क्राफ्ट अब भारतीय बाजार में लेगी कारोबार का जायका

विवेट सुजन पिंटो |  Jan 21, 2010 10:56 PM IST

कैडबरी को 19.7 अरब डॉलर में खरीदने से क्राफ्ट को भारत में फूड कारोबार की सबसे बड़ी खिलाडी नेस्ले को टक्कर देने में आसानी हो सकती है।

भारत ज्यादातर फूड कंपनियों के लिए कारोबार के लिहाज से एक महत्त्वपूर्ण बाजार है। कैडबरी के अधिग्रहण से पहले क्राफ्ट भारतीय बाजार में अपनी पैठ जमाने का भरसक प्रयास कर रही थी, लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं हो पाई थी।

इस समय गुड़गांव में कंपनी का सपोर्ट ऑफिस है, जिसकी स्थापना करीब चार साल पहले हुई थी। उस समय कैडबरी ने दो कंपनियों यूनिवर्सल कॉर्पोरेशन और बार्कट फूड्स ऐंड टोबैको के साथ अपने तीन उत्पादों फ्लेवर्ड ड्रिंक टैंग, चॉकलेट ब्रांड टॉबलेरॉन और बिस्कुट ब्रांड ओरियो के वितरण के लिए समझौता किया था।

इनमें से टेंग कंपनी का सबसे बेहतर उत्पाद है, जिसमें संतरे, आम, अनानास और नीबू के फ्लेवर हैं। ये शैशे और पाउच में उपलब्ध हैं। मिसाल के तौर पर एक टेंग शैशे की कीमत 4 रुपये है, जबकि 200 ग्राम और 500 ग्राम पाउच की कीमत क्रमश: 35 रुपये और 80 रुपये है। इसके अलावा ग्रैप वैरिएंट भी है।

क्राफ्ट के एक अधिकारी के अनुसार टेंग भारत में एक मास मार्केट उत्पाद के रूप में स्थापित है। टोबलेरोन या ऑरियो के प्रीमियम प्रोडक्ट हैं, जिसके 50 ग्राम की कीमत 50 रुपये जबकि 100 ग्राम की कीमत 45  रुपये है। कैडबरी को अपनी झोली में डालने से क्राफ्ट को भारत में चॉकलेट और कन्फेक्शनरी बाजार में पांव जमाने का मौका मिलेगा।

कंपनी को इससे मास और प्रीमियम लेवल दोनों में अपने उत्पादों की बिक्री करने में खासी मदद मिल सकती है। भारत में चॉकलेट बाजार में कैडबरी की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी है। उद्योग जगत के आंतरिक सूत्रों का मानना है कि इतना ही नहीं, क्राफ्ट अपने अन्य उत्पादों जैसे क्राफ्ट चीज की बिक्री के लिए भी कैडबरी के वितरण नेटवर्क का इस्तेमाल करेगी।

खाड़ी के देशों में काम करने वाले भारतीय नीले रंग के गोल बॉक्स से परिचित हैं, जिस पर गाय की तस्वीर लगी होती है। काफी लंबे समय से भारत में क्राफ्ट चीज की आपूर्ति ग्रे चैनल्स के जरिये करती आ रही है। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि कंपनी के इस उत्पाद से भारत के लोग वाकिफ हैं और कंपनी अपने इस उत्पाद को जल्द ही भारतीय बाजारों में आसानी से बेच पाएगी।

इस तरीके से इसे डेयरी उत्पाद कारोबार में हाथ आजमाने का मौका मिलेगा। भारत में डेयरी उत्पादों का बाजार तेजी से आगे बढ रहा है। सूत्रों के अनुसार क्राफ्ट फूड सेगमेंट के पीछे अपना वक्त बर्बाद नहीं करना चाहती है। कंपनी मुख्य तौर पर बिस्कुट, स्नैक्स, कन्फेक्शनरी, चॉकलेट, फ्लेवर्ड ड्रिंक्स जैसे उत्पादों के कारोबार पर अपना सारा ध्यान केंद्रित करेगी।

हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि देश में फूड सेगमेंट में कारोबार कर पाना क्राफ्ट के लिए उतना आसान नहीं होगा। एक ओर जहां हिंदुस्तान यूनिलीवर फूड मार्केट में कारोबार में संघर्ष करती नजर आ रही है वहीं इस क्षेत्र में प्रतिस्पध्र्दा काफी तीक्ष्ण है।

नेस्ले की पिछले चार दशकों से भी लंबे समय से भारत में उपस्थिति है। कंपनी दुग्ध उत्पाद और पोषण, बेवरिज, प्रीपेयर्ड डिश और चॉकलेट एवं कन्फेक्शनरी कारोबार में अग्रणी कंपनियों में से एक है। फूड और बेवरिज कारोबार की एक अन्य खिलाड़ी जीएसके कंज्यूमर हेल्थ अपने उत्पादों जैसे बूस्ट, हॉर्लिक्स, माल्टोवा और विवा के साथ काफी लंबे समय से भारत में कारोबार कर रही है।

हाल में ही इसने हॉर्लिक्स ब्रांड के तहत न्यूट्री बार में कदम रखा है। इसके अलावा हेंज और यूनिलीवर जैसी कंपनियां भी हैं, जिनके पोर्टफोलियो में रेडी-टू-इट, रेडी-टू-कुक, कुकिंग एड्स, बेवरिज आदि शामिल हैं। देसी कंपनियो जैसे अमूल को भी कम करके आंकना अच्छी बात नहीं है। कंपनी फूड कारोबार में आक्रामक रवैया अपना रही है। बाजार में भी इसकी खासी हिस्सेदारी हिस्सेदारी है।

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