घाटे वाली कंपनी लगा सकती है बोली

अरिंदम मजूमदार | नई दिल्ली Mar 18, 2018 09:35 PM IST

एयर इंडिया विनिवेश 

उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार एयर इंडिया के लिए एयरलाइन द्वारा बोली लगाने की जरूरी शर्तों को नरम बना सकती है। सरकार द्वारा एयर इंडिया की खरीद के लिए वित्तीय दबाव से जूझ रही एयरलाइनों को आगे आने की अनुमति दिए जाने की संभावना है। हालांकि गैर-एयरलाइन कंपनियों को अपनी वित्तीय मजबूती साबित करने के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की शर्त को पूरा करने को कहा जा सकता है।

एक अधिकारी ने कहा कि एयर इंडिया की मूल्यांकन समिति ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श के बाद यह सुझाव दिया था कि सभी बोलीदाताओं को न्यूनतम नेटवर्थ शर्त को पूरा करना अनिवार्य होगा। हालांकि जब कोर गु्रप ऑफ सेक्रेटरीज ऑन डिसइन्वेस्टमेंट (सीजीडी) ने बोलीदाताओं की पात्र शतों को अंतिम रूप देने के लिए पिछले दो सप्ताह के दौरान जब इस बारे में बैठक की थी तो दो सदस्यों यह सुझाव रखा था कि अनिवार्य शर्त के तौर पर हाई नेटवर्थ तय करने से कई एयरलाइन कंपनियों का परिदृश्य प्रभावित होगा। 

दरअसल, दो सरकारी संस्थाओं के बीच राय में अंतर की वजह से सरकार द्वारा अभिरुचि पत्र जारी करने की घोषणा में विलंब को बढ़ावा मिला।  कोर गु्रप ने अब सुझाव दिया है कि एक सफल एयरलाइन के संचालन का रिकॉर्ड रखने वाली कंपनी को बोली लगाने की अनुमति दी जा सकती है, भले ही उसे घाटे से जूझना पड़ रहा हो। सीजीडी की कमान कैबिनेट सचिव के हाथ में है और इस समूह में आर्थिक मामलों, राजस्व, व्यय, सार्वजनिक उद्यम मामलों, कंपनी मामलों, कानूनी मामलों और नागरिक उड्डयन मामलों के विभाग के सचिव शामिल हैं।

अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'सचिवों की समिति का मानना है कि उद्योग के तौर पर विमानन को बाहरी आर्थिक या बाजार गिरावट और लंबे समय तक राजस्व नुकसान या कम मुनाफा मार्जिन का सामना करना पड़ा है जिससे एयरलाइन का परिचालन प्रदर्शन मजबूत होने के बावजूद उसे घाटे की स्थिति जूझना पड़ सकता है।' उन्होंने कहा, 'अधिक नेटवर्थ की शर्त कई अंतरराष्टï्रीय एयरलाइन समूहों को अयोग्य साबित कर देगी'

वर्ष 2007 में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी की मार और लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतों की वजह से प्रमुख एयरलाइनों को लगातार कई वर्षों तक नुकसान उठाना पड़ा। उदाहरण के लिए, भारतीय एयरलाइनों में, सिर्फ इंडिगो ही मजबूत नेटवर्थ वाली कंपनी है जबकि प्रतिस्पर्धी स्पाइसजेट और विस्तारा को इस संदर्भ में घाटे का सामना करना पड़ रहा है। वहीं वैश्विक कंपनियों में, एयर फ्रांस-केएलएम सिर्फ हाल में अपना मुनाफा सुधारने में कामयाब रही है। इस कंपनी को वैश्विक वित्तीय संकट के बाद कई वर्षों तक वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ा था। रिचर्ड ब्रैनसन के स्वामित्व वाली वर्जिन अटलांटिक को मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव की वजह से 2017 में नुकसान से जूझना पड़ा।

विचार-विमर्श के बाद यह सहमति बनी है कि एक बोलीदाता के मामले में, घाटे में चल रहीं कंपनियां बोली प्रक्रिया के लिए योग्य होंगी, बशर्ते कि उनका किसी प्रमुख एयरलाइन के प्रभावी संचालन का रिकॉर्ड रहा हो। इसके अलावा यदि कई एयरलाइंस सामूहिक रूप से बोली लगाती हैं तो इस तरह के कंसोर्टियम को नेटवर्थ से जुड़ी शर्त को पूरा करना होगा, भले ही इनमें शामिल प्रमुख सदस्य की नेटवर्थ शानदार नहीं रही हो। जहां इंडिगो ने एयर इंडिया में अपनी दिलचस्पी दिखाने की सार्वजनिक तौर पर घोषणा कर दी है वहीं मीडिया खबरों में कहा गया है कि टाटा संस-सिंगापुर एयरलाइंस और जेट एयरवेज फ्रांस-केएलएम का कंसोर्टियम इस विनिवेश प्रक्रिया में भाग ले सकता है।
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