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क्रोम अयस्क-कन्संट्रेट निर्यात लुढ़का

जयजित दास | भुवनेश्वर Jun 12, 2018 08:42 PM IST

वित्त वर्ष 2017-18 में देश का क्रोम अयस्क और क्रोम कन्संट्रेट निर्यात 58 प्रतिशत लुढ़क कर 95,000 टन रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2017 में यह 2,25,000 टन था। मौजूदा 30 प्रतिशत के ऊंचे निर्यात शुल्क की वजह से निर्यात में यह भारी गिरावट आई है। मूल्य के हिसाब से, क्रोम अयस्क और इसका कन्संट्रेट निर्यात 2017-18 के आखिर में 45.4 प्रतिशत गिरकर 1.90 अरब रुपये पर आ गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 3.49 अरब रुपये था। उद्योग के एक सूत्र ने कहा कि फेरो क्रोम पर शून्य निर्यात शुल्क और कानून का उल्लंघन करने के लिए खदान मालिकों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दंडित किए जाने के कारण 2017-18 में क्रोम अयस्क और क्रोम कन्संट्रेट के निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा, 30 प्रतिशत के ऊंचे निर्यात शुल्क ने अंतरराष्ट्रीय क्रोम अयस्क व्यापार में भारतीय उत्पादन की संभावना को खत्म कर दिया है।

2016-17 में क्रोम अयस्क या कन्संट्रेट का अच्छा निर्यात था। इस अवधि को छोड़कर पिछले सालों में इस सामग्री का निर्यात काफी कम रहा है। 1 मार्च सेे 25 मई 2016 के बीच निर्यात शुल्क में छूट दे दी गई थी, लेकिन जब तक खदान मालिक और निर्यातक उत्पादन बढ़ाते तथा फिर से निर्यात करते, तब तक शुल्क को फिर से लगा दिया गया। फिर से लगाए गए इस 30 प्रतिशत शुल्क ने निर्यात को चोट पहुंचाई। देश में क्रोम अयस्क और क्रोम कन्संट्रेट का निर्यात सरकारी स्वामित्व वाली व्यापारिक कंपनी एमएमटीसी लिमिटेड के जरिये संचालित किया जाता है। क्रोम निर्यात पर तीन लाख टन की मात्रात्मक सीमा है और निर्यात में इस सीमा का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है। क्रोम कन्संट्रेट के निर्यात पर कोई रोक नहीं होती है, क्योंकि इसे निचले दर्जे के अयस्क (42 प्रतिशत से कम क्रोम तत्व) का इस्तेमाल करते हुए प्रसंस्कृत किया जाता है और फेरो क्रोम उद्योग में इसका सीधा उपयोग नहीं होता।
 
खनन पट्टे के नवीकरण में देरी, पर्यावरण संबंधी प्रतिबंध और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश जैसे कारणों से खनन में अव्यवस्था के हालात बन गए हैं और इन सबसे ऊपर, 30 प्रतिशत के अत्यधिक निर्यात शुल्क ने क्रोम अयस्क और कन्संट्रेट केनिर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। चूंकि भारतीय क्रोम अयस्क और क्रोम कन्संट्रेट निर्यात बाजारों में अव्यावहारिक हो गया है, इसलिए छोटी से मध्य आकार की कई प्रसंस्करण इकाइयां संचालन से बाहर हो गई हैं। अगर क्रोम अयस्क पर निर्यात शुल्क को तर्कसंगत नहीं किया जाता है, तो भविष्य में यह स्थिति और बढ़ सकती है। निर्यात में और अधिक आकर्षण न रहने से 2015-16 के आखिर तक खदानों के मुहानों पर निचले दर्जे के क्रोमाइट का स्टॉक बढ़कर 25 लाख टन हो गया है। निचले दर्जे के इस क्रोमाइट का घरेलू बाजार में कोई इस्तेमाल नहीं होता है। निचले दर्जे के क्रोमाइट का फेरो क्रोम उद्योग में प्रत्यक्ष रूप में कोई प्रयोग नहीं होता है और इस कारण यह एकत्रित होता जाता है। इसके अलावा, इसे क्रोम अयस्क कन्संट्रेट में विकसित करने के लिए तैयार किए गए बुनियादी ढांचे का भी कमजोर मांग के कारण कम ही उपयोग हो पा रहा है।
कीवर्ड iron ore, steel, export,

  
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