दूरसंचार उद्योग में जबरदस्त उछाल का अब अंत!

सुवीन सिन्हा | नई दिल्ली Nov 11, 2009 10:32 PM IST

पिछले सप्ताह संचार मंत्री ए राजा के साथ बैठक के लिए जब दूरसंचार कंपनियों के अधिकारी नई दिल्ली में संचार भवन में कदम रख रहे थे तो शायद उनका मानना था कि अब तक वे काफी बुरी चीजें देख चुके हैं और अब शायद ही इससे बदतर हालत हो।

लेकिन उनका यह सोचना गलत था। बैठक के केंद्र बिंदु राजा ने मोबाइल दूरसंचार ऑपरेटरों से टर्मिनेशन शुल्क को घटाने को कहा। टर्मिनेशन शुल्क वह शुल्क है जो एक ऑपरेटर दूसरे ऑपरेटर को चुकाता है, जिसके नेटवर्क पर कॉल की जा रही हो।

प्राइसवाटरहाउस कूपर्स की सह-निदेशक अर्पिता पाल अग्रवाल का कहना है, 'बाजार में औसत कीमतों को तय करने के लिए टर्मिनेशन शुल्क आधार है। अगर यह कम होतास है तो औसत कीमतें आगे और कम होंगी।' इससे इस बात को और हवा मिलेगी कि भारत में दूरसंचार उद्योग में उछाल अब अपने अंत के बेहद नजदीक है।

बढ़ती प्रतिस्पर्धा (हर सर्किल के लिए 13 लाइसेंस), घटता टैरिफ (दुनिया में सबसे कम, प्रति सेकंड बिलिंग के कारण आगे और गिरावट), प्रति ग्राहक औसत कमाई में तेजी से गिरावट, क्योंकि नए ग्राहक मुख्य रूप से उप-नगर और ग्रामीण इलाकों के हैं जो कम खर्च करते हैं और अधिक कर (कुल मिलाकर लगभग 30 फीसदी) ने न सिर्फ इस मैदान में नए उतरने वालों, बल्कि पुरानी कंपनियों की आकांक्षाओं को बिखेर कर रख दिया है और उस सपने को भी तोड़ दिया है, जिसमें सभी को लगता था कि लाइसेंस एक और सुनील मित्तल बनने का जरिया है।

आइडिया सेल्युलर के प्रबंध निदेशक संजीव आगा का कहना है, 'वर्ष 2007 एक बुलबुला था, जब लोग सोचते थे कि हर एक कारोबार में उछाल आनी ही चाहिए। किसी भी उछाल के समय, भारतीय दूरसंचार ने उछाल में बढ़त देखी है, जो हर कारोबार को ऊंचा उठा सकता हो। इसलिए बड़े स्तर पर क्षमताओं में इजाफा हुआ है, जिसके बारे में बाजार तय करेगा।'

'रेस टु दी बॉटम' नाम वाली एक हालिया रिपोर्ट में क्रेडिट सुईस ने अपने अनुमानों के बारे में कहा था, 'मार्जिन में जबरदस्त कमी आएगी।' फिर भी देश में ग्राहकों की संख्या में इजाफा बेरोक-टोक लगातार जारी है- उद्योग नियामक, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि सितंबर महीने में ही 1.5 करोड़ नए ग्राहक जुड़े हैं।

इसने डुअल सिम के चलन पर भी ध्यान दिया है, जिसके तहत मौजूदा ग्राहक अतिरिक्त कनेक्शन खरीद रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप ग्राहकों की संख्या में तो इजाफा हो रहा है, लेकिन सच यह है कि बिल में कोई खास फर्क नहीं है, क्योंकि वह दो या उससे अधिक सेवा प्रदाताओं में बंट रहा है। आगा का कहना है, 'बहुत से सिम का इस्तेमाल ऑपरेटर और ग्राहकों के बीच संबंधों को दोबारा परिभाषित कर रहा है।

आप आसानी से कीमतों में कटौती के साथ ग्राहकों की बड़ी भीड़ चुटा सकती हैं, लेकिन यह वह नींव नहीं है, जिस पर इमारत को खड़ा किया जा सके, क्योंकि ऐसी भीड़ इतनी ही आसानी के साथ कहीं और भी जा सकती है।' तीन सूचीबध्द कंपनियों के पूर्वानुमानों और परिणामों के साथ इस बात के प्रमाण मिलने लगे कि उद्योग में आए उछाल में गिरावट का दौर शुरू हो गया है।

सबसे पहले आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी आइडिया सेल्युलर ने तिमाही दर तिमाही के आधार पर सितंबर को समाप्त तिमाही के दौरान अपने मुनाफे में 29 फीसदी की गिरावट दिखाई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के अगली तिमाही के पूर्वानुमानों में आइडिया के शेयर की कीमत घटाकर 44 से 59 रुपये कर दी है, जबकि एक महीने पहले तक 71 से 86 रुपये का अनुमान था।

भारती एयरटेल के मुख्य कार्याधिकारी मनोज कोहली का कहना है, 'हम अपने बाजार नेतृत्व को बढ़ाना जारी रखेंगे और साथ ही साथ में कमाई के नए रास्ते, जैसे एम-कॉमर्स, एम-एंटरटेनमेंट, डिजिटल मीडिया और कई दूसरे उत्पाद आदि खोजेंगे। हम लागत की कुशलता को और उत्पादकता को बढ़ाने पर ध्यान देंगे, ताकि हमारा लागत का ढांचा नरम हो सके।'

वोडाफोन के स्थानीय निदेशक टीवी रामाचंद्रन जो कुछ समय पहले तक भारतीय सेल्युलर ऑपरेटर संघ के महानिदेशक थे, का कहना है कि अब भी विकास के लिए जबरदस्त मौके हैं। 'हम काफी सकारात्मक हैं।'

कीवर्ड Now end of bounce in telecom industry!,

  
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