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कागज कंपनियों ने बढ़ाईं कीमतें

टी ई नरसिम्हन | चेन्नई May 28, 2018 10:35 PM IST

कागज की कीमतें करीब तीन साल तक स्थिर रहने के बाद अब बढऩे लगी हैं। कागज कंपनियों ने कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण चालू वित्त वर्ष में दाम 2 से 3 फीसदी बढ़ा दिए हैं। उनके लिए पिछला वित्त वर्ष भी अच्छा रहा है। उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि वैश्विक कंपनियों ने पिछले डेढ़ महीने के दौरान कीमतों में 6 से 8 फीसदी बढ़ोतरी की है। इस अवधि में रुपया भी कमजोर हुआ है। इससे भारतीय कंपनियों को कीमतें बढ़ाने का मौका मिला है। विनिर्माताओं ने कहा है कि 2019-20 में भी कीमतें और बढऩे की संभावना है क्योंकि कच्चे माल की लागत का दबाव आगे भी बने रहने के आसार हैं। 

केयर रेटिंग्स के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2014 से सालाना औसत आधार पर लगभग स्थिर रही हैं। इसकी वजह ज्यादा आयात, लकड़ी की कीमतों में स्थिरता और बिजली एवं र्ईंधन की लागत में कमी रही। हालांकि कंपनियों ने मार्च से कीमतें बढ़ा दी हैं क्योंकि वे कच्चे माल की बढ़ी लागत का बोझ खुद वहन नहीं कर सकतीं। उदाहरण के लिए मुख्य कच्चे माल लुगदी की कीमतें ही 40 फीसदी बढ़ गई हैं। इसकी वजह यह थी कि चीन ने मिश्रित किस्म के रद्दी कागज के इस्तेमाल पर रोक लगा दी, जिससे लकड़ी की लुगदी की मांग बढ़ गई। 

इंडोनेशिया, मलेशिया और चिली जैसे प्रमुख लुगदी निर्यातकों ने ऊंची कीमतों पर चीन को निर्यात करना शुरू कर दिया। इसकेा अलावा रिसाकल्ड कागज, ईंधन, रसायन और अन्य लागतों में इजाफा हुआ है। सेंचुरी टेक्सटाइल्स ऐंड इंडस्ट्रीज में सेंचुरी पल्प ऐंड पेपर के सीईओ जेपी नारायण ने कहा, 'उत्पादन लागत बढ़ गई है, इसलिए हमारे पास कीमतें बढ़ाने के अलावा और कोई चारा नहीं है।' उन्होंने कहा कि समग्र रूप से विनिर्माण की लागत 5,000 रुपये प्रति टन बढ़कर 48,000 रुपये प्रति टन हो गई है, जबकि कीमतों में केवल 3,000 से 4,000 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी की गई है। शेष लागत वृद्धि का भार उद्योग वहन कर रहा है, जिसके एबिटा पर पहले ही दबाव है।  पिछले पांच महीनों में एबिटा 18 फीसदी से घटकर 14 से 15 फीसदी पर आ गया है और इसमें आगे और गिरावट के आसार हैं। नारायण ने कहा, 'इसे उचित स्तर पर बनाए रखना मुश्किल है, इसलिए हमें कीमतें और बढ़ानी होंगी।' 

जेके पेपर लिमिटेड के अध्यक्ष ए एस मेहता ने कहा कि कंपनी ने अप्रैल-मई में कुछ उत्पाद श्रेणियों में कीमतें बढ़ाई हैं। उन्होंने निवेशक सम्मेलन में यह संकेत दिया था वित्त वर्ष 2019 में कीमतें 2 से 3 फीसदी बढ़ाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि घरेलू बाजार में कीमतों में कटौती करने की जरूरत है। हां, पैकेज बोर्ड एक ऐसी उत्पाद श्रेणी है, जिसमें मार्जिन बहुत कम है। इसकी वजह यह है कि लुगदी की कीमतों में बढ़ोतरी से लागत बढ़ गई है। लेकिन इसकी कीमतें बढ़ाने के लिए हमें मांग-आपूर्ति की स्थिति और बाजार की कीमतों को देखना होगा।'

उन्होंने कहा कि अगर घरेलू कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई तो यह विदेशी कंपनियों के लिए भारत में आने का न्योता होगा। विनिर्माताओं को उम्मीद है कि वे कीमतें बढ़ाने में सक्षम होंगे क्योंकि इस समय सकारात्मक परिदृश्य है। 
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