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ब्लॉक स्तर पर मौसम पूर्वानुमान शुरू

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Jun 01, 2018 11:20 PM IST

किसानों को उनकी फसलों के लिए मौसम के हालात की सटीक जानकारी देने और शहरी इलाकों में नगर निकायों को जलजमाव जैसी समस्या से निपटने में मदद करने के लिए मौसम विभाग ने अब जिला स्तर के बजाय ब्लॉक स्तर पर पूर्वानुमान जारी करने की घोषणा की है। नए मॉडल की मदद से मौसम विभाग 12 किलोमीटर के इलाके के आधार पर विशेषीकृत अनुमान जारी कर सकता है। 

भारतीय मौसम विभाग ने शुक्रवार को नया पूर्वानुमान मॉडल अपनाने का ऐलान करते हुए कहा कि अब वह ग्रामीण इलाकों में 12 किलोमीटर के दायरे के लिए पूर्वानुमान कर पाने में सक्षम है। अभी तक मौसम विभाग 23 किलोमीटर के दायरे को आधार बनाते हुए अपना पूर्वानुमान जारी करता रहा है। इसका मतलब है कि अब जिला स्तर के बजाय अलग-अलग ब्लॉक के लिए भी मौसम पूर्वानुमान जारी किए जा सकेंगे। 


इससे न केवल किसानों को अपनी फसलों के लिए तैयारी करने में मदद मिलेगी बल्कि शहरी इलाकों में जलजमाव जैसी स्थिति से भी निपटना अपेक्षाकृत आसान हो जाएगा। किसी शहर में तेज बारिश का पूर्वानुमान जताए जाने के बाद वहां का स्थानीय प्रशासन जलजमाव से निपटने के लिए पूर्व-तैयारी कर सकता है। इसी तरह सूखे की आशंका वाले इलाकों के लिए भी स्थानीय प्रशासन के लिए पहले से इंतजाम कर पाना आसान हो जाएगा। 

मौसम विभाग छोटे इलाकों के लिए पूर्वानुमान लगाने के लिए अभी तक इकलौते मॉडल का ही इस्तेमाल करता रहा है लेकिन वह अधिक सटीक नहीं साबित हो पाता है। इसी खामी को दूर करने के लिए विभाग ने अब नया मॉडल अपनाया है जिसमें हवा की रफ्तार, तापमान, बारिश की मात्रा और नमी जैसे 20 मानदंडों का इस्तेमाल किया जाएगा। नए मॉडल से छोटे इलाकों के लिए भी सटीक मौसम पूर्वानुमान कर पाना संभव होगा। 

मौसम विभाग संभावित गतिविधि से कम-से-कम छह दिन पहले ये पूर्वानुमान जारी करेगा। इससे जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों, किसानों और मछुआरों एवं अन्य लोगों के लिए किसी भी प्रतिकूल स्थिति से निपटने के लिए तैयारी करने का पर्याप्त वक्त मिल जाएगा।

खास तौर पर बारिश संबंधी पूर्वानुमान फसलों की बुआई, सिंचाई और कटाई संबंधी कार्यों के लिए किसानों के काफी काम आ सकती है। देश भर के करीब 6500 ब्लॉक के लिए अलग-अलग पूर्वानुमान जारी होने से किसान अपने क्षेत्र के आधार पर फसली सत्र निर्धारित कर सकते हैं।

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून दक्षिणी भारत में दस्तक दे चुका है और जल्द ही इसके मध्य एवं पूर्वी भारत की तरफ भी बढऩे की संभावना है। इस साल मॉनसूनी बारिश के काफी हद तक सामान्य रहने के अनुमानों के बीच ब्लॉक स्तर के पूर्वानुमान की सुविधा आज से शुरू हो गई है। फिलहाल इस मॉडल के जरिये बारिश संबंधी पूर्वानुमान ही जारी किए जाएंगे लेकिन जल्द ही इसका इस्तेमाल झुलसती गर्मी और शीतलहर जैसी प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के लिए भी किया जाएगा।

हालांकि भीषण आंधी और तूफान आने के अलावा ओलावृष्टि के बारे में केंद्रित अनुमान लगाने का मामला अभी परीक्षण के स्तर पर है। मौसम विभाग ने छोटे इलाकों के लिए इस तरह के पूर्वानुमान की सटीकता जांचने के लिए एक विशेषज्ञ पैनल का गठन किया है। दरअसल पिछले महीने देश के अलग-अलग इलाकों के लिए तेज आंधी और तूफानी हवाओं संबंधी मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने लोगों को काफी परेशान कर दिया था। खासकर उत्तरी एवं पूर्वोत्तर के राज्यों में तो लोग इस पूर्वानुमान के चलते काफी डर गए थे।

इस तरह के हालात की पुनरावृत्ति रोकन के लिए मौसम विभाग पहले इसकी सटीकता परखना चाहता है। मौसम विभाग के महानिदेशक के जे रमेश ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, 'नए मॉडल के जरिये हम मॉनसूनी बारिश और इसके क्षेत्रवार वितरण के बारे में सटीक अनुमान लगा सकेंगे। अभी तक हम 23 किलोमीटर की दूरी तक के लिए ही पूर्वानुमान लगा पाते थे लेकिन अब 12 किलोमीटर के लिए भी सटीक अनुमान लगा सकते हैं।' 

दुनिया की कई मौसम एजेंसियां लंबी अवधि का पूर्वानुमान करने के लिए इस तरह के मॉडल का इस्तेमाल करती रही हैं लेकिन भारतीय मौसम विभाग पहली बार इस मॉडल का इस्तेमाल छोटी अवधि के अनुमान के लिए कर रहा है। नए मॉडल की मदद से किसी इलाके के मौसम के बारे में 5-7 दिन पहले भी पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
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