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दूध की प्रचुरता से भंडारण में दिक्कत एनडीडीबी ने लगाई मदद की गुहार

निर्माल्य बेहड़ा | भुवनेश्वर Jun 03, 2018 09:40 PM IST

भारत समेत दुनिया भर में दुग्ध उत्पादन की प्रचुरता होने से दुग्ध उत्पादकों के लिए अपने दूध का वाजिब मूल्य मिल पाना खासा मुश्किल होने लगा है। दूध की बहुतायत होने से डेयरी संयंत्रों को भी बढ़ती आवक संभाल पाने में दिक्कत हो रही है। राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (एनडीडीबी) ने इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि वह दूध की बढ़ती आवक संभालने में मदद के लिए सहकारी समितियों को रियायतें दे। दरअसल वैश्विक स्तर पर भी दुग्ध उत्पादन अधिक होने से इसके निर्यात की संभावना भी काफी कम हो गई है। 

 
एनडीडीबी के चेयरमैन दिलीप रथ ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में दूध की आपूर्ति बढऩे से समस्या पैदा होने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा, 'पूरी दुनिया में दूध का प्रचुर उत्पादन हुआ है जिसके चलते मिल्क पाउडर की कीमतें तेजी से कम हुई हैं। भारत की दुग्ध सहकारी समितियों और निजी कंपनियों के पास मिल्क पाउडर का भारी स्टॉक जमा हो चुका है। अकेले सहकारी क्षेत्र में ही मिल्क पाउडर का करीब 2 लाख टन भंडार जमा है। इस वजह से उनकी कार्यशील पूंजी भी फंस चुकी है।'
 
दुग्ध कंपनियों को दूध की खरीद बनाए रखने में भी मुश्किलें पेश आ रही है। कारोबार में बने रहने के लिए उन्होंने दुग्ध उत्पादकों को दिए जाने खरीद मूल्य में कटौती का तरीका अपनाया है। हालांकि मदर डेयरी जैसी सहकारी इकाइयों ने किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमतें में कटौती नहीं की है। रथ ने कहा कि एनडीडीबी दुग्ध बाजार की हालत बेहतर होने का इंतजार कर रहा है। मौजूदा हालात में दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों को राहत देने के लिए एनडीडीबी ने सरकार के सामने दो सुझाव रखे हैं। पहला सुझाव यह है कि पांच फीसदी की अपेक्षाकृत कम ब्याज दर पर कार्यशील पूंजी दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों को मुहैया कराई जाए। दूसरा सुझाव यह है कि सरकार सहकारी समितियों को उनका स्टॉक बनाए रखने के लिए भंडारण लागत के नाम पर मदद दे। एनडीडीबी ने केंद्र के पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन मंत्रालय को अपने ये सुझाव भेज दिए हैं लेकिन अभी तक इन पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।
 
भारत दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक है। वित्त वर्ष 2015-16 में भारत ने 16.5 करोड़ टन दूध का उत्पादन किया था। अनुमान है कि वर्ष 2017-22 की अवधि में भारत का दुग्ध उत्पादन सालाना 16 फीसदी की दर से बढ़ेगा। हालांकि दूध के बढ़ते उत्पादन ने किसानों के सामने वाजिब मूल्य नहीं मिल पाने की हालत पैदा कर दी है। परेशान होकर महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में दुग्ध उत्पादकों ने सात दिनों तक विरोध प्रदर्शन भी किया है। इन किसानों ने सरकार से दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने की मांग की है। वैसे महाराष्ट्र सरकार ने प्रति लीटर दूध पर तीन रुपये की सब्सिडी किसानों को देने की घोषणा की है लेकिन उससे कोई खास मदद नहीं मिल पा रही है। उचित मूल्य नहीं मिलने से परेशान दुग्ध उत्पादकों ने 1 देश भर में होने वाले किसान प्रदर्शन का हिस्सा बनने की घोषणा की है। 
 
पिछले साल जब किसानों ने उपज का बेहतर मूल्य नहीं मिल पाने के मुद्दे पर आंदोलन किया था तो दुग्ध उत्पादक किसानों ने शहरी इलाकों में दूध की आपूर्ति ही रोक दी थी। महाराष्ट्र में कई जगहों पर किसानों ने हजारों लीटर दूध सड़कों पर बहा दिया था।
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