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महाराष्ट्र सरकार ने चने और अरहर की खरीदारी बंद की

सुशील मिश्र | मुंबई Jun 06, 2018 08:44 PM IST

महाराष्ट्र सरकार ने एमएसपी के तहत चने और अरहर (तुअर) की खरीदारी रोकने का फैसला किया है। गोदामों में पर्याप्त जगह नहीं होने और पैकेजिंग की दिक्कत के कारण राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है। किसानों से सीधे खरीदारी की जगह अब सरकार भावांतर योजना के तहत चने और अरहर की खरीदारी करेगी। इसके तहत बाजार भाव और एमएसपी के बीच के अंतर को सरकार सीधे किसान को देगी। अरहर की खरीद पूरे हुए बिना खरीद केंद्रों के बंद होने से किसानों में बढ़ते रोष को देखते हुए राज्य सरकार केंद्र सरकार से खरीद की समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रही है। हालांकि मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने महाराष्ट्र में चने और लहसुन की खरीद की अवधि क्रमश: 13 जून और 20 जून तक बढ़ाने की घोषणा की है। केंद्र सरकार के फैसले के बाद महाराष्ट्र मंत्रिमंडल, नेफेड तथा कृषि विभाग के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में चने और अरहर की खरीद, उसके स्टॉक तथा पैकेजिंग और इसके सार्वजनिक वितरण केंद्रों तक पहुंचाने पर चर्चा हुई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकारी गोदामों में भारी स्टॉक के कारण सरकार ने फैसला लिया है कि चने और अरहर की सरकारी खरीद बंद की जाएगी, लेकिन किसानों को नुकसान से बचाने के लिए चने और अरहर में प्रति क्विंटल 1,000 रुपये सरकार किसानों के खाते में सीधे जमा कराएगी। 
 
महाराष्ट्र के विपणन मंत्री सुभाष देशमुख ने बताया कि राज्य में इस वर्ष एक फरवरी से न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ अरहर की खरीद शुरू की गई थी। खरीद की अवधि समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार ने 15 मई तक इसकी मियाद बढ़ाई थी। इस साल अरहर खरीद का लक्ष्य 44 लाख क्विंटल था जिसमें 15 मई तक 193 खरीद केंद्रों पर 33,15,132 क्विंटल अरहर की खरीद की गई। अब गोदामों में जगह की कमी के कारण खरीदारी करना मुश्किल है। इसलिए किसान अपनी उपज मंडियों में बेच सकते हैं और उसकी रसीद नेफेड में जमा करा सकते हैं। इसमें किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई सरकार करेगी। 
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