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दूर नहीं होगा गन्ना किसानों का दुख!

राजेश भयानी | मुंबई Jun 07, 2018 08:46 PM IST

मुंबई के थोक बाजार में चीनी के दाम 29 रुपये प्रति किलोग्राम को पार कर गए हैं। चीनी मिलों के लिए न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) के रूप में 29 रुपये प्रति किलोग्राम तय करने के मंत्रिमंडल केफैसले के बाद ऐसा हुआ। फिलहाल, बाजार के लिए 29 रुपये बेंचमार्क दाम बन गए हैं। उद्योग के अधिकारी ज्यादा दाम चाहते थे, क्योंकि भारत की चीनी की उत्पादन लागत तकरीबन 35 रुपये प्रति किलोग्राम होने का अनुमान है, जो उत्तर प्रदेश में 36 रुपये और महाराष्ट्र में 34 रुपये हो सकती है।
 
हालांकि, यह एमएसपी अब भी मिलों के लिए चीनी की औसत उत्पादन लागत 35 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में 21 प्रतिशत कम है। मिलों द्वारा किसानों को अदा किए जाने वाले गन्ने के उचित एवं लाभकारी (एफआरपी) के मद्देनजर ये दाम रंगराजन समिति के फॉर्मूले के हिसाब से चीनी के उचित मूल्य की तुलना में 23.5 फीसदी कम है। इस कारण उद्योग को लग रहा है कि मिलों द्वारा किसानों का बकाया चुकाना मुश्किल होगा। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक अविनाश वर्मा का कहना है कि मिलों को किसानों का बकाया भुगतान करना मुश्किल लगेगा। बाजार के हालात और सभी प्रोत्साहनों को ध्यान में रखने के बावजूद, बड़ा बकाया बिना भुगतान के रह सकता है। सरकार मिलों के लिए एमएसपी में 35 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा कर सकती थी, जिसकेलिए अतिरिक्त सब्सिडी का व्यय नहीं होता। उपभोक्ता मूल्य बढ़ सकता था, लेकिन चीनी की अधिकता के इस परिदृश्य में उपभोक्ताओं के लिए दाम सीमित रहते।
 
हालांकि, व्यापारिक अधिकारी इससे सहमत नहीं हैं। ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन के चेयरमैन प्रफुल्ल विठलानी के अनुसार, मिलें करीब 23.50-24 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक्री कर रही थीं और आज उन्होंने 29 रुपये पर ब्रिकी की, जो एमएसपी है। इस प्रकार, एमएसपी ने उनके लिए 5.50 रुपये प्रति किलोग्राम की अधिक आमदनी सुनिश्चित कर दी। उद्योग के स्तर पर यह 140 अरब रुपये का बड़ा इनाम साबित होता है। बिना किसी अतिरिक्त सब्सिडी के सरकार ने उद्योग को यह बड़ा इनाम दे दिया। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन ने सरकार को लिखा था कि रंगराजन समिति के फॉर्मूले के अनुसार, चीनी के दाम 35.8 रुपये प्रति किलोग्राम होने चाहिए, जिसमें चीनी के दाम गन्ने की मौजूदा एफआरपी के आधार पर उत्पादन लागत के साथ जोडऩे का प्रस्ताव है। 
 
हालांकि, सरकार ने चीनी के न्यूनतम मूल्य के रूप में 29 रुपये प्रति किलोग्राम तय किए हैं। इस कारण, किसानों को भुगतान किया जाने वाला 225-230 अरब रुपये का गन्ना बकाया चुकता करने के लिए जो राशि होनी चाहिए थी, उसके मुकाबले यह एमएसपी बहुत कम है। सरकार ने जिस 30 लाख टन के बफर स्टॅाक की घोषणा की है, उसकी लागत 11.75 अरब रुपये आएगी और चीनी निर्यात के लिए गन्ना सब्सिडी 15.40 अरब रुपये होगी। इस बात को ध्यान में रखने के बावजूद मिलें अपनी लागत पूरी नहीं कर पा रहीं, क्योंकि एक अनुमान के अनुसार, इन दोनों सब्सिडी का असर प्रति किलोग्राम एक रुपया होगा। जो चीनी बफर स्टॉक का हिस्सा होगी, उसका भंडारण मिलों के गोदामों में किया जाएगा। 
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