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राज्य शुल्कों का रिफंड होगा जारी

दिलीप कुमार झा | मुंबई Jun 08, 2018 09:55 PM IST

भारतीय वस्त्र उद्योग के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सरकार जल्द ही राज्य शुल्कों के रिफंड (आरओएसएल) के तहत कुल बकाया राशि का 60 प्रतिशत जारी करने की तैयारी में है। इससे कपड़ा और वस्त्र निर्माताओं को कार्यशील पूंजी की तंगी से राहत मिल सकती है।  हाल ही में हुई एक बैठक में सरकार ने पिछले साल वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद से रोके गए राज्य शुल्कों के रिफंड की 60 प्रतिशत बकाया राशि को मंजूरी देने के लिए जल्द ही 15 अरब रुपये जारी करने का आश्वासन दिया है। एक अनुमान केमुताबिक, राज्य शुल्कों की वापसी के तहत सरकार के पास 25 अरब रुपये की राशि अटकी हुई है। इसने परिधान और तैयार वस्त्र समेत पूरे कपड़ा उद्योग के लिए कार्यशील पूंजी को अवरुद्ध कर दिया है।
 
सरकार के पास इतनी बड़ी रकम अवरुद्ध पड़ी होने के बावजूद, भारतीय वस्त्र निर्यातक अपने ऋणदाताओं को ब्याज का भुगतान कर रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप उद्योग को दोगुना झटका झेलना पड़ रहा है। इस प्रकार, राज्य शुल्कों की रिफंड राशि जारी किए जाने से इस तिमाही केबाद कपड़ा निर्यातकों की सकल आय और शुद्ध आय बेहतर होगी, क्योंकि सरकार ने पर्याप्त कोष उपलब्ध कराने के बाद कपड़ा क्षेत्र के भागीदारों को खेप की तारीख से दो सप्ताह में राज्य शुल्कों के रिफंड की राशि जारी करने का आश्वासन दिया है। सूती कपड़ा निर्यात संवर्धन परिषद (टेक्सप्रोसिल) के चेयरमैन उज्जवल लाहोटी ने कहा कि यह कपड़ा उद्योग के लिए बड़ी राहत है। एक ओर जहां निर्यातक राज्य शुल्क रिफंड के तहत इतनी बड़ी राशि अटकने के कारण कार्यशील पूंजी की तंगी का सामना कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर निर्यातक सरकार के पास अवरुद्ध पड़े धन पर उधारदाताओं को ब्याज का भुगतान कर रहे थे। इस आश्वासन सेवस्त्र निर्यातकों को इस दोहरी मार से राहत मिलेगी।
 
वित्त मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के साथ हुई इस बैठक में यह फैसला किया गया कि राज्य शुल्कों के रिफंड का शेष 40 प्रतिशत जल्द ही जारी किया जाएगा। सेंचुरी टेक्स्टाइल ऐंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरके डालमिया ने कहा कि राज्य शुल्कों का रिफंड एक बड़ा मसला था। इससे पूरा कपड़ा उद्योग काफी समय से जूझ रहा था। हालांकि, यह धन जारी करने के पक्ष में सरकार का इरादा स्पष्ट था, लेकिन इसका वास्तविक वितरण अब तक एक मसला बना हुआ है। राज्य शुल्कों के रिफंड को शीघ्रता से जारी करनेके लिए सरकार की इस नई प्रतिबद्धता से कपड़ा निर्यातकों को राज्य करों की वापसी में आसानी होगी। इससे निर्यातकों के पास नकदी में सुधार होगा और कार्यशील पूंजी की तंंगी में राहत मिलेगी। हालांकि, वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान सूती वस्त्रों का निर्यात सात प्रतिशत बढ़कर 11 अरब डॉलर हो गया है, लेकिन इसमें अगले पांच वर्षों में 20 अरब डॉलर पार करने की संभावना है। अलबत्ता, इसके लिए सरकारी नीतियों में और छूट की आवश्यकता है।
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