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आयात शुल्क बढ़ा तो घटा पाम तेल आयात

बीएस संवाददाता और रॉयटर्स | मुंबई Jun 14, 2018 08:56 PM IST

मई महीने में देश में पाम तेल का आयात एक साल पहले के मुकाबले 38 फीसदी तक कम होकर साढ़े चार सालों में सबसे कम स्तर पर आ चुका है। एक व्यापार संस्था ने आज बताया कि ज्यादा आयात शुल्क की वजह से पाम तेल काफी महंगा हो गया है। हालांकि पाम तेल के आयात में कमी की पूर्ति के लिए अन्य तेलों मसलन सोया तेल, सफेद सरसों के तेल और सूरजमुखी के तेल का आयात बढ़ाया गया क्योंकि सॉफ्ट ऑयल पर आयात शुल्क कम है। रिफाइनरीज सहित आयातक और व्यापारी भी सॉफ्ट ऑयल का अधिक आयात इसी उम्मीद में कर रहे थे कि सरकार इसका शुल्क बढ़ाने की घोषणा कभी भी कर सकती है। हालांकि ऐसी अटकलों के बीच वित्त मंत्रालय ने आज शाम कुछ कच्चे खाद्य तेलों (सॉफ्ट ऑयल) यानी सोया तेल, सूर्यमुखी के तेल और सफेद सरसों के आयात शुल्क में 35 फीसदी और सभी तीन रिफाइंड तेलों में 45 फीसदी तक की बढ़ोतरी की घोषणा कर दी। फिलहाल यह शुल्क 25-35 फीसदी के बीच है। 
 
व्यापारियों के मुताबिक देश में भंडारण की लागत मलेशिया के मुकाबले कम है जिसकी वजह से देश में शुल्क बढ़ोतरी से पहले सॉफ्ट ऑयल का आयात आकर्षक लग रहा था। नतीजतन देश में ऐसे तेल का अच्छा-खासा भंडार तैयार हो गया जिससे 42 दिनों तक की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। अमूमन आयातित तेलों का 30 दिन का भंडार रखा जाता है जिनमें बंदरगाह और ऑर्डर का भंडार भी शामिल है।  सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक 1 जून तक कच्चे खाद्य तेल का भंडार विभिन्न बंदरगाहों पर अनुमानत: 10 लाख टन जबकि सौदों के तहत भंडार अनुमानत: 16 लाख टन है और इस तरह कुल भंडार 26 लाख टन है। उद्योग के सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि इस महीने तक पाम तेल के आयात पर दबाव बना रह सकता है। दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल आयातक भारत में कम आयात से मलेशियाई पाम तेल वायदा पर भी असर पड़ेगा जो 22 महीने के निचले स्तर पर कारोबार कर रहा था। एसईए के  मुताबिक भारत ने मई में 496,478 टन पाम तेल का आयात किया जो फरवरी 2014 के मुकाबले सबसे निचले स्तर पर था। 
 
देश में मई महीने में सोयातेल आयात में एक साल पहले के मुकाबले 16.6 फीसदी की उछाल आई और यह 396,969 टन हो गया जबकि सूरजमुखी का तेल आयात दोगुना से ज्यादा होकर 330,985 टन हो गया। मई में देश के खाद्य तेल के कुल आयात में एक साल पहले के मुकाबले 7 फीसदी की गिरावट देखी गई और यह 12 लाख टन हो गया। एसईए के कार्यकारी निदेशक बी. वी. मेहता कहते हैं, 'देश के कुल आयात में पहली बार पाम तेल की हिस्सेदारी कम होकर 40 फीसदी के स्तर पर आ गई है। आने वाले महीने में यह रुझान बरकरार रहेगा जब तक कि सरकार शुल्क में कोई बदलाव लाने का फैसला नहीं करती।' मार्च में भारत ने कच्चे पाम तेल पर अपना आयात शुल्क 30 फीसदी से बढ़ाकर 44 फीसदी तक कर दिया था  और इसने रिफाइंड पाम तेल पर शुल्क 40 फीसदी से बढ़ाकर 54 फीसदी कर दिया था। लेकिन सरकार ने सोयातेल और सूर्यमुखी के तेल से जुड़े आयात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया था और यह क्रमश: 30 फीसदी से 25 फीसदी के स्तर पर बना रहा।
 
मुंबई के खाद्य तेल आयातक सनविन ग्रुप के मुख्य कार्यकारी संदीप बाजोरिया कहते हैं कि खरीदार सोयातेल को पसंद कर रहे थे क्योंकि यह पाम तेल की तुलना में 20,000 रुपये प्रति टन सस्ता पड़ रहा था। भारत इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल की खरीदारी करता है और सोया तेल की खरीदारी मुख्यतौर पर अर्जेंटीना और ब्राजील से की जाती है जबकि यूक्रेन से सूरजमुखी के तेल की खरीद की जाती है। एसईए के मेहता का कहना है कि 31 अक्टूबर को खत्म हो रहे विपणन वर्ष 2017-18 में देश का पाम तेल आयात एक साल पहले के 93 लाख टन से घटकर 85 लाख टन तक सीमित हो सकता है। एक वैश्विक व्यापार कंपनी से जुड़े मुंबई के आयातक का कहना है कि रिफाइनर अगस्त और सितंबर में आयात के लिए बड़ी मात्रा में खरीदारी नहीं कर रहे हैं। एक डीलर ने बताया, 'अगर सरकार शुल्क में बढ़ोतरी करती है तब पूरा समीकरण पाम तेल के पक्ष में होगा।'
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