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स्वर्ण आयात में 18 प्रतिशत गिरावट!

राजेश भयानी | मुंबई Jun 10, 2018 08:59 PM IST

पिछले साल स्वर्ण आयात में तीव्र वृद्धि के बाद वर्ष 2018 में स्वर्ण आयात करीब 15-18 प्रतिशत गिरकर 720-750 टन के बीच रह सकता है, जबकि 2017 में यह 880 टन था। नीति निर्माताओं और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लिए यह राहत की बात हो सकती है। 6 जून को प्रस्तुत मौद्रिक नीति में आरबीआई ने अप्रैल 2018 में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर के मुकाबले सोने के साथ-साथ मोती और कीमती रत्नों केआयात में बड़ी गिरावट की बात कही थी। आरबीआई ऊंचे तेल आयात बिल को लेकर चिंतित था, जिसका मुद्रा और राजकोषीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस तरह, वर्ष की दूसरी छमाही में भी सोने का आयात कम रहने के अनुमान से इसमें कुछ सहारा मिलेगा। सराफा बाजार में इस बात की भी चर्चा फैली है कि सरकार स्वर्ण आयात पर और अधिक प्रतिबंध लगा रही है।
 
जीएफएमएस थॉमसन रॉयटर्स के प्रमुख विश्लेषक (दक्षिण एशिया और यूएई) सुधीश नांबियथ की एक रिपोर्ट के अनुसार, हमें यह उम्मीद है कि इस साल कुल आयात 720-750 टन के दायरे में रहने की संभावना है। बैंकर और बाजार के प्रतिभागी बताते हैं कि नीरव मोदी-गीतांजलि घोटाले के बाद ऋण की तंंगी, सोने के ऊंचे दाम और कमजोर रुपये की वजह से मांग कम होगी। कोटक महिंद्रा बैंक के वरिष्ठï कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं कारोबार प्रमुख (वैश्विक लेन-देन) शेखर भंडारी ने कहा कि कमजोर निवेश मांग, अमेरिकी ब्याज दरों में मजबूती और बढ़ती कीमतों के कारण मांग कम है। इक्विटी अभी भी एक पसंदीदा परिसंपत्ति है। 
 
स्वर्ण आयात जनवरी से गिरता आ रहा है। अप्रैल में भी यह गिरावट जारी रही और पिछले साल की तुलना में आयात 32.6 प्रतिशत गिरावट के साथ 63 टन रहा। मई के दौरान आयात 60 फीसदी कमी के साथ 48 टन रहने का अनुमान जताया गया है। जून और जुलाई में भी मंद रुख रहने के आसार हैं। पिछले साल वस्तु एवं सेवा कर के लागू होने से पहले व्यापारी सोने का पुन: स्टॉक कर रहे थे और बहुत-से व्यापारी बिना हिसाब-किताब वाले सोने को आधिकारिक रूप से आयातित सोने से तब्दील कर रहे थे। कम दामों की वजह से पुन: स्टॉक की मांग भी मजबूत रही। लेकिन इस बार पुन:स्टॉक की उस मांग की पुनरावृत्ति नहीं हो रही है, कीमतें ऊंची हैं और डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये ने उपभोक्ताओं के लिए दाम और बढ़ा दिए हैं।
 
रही-सही कसर बैंकों ने नीरव-मोदी धोखाधड़ी के बाद ऋण देने में कड़ाई करके पूरी कर दी है। स्वर्ण आयात में सक्रिय एक बैंकर ने कहा कि मांग के एक बड़े हिस्से की भरपाई बिक्री से की जाएगाी, जैसा कि अक्षय तृतीय के एक हफ्ते बाद देखा गया था। नांबियथ ने कहा कि हाल ही में ऋण में कड़ाई करने से इस साल दुकानों की संख्या बढ़ाने की योजना धीमा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऊंची कीमतों से खुदरा खपत में कमी जारी रहेगी और इस बात की काफी संभावना है कि खुदरा स्तर पर पुराने आभूषणों को नए आभूषणों से तब्दील करने (नए आभूषण खरीदने के स्थान पर) की मात्रा अधिक रहे। हालांकि, कोटक के भंडारी को दूसरी छमाही में मांग की उम्मीद है। वह कहते हैं कि अच्छे मॉनसून के परिणामस्वरूप दूसरी छमाही में मांग होगी। इसके अलावा उपभोक्ताओं को कीमतों में सुधार की उम्मीद है और इसी के अनुसार, सितंबर-नवंबर की अवधि अच्छी रहने की उम्मीद है।
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