सीमेंट उद्योग के लिए मंदी की सड़क आगे भी जारी

बीजी शिरसाठ | मुंबई Nov 12, 2009 10:05 PM IST

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में शुध्द मुनाफे में जबरदस्त इजाफा लगता मानो सीमेंट कंपनियों के लिए कल की बात हो, क्योंकि दक्षिण और पश्चिमी क्षेत्रों में अक्टूबर से ही सीमेंट की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है।

कीमतों में गिरावट की वजह, इन क्षेत्रों में मांग के मुकाबले में आपूर्ति का बढ़ जाना है। आईआईएफएल रिसर्च के सीमेंट क्षेत्र के एक विशेषज्ञ के मुताबिक कीमतों में कटौती दक्षिणी बाजारों के लिए रोज की बात हो गई है, लेकिन ये मध्य क्षेत्रों में स्थिर हैं।

गुजरात में कीमतों में गिरावट और बढ़ गई, क्योंकि असल में निर्यात के लिहाज से तैयार माल की आपूर्ति को पश्चिम एशिया में मांग में कमी को देखते हुए घरेलू बाजारों की तरफ ही मोड़ा जा रहा है। फिलहाल, हैदराबाद में सीमेंट सबसे सस्ता 123 रुपये से 145 रुपये प्रति बोरी (50 किलोग्राम) है जिसके दाम पिछले दो सप्ताह में 18 प्रतिशत घटा हैं और अप्रैल 2009 जिस वक्त सीमेंट की कीमतें सबसे अधिक थीं, उस स्तर से 45 फीसदी कम है।

दक्षिण में सीमेंट की कीमतें प्रति बोरी 15 रुपये से 30 रुपये कम हुई हैं, क्योंकि छोटे एवं मझोली सीमेंट निर्माताओं की तरफ से आपूर्ति में जबरदस्त इजाफा हुआ है। पश्चिम एशिया में भारतीय सीमेंट कंपनियों को लगे झटके की वजह से गुजरात में भी कीमतें प्रति बोरी 15 रुपये से 20 रुपये कम हुई हैं।

दक्षिण से महाराष्ट्र को सीमेंट की आपूर्ति में इजाफे ने यहां भी कीमतों को प्रति बोरी 10 रुपये से 20 रुपये कम कर दिया है। मध्य भारत के क्षेत्र में भी आपूर्ति की मात्रा बढ़ने के साथ सीमेंट के दाम प्रति बोरी 10 रुपये से 15 रुपये कम हुए हैं।

आईआईएफएल के सीमेंट क्षेत्र के विशेषज्ञ जे राधाकृष्णन को तीसरी तिमाही में दक्षिण की कंपनियों से ढीले-ढाले प्रदर्शन की उम्मीद है, जबकि उत्तरी और पूर्वी क्षेत्र की कंपनियां उनके मुताबिक अच्छा प्रदर्शन करेंगी। सीमेंट क्षमता में 2.50 करोड़ टन इजाफे की उम्मीद है, जिसमें से 1 करोड़ टन के लगभग दक्षिण बाजार में ही आएगा।

चालू वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही को अनुमान के लिहाज से आकर्षक नहीं कहा जा सकता। सीमेंट क्षेत्र शेयर बाजार में भी उम्मीद से कम प्रदर्शन दिखा रहा है, जिसमें शेयरों के भाव 3 महीने के सबसे ऊंचे स्तर के मुकाबले 20 फीसदी से अधिक गिरे हैं। जबकि दूसरी तिमाही में शुध्द लाभ में 69 फीसदी का इजाफा हुआ है।

सीमेंट की कीमतों के गिरने पर सीमेंट क्षेत्र के शेयरों ने तेजी से अपनी प्रतिक्रिया दिखाई और उम्मीद है कि उत्पादन की लागत के बढ़ने का असर आगे मुनाफे पर दिखाई देगा। कोटक सिक्योरिटीज के एक सीमेंट विशेषज्ञ का मानना है कि किराये-भाड़े की लागत बढ़ेगी, क्योंकि कंपनियां सीमेंट की बढ़ी हुई क्षमताओं के लिए दूर-दराज के बाजारों में भी आपूर्ति की संभावनाएं खोजेंगी।

कोटक सिक्योरिटी के सीमेंट विशेषज्ञ के मुताबिक सीमेंट कंपनियों की कमाई वसूली के चलते काफी गंभीर मामला है और हो सकता है कि 20 रुपये प्रति बोरी की कम कीमत देखने को मिले जो आय में औसतन 45 फीसदी गिरावट हो सकती है।

अपनी स्थिति का सबसे अधिक फायदा उठाने के चलते सीमेंट कीमतों के प्रति इंडिया सीमेंट सबसे अधिक संवेदनशील है, जबकि श्री सीमेंट की आय बिजली कारोबार से होने वाली गैर-सीमेंट आय के साथ-साथ कम निश्चित लागत के चलते कम संवेदनशील है। एसीसी, अंबुजा सीमेंट और अल्ट्राटेक सीमेंट की आय में हो सकता है कि 45 फीसदी गिरावट देखने को मिले।

दूसरी तिमाही के दौरान सीमेंट कंपनियों ने अपने शुध्द लाभ में पहली तिमाही में 33 फीसदी के मुकाबले 69 फीदी का इजाफा दर्ज किया। इस तिमाही के दौरान शुध्द बिक्री पहली तिमाही में 24.5 फीसदी के मुकाबले 19 फीसदी बढ़ी।

साल-दर-साल के लिहाज से 750 आधार अंक का सुधार परिचालन मार्जिनों में देखने को मिला। हालांकि तिमाही-दर-तिमाही आधार पर परिचालन मार्जिनों में 220 आधार अंक की गिरावट है, क्योंकि पिछली तिमाही के मुकाबले इस बार उत्पादन की कुल लागत में 170 आधार अंक का इजाफा हुआ है।

कीवर्ड Road of recession is till ahead continue for cement industry,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक