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भाजी में खुदरा कारोबारियों की चांदी

सुशील मिश्र | मुंबई Jun 05, 2018 09:59 PM IST

किसान पिछले पांच दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन और विरोध-प्रदर्शन के बावजूद मंडियों में सब्जियों की आवक बढ़ी है। आपूर्ति बढऩे के कारण थोक बाजार में कीमतों में खास असर देखने को नहीं मिल रहा है, जबकि खुदरा बाजार में किसान आंदोलन का डर दिखाकर दुकानदार जमकर कमाई कर रहे हैं। खुदरा बाजार में कुछ सब्जियों के दाम दोगुना हो गए हैं।  मंगलवार को मुंबई की थोक मंडी वाशी में करेला 2,700 रुपये, बैगन 1,400 रुपये, पत्तागोभी 1,000 रुपये, फूलगोभी 1,600 रुपये, भिंडी 2,300 रुपये, प्याज 1,050 रुपये, आलू 6,500 रुपये, टमाटर 1,500 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही थी। वहीं किसान आंदोलन शुरू होने से पहले थोक बाजार में भी सब्जियों के दाम कमोबेश यही थे। थोक बाजार के कारोबारियों का कहना है कि थोक बाजार में 50 से 100 रुपये की घटबढ़ आम बात होती है। इसे आंदोलन से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है। पत्तागोभी, भिंडी और टमाटर के भाव गिर गए हैं। कारोबारियों के मुताबिक बाजार में आवक बढ़ी है जिससे कीमतों में गिरावट होगी। बाजार में आपूर्ति मांग के अनुरूप है। इसलिए कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं होगा। 
 
इधर, खुदरा बाजार में सब्जियों के दाम तेजी से बढ़े हैं। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार खुदरा बाजार में करेला 40 रुपये से बढ़कर 50 रुपये, बैगन 40 रुपये से 60 रुपये, पत्तागोभी 20 रुपये से 40 रुपये, फूलगोभी 40 रुपये से 60 रुपये, आलू 20 रुपये से 24 रुपये, टमाटर 20 रुपये से 30 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। वहीं बोर्ड के आंकड़ों से इतर खुदरा बाजार में दुकानदार मनमाने भाव वसूल रहे हैं। खुदरा दुकानदारों का कहना है कि किसान आंदोलन के कारण माल नहीं आ रहा है जिससे कीमतें बढ़ी हैं। मुंबई के बोरिवली क्षेत्र में 80 रुपये प्रति किलो टमाटर बेच रहे दुकानदार कहते हैं कि किसान माल नहीं दे रहे हैं जिससे कीमतें बढ़ी हैं। 
 
आपूर्ति के आंकड़ों के अनुसार खुदरा कारोबारियों के दावे झूठे साबित हो रहे हैं। किसान आंदोलन के बीच कृषि उत्पन्न बाजार समितियों में सब्जियों की आवक बढ़ी है। बाहरी आवक पर निर्भर रहने वाली मुंबई में आपूर्ति पहले से ज्यादा हो रही है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक किसान आंदोलन शुरू होने के पहले मुंबई में करेला की आपूर्ति 14 टन थी जो 5 जून को 17 फीसदी बढ़कर 38 टन पहुंच गई। बैगन की आपूर्ति 32 टन हो रही थी जो 5 जून को बढ़कर 104 टन हो गई। पत्तगोभी की आपूर्ति 195 टन से बढ़कर 219 टन हो गई। गोभी की आवक 143 टन से बढ़कर 171 टन हो गई। अदरक की आपूर्ति 90 टन से बढ़कर 94 टन हो गई। भिंडी की आपूर्ति 143 टन से बढ़कर 176 टन, प्याज 1,232 टन से बढ़कर 1,792 टन, आलू की आवक 1,240 टन की जगह 8,400 टन हो गई। टमाटर की आवक भी 215 टन से बढ़कर 279 टन हो गई। हालांकि मटर की आवक में थोड़ी कमी दिख रही है। आंदोलन शुरू होने के पहले मटर की आपूर्ति 81 टन थी जो 5 जून को 70 टन थी। वहीं लहसुन की आवक 160 टन से घटकर 144 टन रह गई। 
 
किसानों के गांव बंद आंदोलन को महाराष्ट्र में खास प्रतिक्रिया नहीं मिली है। किसान आंदोलन को महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार ने समर्थन दिया है। इसके बावजूद आंदोलन बेअसर रहा। किसान आंदोलन महज कुछ जगहों पर सीमित रह गया है। इस पर किसान संघर्ष समिति के नेता डॉक्टर अजीत नवेल कहते हैं कि 7 जून तक सरकार उनकी बात नहीं सुनती है तो वे शहरों में दूध और सब्जी की आपूर्ति बंद कर देंगे और 10 जून को चक्का जाम करेंगे। आंदोलन में शामिल नेताओं का कहना है कि अभी हमने पूरी तरह से आपूर्ति नहीं रोकी है क्योंकि सरकार को कुछ समय दिया गया है। अगर सरकार उनकी बात नहीं सुनती है तो शहरों की आपूर्ति पूरी तरह रोक दी जाएगी। 
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