के रिफंड में देरी और ड्रॉबैक में कमी के अलावा वर्तमान परिधान केंद्रों में  श्रमिकों की उपलब्धता भी एक बड़ी चिंता है और श्रमिकों में लगातार बदलाव से उत्पादकता कम है। जीएचसीएल के प्रबंध निदेशक आरएस जालान के मुताबिक इनके अलावा कच्चे माल और श्रम की ऊंची लागत से दबाव पड़ता है।

उन्होंने कहा, 'इन सभी वजहों से भारत प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में 10 से 12 फीसदी महंगा हो जाता है। आम तौर पर मार्जिन केवल 5 फीसदी के दायरे में रहता है और इसलिए ऊंची लागत कुल राजस्व और शुद्ध लाभ दोनों पर प्रतिकूल असर डाल रही है।' एईपीसी की अगुआई में परिधान निर्यातकों ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह निर्यात को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं के बारे में विचार करे। 

एईपीसी के पूर्व चेयरमैन अशोक जी राजानी ने कहा कि यह निराशाजनक है कि सरकार इस क्षेत्र के बारे में गंभीरता से विचार और मदद नहीं कर रही है, जबकि कपड़ा देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला क्षेत्र है। उन्होंने कहा, 'प्रत्येक 1 अरब डॉलर के अतिरिक्त कारोबार से 7 लाख रोजगार के मौके पैदा हो सकते हैं। लेकिन जीएसटी लागू होने, ड्यूटी ड्रॉबैक को वापस लिए जाने, रिफंड में देरी और क्षेत्र को प्रोत्साहनों के अभाव के नतीजतन इकाइयों को परिचालन बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।'
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