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बरसेंगे बादल, लहलहाएगी फसल

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Apr 16, 2018 10:40 PM IST

मॉनसून

देश के कृषि क्षेत्र और अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के सामान्य रहने की उम्मीद है, जिससे कृषि क्षेत्र के उत्पादन में अच्छी वृद्घि हो सकती है। भारतीय मौसम विभाग ने 2018 में मॉनसून के अपने पहले अनुमान में कहा है कि जून से सितंबर के बीच लंबी अवधि की औसत (एलपीए) का 97 फीसदी बारिश हो सकती है। हालांंकि इसमें मॉडल त्रुटि के तौर पर 5 फीसदी घट-बढ़ हो सकती है।

एलपीए 1951 से 2000 के बीच देश भर में हुई बारिश का औसत है, जो 89 सेंटीमीटर अनुमानित है। भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश ने कहा, 'मॉनसून के दौरान कम बारिश के लिए जिम्मेदार अल-नीनो का असर इस साल जून में कमजोर रहने की उम्मीद है। हिंद महासागर डायपोल (आईओडी) भी शुरुआत में कमजोर रह सकता है लेकिन मॉनसून के बाद के महीनों में इसका असर दिख सकता है। हालांकि अधिकांश वैश्विक मॉनसून मॉडल में इस साल भारत के लिए सामान्य मॉनसून का अनुमान लगाया गया है।'

उन्होंने कहा कि इस साल मॉनसून के सामान्य रहने की संभावना 42 फीसदी है, वहीं सामान्य से कम बारिश की आशंका 30 फीसदी से कम है। अल-नीनो समुद्र के सतह के साथ ही भूमध्य प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ा देता है, वहीं पश्चिमी हिंद महासागर आईओडी सतह का तापमान गर्म हो जाता है लेकिन पूर्वी हिस्से की तुलना में यह ठंडा होता है।

मौसम विभाग जून में क्षेत्रवार मॉनसूनी बारिश का अनुमान जारी करेगा लेकिन अधिकारियों ने कहा कि प्रारंभिक संकेतों से पता चलता है कि पूर्वोत्तर हिस्से को छोड़कर देश भर में बारिश का वितरण एकसमान रह सकता है। मौसम विभाग ने यह भी कहा कि मॉनसून के दौरान बारिश में कमी की आशंका काफी कम है। मौसम विभाग के अनुमान से उत्साहित कृषि सचिव एस के पटनायक ने कहा कि इस साल भारत में खाद्यान्न का उत्पादन रिकॉर्ड 27.749 करोड़ टन के पार पहुंच सकता है।

पटनायक ने कहा, 'सामान्य मॉनसून से खरीफ की बुआई में तेजी आएगी। खरीफ की बुआई आमतौर पर जून में शुरू होती है। हम उम्मीद करते हैं कि इस साल खाद्यान्न का उत्पादन इस साल के रिकॉर्ड स्तर को पार कर सकता है। उन्होंने कहा, 'हालांकि दक्षिण प्रायद्वीप और उत्तर पूर्वी इलाकों में एक महीने मॉनसूनी बारिश में थोड़ी कमी आ सकती है लेकिन बाद में उसकी भरपाई होने की उम्मीद है।'

2017-18 के लिए कृषि मंत्रालय ने 27.749 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान लगाया है। इससे पिछले साल 27.511 करोड़ टन का उत्पादन हुआ था। मॉनसून के सामान्य रहने से केवल कृषि विकास को ही बल नहीं मिलता है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव बड़ा है, जो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के अच्छा संकेत है क्योंकि इस साल कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके बाद 2019 में आम चुनाव भी होना है।

केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'अच्छी बारिश होने से कृषि-रसायन, उर्वरक, बीज, सिंचाई उपकरण आदि उद्योगों के लिए भी कारोबारी संभावनाएं बढ़ जाती हैं। चीनी, खाद्य तेल, अन्य खाद्य उत्पाद, परिधान आदि उद्योगों का प्रदर्शन सीधे तौर पर मॉनसून से जुड़ा होता है। देश में मध्य जून से बारिश शुरू हो जाती है, इस वजह से हमें बारिश पूर्वानुमान पर नजर बनाए रखनी होगी।'

पहले इस महीने के शुरू में मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी संस्था स्काईमेट ने कहा था 2018 में बारिश दीर्घ अवधि के औसत का 100 प्रतिशत रह सकती है। स्काईमेट ने यह भी कहा था कि देश में वृहद पैमाने पर सूखा पडऩे की आशंका ना के बराबर है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का कहना है कि वैसे ये पूर्वानुमान शुरुआती हैं, लेकिन उत्साह जगाने वाले हैं, लेकिन काफी कुछ मॉनसून के समय पर आने और देश भर में बारिश के समान वितरण आदि पर निर्भर करेगा।

क्रिसिल ने कहा कि सामान्य मॉनसून के पूर्वानुमान के मद्देनजर वित्त वर्ष 2018-19 में कृषि की विकास दर 3 प्रतिशत रहेगी, जो पिछले वित्त वर्ष के जैसी ही रहेगी। एजेंसी ने कहा, 'इस वित्त वर्ष में जहां तक सकलू घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की बात है तो अब अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया गया है।'

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