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पेट्रोल-डीजल के वायदा पर विचार

राजेश भयानी | मुंबई May 28, 2018 10:34 PM IST

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) पेट्रोल और डीजल में वायदा कारोबार को मंजूरी देने के बारे में विचार कर रहा है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय पहले ही इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है। पेट्रोल और डीजल उन 90 से अधिक जिंसों में शामिल हैं, जिनके डेरिवेटिव कारोबार को सरकार ने मंजूरी दी हुई है। वैश्विक स्तर पर पेट्रोल और डीजल डेरिवेटिव का कारोबार नाइमैक्स और आईसीई एक्सचेंजों पर हो रहा है। 

इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज (आईसीईएक्स) ने आठ महीने पूर्व सबसे पहले पेट्रोल और डीजल के डेरिवेटिव कारोबार का प्रस्ताव सौंपा था। सूत्रों के मुताबिक माना जा रहा है कि सेबी ने इस मामले पर विचार-विमर्श किया है और तेल मंत्रालय की राय मांगी है। उसके बाद मंत्रालय ने संबंधित एक्सचेंजों एवं तेल विपणन कंपनियों के साथ बातचीत की और फिर इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब नियामक एक्सचेंज से कई मुद्दों पर बातचीत कर रहा है। इनमें अनुबंधों की निपटान कीमत क्या होगी, डिलिवरी का तरीका क्या होगा या क्या इसका निपटान नकद में किया जा सकता है, आदि शामिल हैं। 


कच्चे तेल का कारोबार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर होता है, लेकिन इसका निपटान नकद में होता है। इसका मतलब है कि अनुबंध के एक्सपायरी के दिन जिंस की कोई डिलिवरी नहीं होगी। यहां तक कि एमसीएक्स पर कच्चे तेल के कारोबार का बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई क्रूड है, जबकि भारत के आयात में ज्यादातर हिस्सा ब्रेंट का होता है। माना जा रहा है कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सेबी से एक ऐसा अनुबंध बनाने को कहा है, जिसमें छोटे निवेशक और ट्रांसपोर्टर भी हेजिंग कर सकें। इसकी वजह यह है कि दोनों ईंधनों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और ग्राहकों के पास सीधे ऐसी कोई जिंस नहीं है, जिसकी वे हेजिंग कर सकें। 

आईसीईएक्स के एमडी और सीईओ संजित प्रसाद ने इस बात की पुष्टि की कि एक्सचेंज ने नियामक से पेट्रोल और डीजल में वायदा को मंजूरी देने के लिए संपर्क किया है। उन्होंने कहा, 'हम सेबी की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।' पेट्रोल और डीजल वायदा की कीमत भारतीय रुपये में होगी और बेंचमार्क कीमत भी भारतीय कीमतों में होगी। हालांकि पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग-अलग शहरों में अलग-अलग हैं और इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां उन्हें दैनिक आधार पर बदलती हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज और एस्सार ऑयल जैसी निजी क्षेत्र की कंपनियां भी ईंधन की खुदरा बिक्री करती हैं। इसलिए कोई एक राष्ट्रीय बेंचमार्क कीमत नहीं है, जबकि वायदा अनुबंध को दैनिक और अनुबंध निपटान के लिए एक कीमत की जरूरत होगी। 

सेबी और एक्सचेंज इस बारे में विचार-विमर्श कर रहे हैं कि किसे निपटान के लिए बेंचमार्क कीमत माना जाए। एक अन्य मुद्दा यह है कि वास्तविक हेजरों की दोनों ईंधनों की भौतिक डिलिवरी लेने में रुचि होगी। हालांकि पेट्रोल और डीजल की जरूरत रोजाना होगी और उपभोक्ताओं के लिए इनका भंडारण करना मुश्किल होगा। इसलिए एक्सचेंज ने नियामक के सामने प्रस्ताव रखा है कि तेल विपणन कंपनियों के डिपो या पेट्रोल पंप उत्पाद की डिलिवरी करेंगे। सूत्रों ने कहा कि सेबी ने इस बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। 

आईसीईएक्स को उम्मीद है कि ये अनुबंध व्यक्तिगत एवं कॉरपोरेट ग्राहकों और ट्रांसपोर्टरों के लिए आकर्षक होंगे। अगर सेबी अनुबंध कीमत पर डिपो से डिलिवरी की मंजूरी देता है तो डिलिवरी की प्रणाली तैयार की जा सकती है। ये अनुबंध बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनियों जैसे बड़े ग्राहकों के लिए समान रूप से अच्छे होंगे। 

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