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21 प्रतिशत बढ़ गए चीनी के दाम

दिलीप कुमार झा | मुंबई Jun 11, 2018 09:54 PM IST

चीनी के दाम तीन हफ्ते में उछलकर सोमवार को 21 प्रतिशत से अधिक हो गए, जो मार्च के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। दामों में यह इजाफा चीनी की आपूर्ति नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा लगाई गई स्टॉक सीमा हटाए जाने के बाद मिलों से बाजार में आपूर्ति में कमी की संभावना के कारण हुआ। अधिक आपूर्ति के कारण 19 मई को चीनी की बेंचमार्क एम30 किस्म के दाम इस सीजन के सबसे निचले स्तर प्रति क्विंटल 2,762 रुपये पर चले गई थे, जो अगले तीन हफ्ते में तेजी से बढ़ते हुए सोमवार को थोक मंडी वाशी में प्रति क्विंटल 3,341 रुपये पर पहुंच गए।
 
मौजूदा सीजन में 3.15 करोड़ टन चीनी उत्पादन और पिछले साल के बचे हुए करीब 40 लाख टन के स्टॉक के साथ चालू वर्ष में भारत में चीनी की कुल उपलब्धता 3.55 करोड़ टन बैठती है। इस साल चीनी की2.5 करोड़ टन की खपत को ध्यान में रखें, तो चीनी की अधिकता 1.05 करोड़ टन बैठती है। इस मसले से निपटने के लिए सरकार ने 30 लाख के प्रस्तावित बफर स्टॉक के साथ 70 अरब रुपये के कार्यक्रम की घोषणा की है। इससे पहले सरकार ने मिलों को 20 लाख टन निर्यात का आदेश दिया था।
 
द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मुख्य वित्तीय अधिकारी विजय बांका ने कहा कि चालू दाम वृद्धि हाल ही में सरकार द्वारा घोषित किए गए कार्यक्रम के प्रत्युत्तर में स्वाभाविक प्रक्रिया है। उनके विचार से यह अल्पकालिक है, क्योंकि अधिक आपूर्ति के मुख्य विषय पर ध्यान नहीं दिया गया है। इस बीच, चीनी मिलों की आमदनी (एक्स फैक्ट्री) भी थोक दामों में आई तेजी के अनुपात में बढ़ गई है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में चीनी की यह आमदनी 17 मई को गिरकर 2,465 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई थी, जो इस सीजन का सबसे निचला स्तर था, लेकिन अब यह बढ़कर फिलहाल 3,125-3,175 रुपये पर चल रही है। उत्तर प्रदेश में इस बेंचमार्क चीनी के थोक दाम फिलहाल 3,400 रुपये प्रति क्विंटल पर चल रहे हैं।
 
इस साल फरवरी और मार्च में स्टॉक सीमा हटाने जाने और मंद वैश्विक कीमतों की वजह से चीनी मिलें चीनी की आवंटित मात्रा का निर्यात करने में असमर्थ रहीं। सूत्रों के अनुसार, चीनी मिलें मात्र 70,000-80,000 टन का ही निर्यात ऑर्डर क्रियान्वित करने में सफल हो पाई हैं। चूंकि घरेलू बाजार में चीनी के दाम उछल चुके हैं और वैश्विक रूप से स्थिर हो गए हैं, इसलिए आगे निर्यात का परिदृश्य धुंंधला नजर आ रहा है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने कहा चीनी मिलों पर स्टॉक रखने की सीमा लागू किए जाने का फैसला चीनी की बिक्री पर नियंत्रण लगाने के समान है, जो भविष्य के लिए सही तरीका नहीं है। 30 लाख टन के बफर स्टॉक तैयार करने से बाजार की अधिक आपूर्ति में कुछ कटौती होगी, हालांकि यह केवल एक साल के लिए ही होगा और इससे घरेलू दामों को प्रोत्साहित करने की अवधारणा का विकास होगा। चिंता की बात यह है कि गन्ना मूल्य निर्धारण नीति को तर्कसंगत करने पर कोई विचार या प्रस्ताव नहीं है, जोकि आज उद्योग की सभी समस्याओं का मुख्य कारण है।
 
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के एक हालिया अध्ययन में अनुमान जताया गया है कि इस राहत पैकेज से एक साल में मात्र 91 अरब रुपये का निपटान होगा, जो गन्ने के संपूर्ण बकाया 220 अरब रुपये का 40 प्रतिशत ही बैठता है। हालांकि विश्लेषकों का पूर्वानुमान है कि भंडारण का स्थान उपलब्ध न होने के करण अगले साल देश भर की अधिकांश चीनी मिलों में से ज्यादातर एक महीने से अधिक परिचालन नही कर पाएंगी। स्टॉक सीमा हटाए जाने की वज से अधिकांश मिलों के पास अगले साल बिना बिकी हुई चीनी की बड़ी मात्रा होगी। 
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