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कपास पर कीट और पानी की मार

विनय उमरजी | अहमदाबाद Jun 12, 2018 08:42 PM IST

पिंक बॉलवर्म कीट के संक्रमण की परेशानी के कारण कपास के बड़े उत्पादक राज्य गुजरात में इस साल बुआई प्रभावित हो सकती है। पानी की भारी किल्लत एक अन्य बाधा रहेगी। व्यापारिक सूत्रों ने महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में भी ऐसी आशंका से इनकार नहीं किया है। बड़ी चिंता इस बात से है कि मॉनसून शुरू हो चुका है और खासकर महाराष्ट्र में इसमें रुकावट आई है। पिछले दो सालों में कई इलाकों में पिंक बॉलवर्म फसल बरबाद कर चुका है और यहां तक कि बीटी कपास भी इससे सुरक्षित नहीं है। एक अधिकारी ने बताया कि अगर मॉनसून की कुछ शुरुआत होने के बाद इसमें विलंब हो तो ऐसे में कपास बुआई कीट के हमले की दृष्टिï से असुरक्षित होती है।

 
गुजरात सरकार के सूत्रों के अनुसार, इस महीने के पहले सप्ताह में कपास की बुआई तीन साल के सामान्य औसत के 0.37 प्रतिशत या 9,339 हेक्टेयर पर ही पहुंच पाई है। 2017 में समान अवधि के दौरान यह 49,400 हेक्टेयर और 2016 में 15,200 हेक्टेयर थी। दरअसल, बॉलवर्म के संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए राज्य सरकार ने खुद ही किसानों को बाद में (मॉनसून शुरू होने के बाद) बुआई करने की सलाह दी है। पिछले चार सालों में बॉलवर्म के संक्रमण ने गुजरात और महाराष्ट्र दोनों ही राज्यों में कपास की खेती को नुकसान पहुंचाया है।
 
गुजरात स्टेट को-ऑपरेटिव कॉटन फेडरेशन के पूर्व चेयरमैन हसमुख रावल कहते हैं, 'गुजरात में कपास की खेती का एक बड़ा क्षेत्र पानी की भारी किल्लत का सामना कर रह है। अगर बारिश होती है और किसी को पर्याप्त पानी मिलता है, तो ही बुआई शुरू हो सकती है।' उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप कुल बुआई में कम से कम 20 प्रतिशत तक की गिरावट आने की संभावना है। इस खरीफ सीजन में कपास की बुआई में 10 प्रतिशत गिरावट के आसार हैं। कीट आक्रमण की दृष्टिï से असुरक्षित कुछ इलाकों में भी सरकार ने किसानों को कपास की शीघ्र बुआई नहीं करने का सुझाव दिया है, जैसा कि वे गेहूं की फसल कटाई के बाद किया करते थे।
 
इस बीच, भारतीय कपास संघ (सीएआई) ने पिछले कपास सीजन 17-18 के फसल अनुमान में सुधार करते हुए इसे 3.6 करोड़ गांठ से बढ़कर 3.65 करोड़ गांठ कर दिया है। इसके अलावा निर्यात अनुमान में भी सुधार किया गया है और इसे 65 लाख गांठों से बढ़कर 70 लाख गांठ कर दिया गया है। दूसरी ओर, आयात अनुमान को 20 लाख गांठ से घटाकर 15 लाख गांठ कर दिया गया है, जिसमें से 8,50,000 गांठ मई के आखिर तक आ भी चुकी हैं। सीएआई के अध्यक्ष अतुल गनात्रा ने चालू सीजन में घरेलू उपभोग 3.24 करोड़ गांठ रहने का अनुमान जताया है। 2017-18 के फसल वर्ष की समाप्ति पर पिछला बचा हुआ स्टॉक 16 लाख गांठ रहने का अनुमान है। सीएआई ने हाल ही में आयोजित सभी सहभागियों की अपनी बैठक में इन अनुमानों को अंतिम रूप दिया है।
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