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कम दाम से ठंडा पड़ रहा झींगा निर्यात

निर्माल्य बेहड़ा | भुवनेश्वर Jun 04, 2018 10:02 PM IST

झींगे के निर्यात से सामान्य आमदनी हो रही है, जिससे 5 अरब डॉलर के भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात बाजार से जुड़ी आपूर्ति शृंखला के भागीदारों का शुद्ध मुनाफा प्रभावित हो रहा है।  देश के समुद्री खाद्य निर्यात में अहम योगदान देने वाले झींगे की निर्यात कीमतें पिछले कुछ महीनों के दौरान 20 फीसदी से ज्यादा कम हुई हैं, जिसकी वजह वियतनाम, थाईलैंड, इक्वाडोर जैसे प्रतिस्पर्धी देशों से आपूर्ति बढऩा है। निर्यातकों का कहना है कि झींगे की प्रमुख किस्मों के दाम पिछले साल के मुकाबले दो डॉलर प्रति किलोग्राम यानी करीब 30 फीसदी कम हैं। 

 
एक निर्यातक ने नाम न प्रकाशित करने का आग्रह करते हुए बताया कि इस समय एक विशेष किस्म के झींगे की कीमत 5.40 डॉलर प्रति किलोग्राम है, जो पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी कम है। कीमतों में ज्यादातर गिरावट पिछले कुछ महीनों के दौरान आई है। एक निर्यातक ने कहा कि रुपये के अवमूल्यन से भी ज्यादा मदद नहीं मिली है।  झींगा किसान, विशेष रूप से आंध्र प्रदेश के किसान केवल एक फसल लेने को बाध्य हैं, जबकि आम तौर पर एक साल में तीन फसलें ली जाती हैं। इससे उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। फसलों में कमी का असर झींगे का खाद्य मुहैया कराने वाले आपूर्तिकर्ताओं पर भी पड़ा है। झींगा उत्पादन क्षेत्र (हैचरी) के मालिकों पर भी असर पड़ेगा। 
 
एक निर्यातक ने कहा, 'भारतीय झींगे की निर्यात कीमतें पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 20 फीसदी से ज्यादा घट गई हैं। इससे निर्यातकों की आमदनी पर भी असर पडऩे के आसार हैं। निर्यात पिछले दो वर्षों जितना अच्छा नहीं रहेगा और मांग बढऩे में समय लगेगा। वर्तमान माहौल में वे ही अपना वजूद बचा पाएंगे, जिनकी शृंखला के सभी स्तरों पर मौजूदगी है।' एक अन्य बड़ी निर्यात कंपनी के अधिकारी ने कहा कि इस साल निर्यातकों के कारोबार में भारी गिरावट आएगी। क्रिसिल रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस वित्त वर्ष में समुद्री खाद्य का निर्यात 17 से 18 फीसदी बढ़ेगा, जो वित्त वर्ष 2017 में 23 फीसदी और वित्त वर्ष 2018 में 25 फीसदी के मुकाबले 500 से 700 आधार अंक कम है। 
 
अमेरिका को किए जाने वाले झींगा निर्यात से 70 फीसदी कमाई होती है, लेकिन यह वित्त वर्ष 2019 में 10 फीसदी घटने के आसार हैं। मत्स्यपालन क्षेत्र की चिंताजनक स्थिति को भांपते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र सरकार से इस मामले में दखल देने का आग्रह किया है। नायडू ने कहा है कि झींगा किसानों से झींगे की खरीद कीमतों में गिरावट की स्थिति से निपटने के लिए एक कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए। इसके अलावा आंध्र सरकार ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि कीमतों में और गिरावट को रोकने के लिए रूस, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे नए बाजार तलाशे जाने चाहिए। माना जा रहा है कि एंटीबायोटिक के अंश से संबंधित मसलों के कारण बड़े बाजारों को निर्यात में भारी गिरावट आई है।  हालांकि भारत अमेरिका को निर्यात करने वाले सबसे बड़े निर्यातक के रूप में उभरा है, लेकिन कीमतों में भारी गिरावट आई है। 
 
हाल के वर्षों में झींगा भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात का अगुआ रहा है। इसके राजस्व में 2017 और 2018 में क्रमश: 21 प्रतिशत और 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।  क्रिसिल केअनुसार, पिछले वित्त वर्ष में भारत के निर्यात में विश्व के सबसे बड़े समुद्री खाद्य आयातक अमेरिका का योगदान 31 प्रतिशत रहा और वियतनाम का 28 प्रतिशत। पिछले पांच सालों में अमेरिका को किया जाने वाला भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात 26 प्रतिशत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर पर पहुंच चुका है।
 
पिछले साल अमेरिका का 27 प्रतिशत झींगा आयात भारत से हुआ था। यह वियतनाम के लिए भी एक बड़ा निर्यात बाजार है, जो भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, क्योंकि भारत का28 प्रतिशत निर्यात वियतनाम को किया जाता है। रेटिंग एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका द्वारा भारत या वियतनाम से संबंधित व्यापार नीतियों में कोई भी बदलाव भारतीय निर्यात को प्रभावित कर सकता है। क्रिसिल ने पूर्वानुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2019 में अमेरिकी झींगा निर्यात की आमदनी (डॉलर में) 10 प्रतिशत कमी हो सकती है। 
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