बहुराष्ट्रीय कंपनियों की देसी इकाई की रफ्तार तेज

कृष्ण कांत | मुंबई Jan 30, 2018 09:49 PM IST

मूल वैश्विक कंपनियों से आगे

बाजार मूल्य के लिहाज से यूनिलीवर, सुजूकी, सीमेंस, कोलगेट-पामोलिव और एबीबी जैसी वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भारतीय सहायक इकाइयों की रफ्तार उनकी मूल वैश्विक कंपनियों के मुकाबले लगभग दोगुनी है। भारतीय स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भारतीय इकाइयों का बाजार पूंजीकरण उनकी मूल कंपनियों के बाजार पूंजीकरण के मुकाबले बढ़कर 6.3 फीसदी हो चुका है जो 2013 के आरंभ में 3.1 फीसदी रहा था। मारुति सुजूकी और हिंदुस्तान यूनिलीवर अपनी मूल कंपनी को सबसे अधिक रॉयल्टी देने वाली कंपनियां हैं। वर्तमान शेयर मूल्य पर मारुति का बाजार पूंजीकरण उसकी मूल जापानी कंपनी सुजूकी मोटर कॉरपोरेशन के मुकाबले करीब 50 फीसदी अधिक है। इसी प्रकार एचयूएल का बाजार पूंजीकरण फिलहाल उसकी मूल कंपनी यूनिलीवर के बाजार पूंजीकरण के मुकाबले करीब 28 फीसदी है।

इस अध्ययन में शामिल 52 भारतीय सहायक इकाइयों के एकीकृत बाजार पूंजीकरण में पिछले पांच साल के दौरान उनकी मूल कंपनियों के बाजार पूंजीकरण के मुकाबले करीब 10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। परिणामस्वरूप भारतीय सहायक इकाइयों के शेयर प्राइस-टु-अर्निंग गुणक के आधार पर मूल कंपनियों के मुकाबले 150 फीसदी अधिक मूल्य पर कारोबार कर रहे हैं। जबकि 2013 में वर्तमान तेजी की शुरुआत में यह आंकड़ा 80 फीसदी रहा था।

विश्लेषकों का कहना है कि अन्य बाजारों के मुकाबले दलाल स्ट्रीट कहीं अधिक ताकतवर दिखने के कारण आई तेजी से इन सहायक कंपनियों के शेयरों को बल मिला है। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के अनुसंधान प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, 'भारतीय शेयर बाजार में तेजी अधिकतर विकसित बाजारों के मुकाबले कहीं अधिक दमदार रही है। इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों को जबरदस्त फायदा हुआ। इनमें से अधिकतर बहुराष्ट्रीय कंपनियां उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र में अग्रणी हैं जहां निवेशकों का हित सर्वोपरि होता है।'

यह विश्लेषण भारत में सूचीबद्ध बहुराष्ट्रीय कंपनियों और उनकी मूल कंपनियों के सालाना राजस्व एवं मुनाफे पर आधारित है। अध्ययन में शामिल बाजार पूंजीकरण के आंकड़े प्रत्येक वित्त वर्ष के अंत के लिए गए हैं। चालू वित्त वर्ष के आंकड़े 12 महीने के आधार पर लिए गए हैं। भारत में एक से अधिक सूचीबद्ध सहायक इकाइयों वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आंकड़े समेकित आधार पर लिए गए हैं। सभी आंकड़े अमेरिकी डॉलर में हैं। समीक्षाधीन अवधि में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा मूल कंपनियों को किए गए वित्तीय योगदान भले ही उल्लेखनीय हों लेकिन उनके शेयर मूल्य में तेजी के मुकाबले राजस्व एवं मुनाफा वृद्धि कमजोर रही। उनके राजस्व योगदान में 40 आधार अंकों की बढ़ोतरी हुई जबकि शुद्ध मुनाफा योगदान 60 फीसदी अधिक रहा।

बिजनेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल 47 वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सूचीबद्ध भारतीय इकाइयों का उनकी मूल कंपनियों के राजस्व में योगदान 2.4 फीसदी है जो पांच साल पहले 2 फीसदी था। जबकि समान अवधि में भारतीय सहायक इकाइयों ने मूल कंपनियों के मुनाफे में 2.4 फीसदी का योगदान किया।

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