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कागज आयात 31 प्रतिशत बढ़ा

टीई नरसिम्हन | चेन्नई Jun 06, 2018 08:43 PM IST

वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान कागज आयात 31.18 प्रतिशत बढ़कर 19 लाख टन पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 14 लाख टन था। इसके परिणामस्वरूप कागज विनिर्माण उद्योग ने सरकार से सुधारात्मक उपायों के रूप में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उद्योग के सूत्रों ने कहा कि वाणिज्यिक सूचना और सांख्यिकी महानिदेशालय (डीजीसीआई ऐंड एस) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में वित्त वर्ष 2018 में अखबारी कागज समेत कुल आयात 33 लाख टन के स्तर तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 18 में आसियान देशों, चीन और दक्षिण कोरिया से भारत में कागज और गत्ते का आयात क्रमश: 32.59 प्रतिशत, 56.45 प्रतिशत और 57.19 प्रतिशत बढ़ा है।

 
मात्रा की दृष्टिï से इस वित्त वर्ष के दौरान चीन से आयात 5.1 लाख टन पर पहुंचा गया, जबकि आसियान और दक्षिण कोरिया से आयात क्रमश: 3.3 लाख टन और 1.5 लाख टन रहा। इंडियन पेपर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईपीएमए) के अध्यक्ष सौरभ बांगड़ ने कहा कि भारत विश्व में कागज और गत्ते का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है, जिसकी वृद्धि दर 7-8 प्रतिशत प्रति वर्ष है और यह बढ़ता आयात घरेलू उद्योग के लिए खतरा है। संगठित खुदरा व्यापार के जरिये एफएमसीजी उत्पादों की बेहतर गुणवत्ता वाली पैकेजिंग की मांग, स्वास्थ्य सेवा का बढ़ता व्यय, दवाई और फार्मा क्षेत्र में विकास तथा तैयार खाद्यों की बढ़ती पसंद कागज और गत्ते की पैकेजिंग की मांग के प्रमुख प्रेरक हैं।
 
उन्होंने कहा कि कच्चे माल और ऊर्जा की ऊंची लागत के कारण घरेलू विनिर्माता प्रतिस्पर्धी लागत पर कागज और गत्ता विनिर्माण के मसलों से जूझ रहे हैं। वे मुक्त व्यापार समझौतों के तहत विस्तृत होते तरजीह शुल्कों की वजह से घरेलू बाजार में बढ़ते सस्ते आयात की भारी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं। बांगड़ ने कहा कि घरेलू विनिर्माताओं ने हाल ही में स्वच्छ पर्यावरण के अनुकूल तकनीक के क्रियान्वयन और उन्नयन, उत्पादों की गुणवत्ता, वानिकी आदि में बड़ी राशि का निवेश किया है तथा अन्य निवेश पर काम चल रहा है। शून्य शुल्क या तरजीह आयात शुल्क पर आयात को मंजूरी के द्वारा इतने बड़े निवेश को न तो खतरे में डाला जा सकता है और न ही डाला जाना चाहिए।
 
2010-11 से 2017-18 तक सात साल की अवधि में कागज और गत्ते के आयात में 19.47 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) का इजाफा हुआ है, जो पांच लाख टन से बढ़कर 19 लाख टन पर पहुंच गया है। समान अवधि में आसियान देशों, चीन और दक्षिण कोरिया से आयात में क्रमश: 41.75 प्रतिशत, 18.35 प्रतिशत और 57.94 प्रतिशत सीएजीआर का इजाफा हुआ है।  आसियान और दक्षिण कोरिया के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के अंतर्गत कागज और गत्ते के आयात पर भारत द्वारा लगाए गए मूल सीमा शुल्क में लगातार होने वाली इस कमी की शुरुआत सात वर्ष की अवधि से ही हो रही है। आईपीएमए के महासचिव रोहित पंडित ने कहा कि सरकार को आयात के मुकाबले घरेलू विनिर्माताओं को समानता का स्तर उपलब्ध कराना चाहिए, क्योंकि विदेशी विनिर्माताओं के पास अपने इस्तेमाल के लिए बागानों की आसान उपलब्धता होती है और इसीलिए उनके देशों में कच्चा माल तथा ऊर्जा भी काफी ज्यादा प्रतिस्पर्धी लागत पर मिलती है।
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