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मॉनसून : ग्वार के दाम पड़े ठंडे

सुशील मिश्र | मुंबई May 31, 2018 09:15 PM IST

दक्षिणी राज्यों को भिगोते हुए मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस बार बेहतर मॉनसून से कृषि फसलें अच्छी होंगी और कृषि उत्पादन बढ़ेगा। इस कारण लगभग सभी कृषि जिंसों की कीमतों के आगे लाल निशान दिख रहा है। कृषि जिंसों के दामों में गिरावट की वजह बेहतर मॉनसून की भविष्यवाणी को माना जा रहा है। वैसे तो मॉनसून की धमक का असर सभी कृषि जिसों पर हुआ है, लेकिन फिलहाल स्थिर चल रहे ग्वार के दाम छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि ग्वार में गिरावट की कोई ठोस वजह नहीं है। 
 
अभी भले ही देश के अधिकांश हिस्से को मॉनसूनी फुहारों का इंतजार हो, लेकिन कृषि जिंसों की कीमतें मॉनसून की आहट से ठंडी पड़ गई हैं। सोयाबीन के दाम इस साल के निचले स्तर पर पहुंच गए, तो सोया तेल तीन महीने के निचले स्तर पर है। दलहन में गिरावट देखने को मिल रही है, तो मसाले भी ठंडे पड़ रहे हैं। ग्वार जैसी निर्यातक जिंस के दाम भी तेजी से लुढ़क गए हैं। हाजिर और वायदा बाजार (एनसीडीईएक्स) में ग्वार बीज गिरकर 3,600 रुपये क्विंटल के करीब पहुंच गया और ग्वार गम 7,550 रुपये क्विंटल के आस-पास चलनेे लगा। कारोबार के दौरान ग्वार के दाम भले ही छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए हों, लेकिन ग्वार में बहुत ज्यादा गिरावट होने वाली नहीं है।
 
ग्वार कीमतों में हुई गिरावट के संबंध में बीकानेर उद्योग मंडल के पुखराज चोपड़ा कहते हैं कि ग्वार और ग्वार गम की मांग और ऑपूर्ति में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस समय जो गिरावट हो रही है, वह मनोवैज्ञानिक गिरावट है। देश में बेहतर मॉनसून की खबर से लगभग सभी कृषि जिंसों की कीमतों में गिरावट हुई है। कृषि जिंसों का बाजार दबाव में आ गया है, जिसका प्रभाव ग्वार पर भी पड़ा है। फिलहाल कीमतें निचले स्तर पर हैं। अब ग्वार मेंं बहुत ज्यादा गिरावट होने वाली नहीं है। कीमतों में गिरावट की कोई ठोस वजह नहीं है, जबकि कीमतों में सुधार के आसार हैं। कहा जा सकता है कि फिलहाल कुछ दिन बाजार में मनोवैज्ञानिक दबाव के कारण कीमतें दबाव में रहेंगी, लेकिन इसके बाद ग्वार में मजबूती का दौर शुरू हो जाएगा। ग्वार बाजार में कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा है। ग्वार के कारोबारियों का कहना है बाजार में नकदी की समस्या बनी हुई है। कारोबारियों को बैंकों से कर्ज मिल नहीं रहा है और बड़ी कंपनियां आ नहीं रही हैं। ऐसे में ग्वार बाजार शांत है। इस समय ग्वार गम का औसत मासिक निर्यात 25,000 से 27,000 लाख टन के बीच हो रहा है। निर्यात मांग के अनुसार बाजार में आपूर्ति भी हो रही है। यानी मांग और आपूर्ति में कोई फर्क नहीं दिख रहा है, जिस कारण कीमतों में घट-बढ़ भी नहीं होने वाली है। 
 
इस बार बेहतर मॉनसून के कारण बुआई और उत्पादन अधिक होने के कयास पर भी ग्वार किसान किसन जीत सिंह कहते हैं कि पिछले साल राजस्थान में अच्छी बारिश हुई थी। पिछले मॉनसून सीजन में 123 फीसदी बारिश हुई थी और इस बार भी लगभग इतनी ही बारिश होने का अनुमान है। दूसरी बात यह है कि राजस्थान में मॉनसून आने में अभी एक महीने से ज्यादा का समय है, यहां मॉनसून 5-6 जुलाई तक आता है। बारिश शुरू होने के बाद ग्वार की बुआई शुरू होती है। इसीलिए अभी से बुआई के क्षेत्र का आंकलन नहीं किया जा सकता है। किसानों की बात से ग्वार कारोबारी भी सहमत हैं। उनका कहना है कि इस समय ग्वार बीज या खाद की बाजार में कोई चर्चा नहीं है, क्योंकि अभी एक महीने से भी ज्यादा का समय है। ऐसे में किसानों के लिए स्थिति को भांप पाना मुश्किल है। कुछ साल पहले जून में कुछ बड़ी कंपनियां अपना विज्ञापन शुरू कर देती थीं, लेकिन इस साल फिलहाल ऐसा कुछ नहीं है।
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