मूल्य दबाव से निपटने की तैयारी

अभिनीत कुमार | मुंबई Sep 28, 2017 09:44 PM IST

सन फार्मा और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज ने कसी कमर
विशेष दवाओं के बल पर घटाया जाएगा मूल्य दबाव

अमेरिका में मूल्य निर्धारण पर दबाव से निपटने के लिए प्रमुख औषधि कंपनी सन फार्मास्युटिकल्स और डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज ऐसी दवाओं को उतारने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं जिनके बाजार में कम प्रतिस्पर्धा और मूल्य निर्धारण की अधिक ताकत मौजूद हैं। सन फार्मा डरमैटोलॉजी, ऑप्थैमोलॉजी, सेंट्रल नर्वस सिस्टम और ऑन्कोलॉजी में सात परिसंपत्तियों में 60 करोड़ डॉलर का निवेश पहले ही कर चुकी है।

ऐसी दो दवाएं पहले से ही बाजार में मौजूद हैं और प्रमुख डरमैटोलॉजी दवा एमके-3222 को वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में उतारा जा सकता है। विशेष दवा आला दर्जे की चिकित्सा के लिए आदर्श दवा होती है और उसे विकसित करने के लिए कहीं अधिक रम की जरूरत होती है। साथ ही, अमेरिका में जेनेरिक दवाओं विपरीत विशेष दवाओं की मार्केटिंग लागत भी काफी अधिक होती है।

क्रेडिट सुइस सिक्योरिटीज के विश्लेषक अनुभव अग्रवाल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है, 'फिलहाल विशेष दवाओं पर सालाना खर्च 15 करोड़ डॉलर है जिससे मुनाफा आधार 15 फीसदी घट जाता है। एमके-3222 और ऑन्कोलॉजी दवा ओडोम्जो के बाजार में आने के बाद वित्त वर्ष 2020 तक विशेष दवाओं का कारोबार न नफा न नुकसान की स्थिति तक पहुंच सकता है।'

अग्रवाल ने कहा, 'विशेष दवाओं में ऊंची वृद्धि से भी जेनेरिक दवाओं में कमजोर वृद्धि (10 से 12 फीसदी) से निपटने और वित्त वर्श 2019-22 तक सालाना 20 फीसदी चक्रवृद्धि दर के साथ विकास में मदद मिलेगी।' दिलीप सांघवी की कंपनी सन फार्मा ने इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में घाटा दर्ज कर बाजार को चौंका दिया। अमेरिका में करबी 12 साल तक चलने वाले प्रतिस्पर्धारोधी (एकाधिकार विरोधी) मामले और वैश्विक जेनेरिक बाजार में नरमी के कारण कंपनी का कारोबार प्रभावित हुआ। 30 जून को समाप्त तिमाही में कंपनी ने 425 करोड़ रुपये का कुल घाटा दर्ज किया। हालांकि सांघवी ने उम्मीद जताई है कि कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में 2017-18 की दूसरी छमाही से धीरे-धीरे सुधार होगा।

सन फार्मा को खास तौर पर अमेरिका में कीमतों में गिरावट से झटका लगा क्योंंकि कंपनी वहां से करीब 50 फीसदी राजस्व जुटाती है। जून में समाप्त तिमाही के दौरान कंपनी ने 6,167 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया था। डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज का शुद्ध लाभ जून तिमाही में 53 फीसदी की गिरावट के साथ 591 करोड़ रुपये रहा। जबकि उसका राजस्व 3 फीसदी बढ़कर 33,159 करोड़ रुपये हो गया।
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