साबुन की दुनिया में सिंथॉल का जवाब नहीं

विवेट सुजन पिंटो |  Feb 19, 2010 10:32 AM IST

गोदरेज के साबुन ब्रांड में सिंथॉल सबसे पुराना और मजबूत नाम है।

करीब 58 साल पहले समूह के संस्थापक आदिश्वर गोदरेज के भतीजे बुरजोर गोदरेज ने इस ब्रांड की शुरुआत की थी। इस दौरान यह ब्रांड इतना मजबूत होता गया कि अब इसकी हैसियत 250 करोड़ रुपये की हो गई है। विश्लेषक इसकी दो वजहें गिनाते हैं।

पहली बात तो यह है कि ब्रांड अपनी मूलभूत पहचान फ्रेशनेस(ताजगी) और डिओडरेंसी(खुशबू) के पैमाने पर खरा उतरा है और जबरदस्त प्रतिस्पद्र्धा के बाद भी इसका बाजार कम नहीं हुआ। जब तक हिंदुस्तान यूनिलीवर ने लिरिल को लॉन्च नहीं किया था तब तक इस श्रेणी में सिंथॉल की दमदार मौजूदगी थी।

लेकिन जब बड़े ग्राहक वर्ग को ध्यान में रखते हुए लिरिल ने 6 महीने पहले लिरिल 2000 नाम से नया उत्पाद पेश किया तब भी सिंथॉल बाजार में मजबूती से टिका रहा। युवाओं के साथ इसका जुड़ाव बरकरार है।

इमरान खान और विनोद खन्ना जैसी जबरदस्त मर्दाना छवि वाली शख्सियतें इसका प्रचार कर चुकी हैं वही मौजूदा दौर में यही कमान ऋतिक रोशन ने संभाल रखी है। इस ब्रांड की मजबूती की दूसरी वजह वक्त के साथ इसकी कदमताल भी रही है। इसने साबुन से लेकर टेल्क और डिओडरेंट जैसे उत्पादों तक अपना विस्तार किया।

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के प्रबंध निदेशक दिलीप सहगल कहते हैं, 'डिओडरेंट बाजार बेहद तेजी से बढ़ रहा है। हमें इसमें अपनी उपस्थिति बढ़ाई। टेल्क नई श्रेणी नहीं है। हम पहले से ही सिंथॉल टेल्कम पाउडर बेच रहे हैं। लेकिन इसमें नई जान डालने की जरूरत जरूर है।' तमिलनाडु जैसे बाजारों में ओरिजनल सिंथॉल ओर सिंथॉल रेग्यूलर की बिक्री अच्छी-खासी है। समूह ने हाल ही में इसी ब्रांड नाम से एक और टेल्कम पाउडर पेश किया है।

सुपरब्रांड्स इंडिया काउंसिल के प्रबंध निदेशक अनमोल धर कहते हैं, ' मेरी राय में गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड इसकी मुख्य क्वॉलिटी से समझौता किए बगैर इसे वक्त के साथ बदलने में कामयाब रही है। इसके साथ-साथ कंपनी ने कई और श्रेणियों में इस ब्रांड को पेश किया। यह एक चतुर रणनीति साबित हुई।'

अपने मूल रूप में बदलाव लाने का मतलब यह नहीं समझना चाहिए कि बदलते वक्त के साथ सिंथॉल में भी कुछ परिवर्तन नहीं आए हैं। हरे रंग का साबुन लाल रंग के रैपर में आने लगा है। ओरिजिनल सिंथॉल साबुन कई वैरिएंट में आने लगा है। इसमें  '24 घंटे कॉन्फिडेंस' की श्रेणी वाले उत्पाद भी शामिल हैं जिसका ऋतिक रोशन प्रचार करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रेशनेस और डिओडरेंसी श्रेणी में हाल-फिलहाल कोई बड़ी कंपनी दस्तक देने नहीं जा रही है। इस लिहाज से सिंथॉल को किसी बड़ी चुनौती को नहीं झेलना होगा। फ्यूचर ब्रांड्स के मुख्य कार्याधिकारी संतोष देसाई कहते हैं, 'फ्रेशनेस और डिओडरेंसी बेहद फायदेमंद है। इसमें शुरू हुई नई होड़ के बावजूद सिंथॉल कामयाब रहा है जिसमें नए उत्पादों की भूमिका भी अहम रही।'

इसकी शुरुआत पिछले साल तमिलनाडु में ब्रांड की रिपोजशनिंग के साथ हुई। सहगल का कहना है कि इसके लिए डर्मिटोलॉजिस्ट की मुहर का सहारा लिया गया। प्रचारित किया गया कि डर्मिटोलॉजिस्ट के भरोसे पर यह ब्रांड खरा उतरा है।

सहगल कहते हैं, 'हमने राज्य में एक सर्वेक्षण किया जिसमें पाया कि डर्मिटोलॉजिस्ट बड़े पैमाने पर इस ब्रांड की सिफारिश करते हैं। तब हमने इसका इस्तेमाल करने का फैसला किया।' वह कहते हैं कि हमारा यह कदम कारगर साबित हुआ और उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ा। मतलब सिंथॉल खरीदने वाले ग्राहकों में इस उत्पाद पर भरोसा और बढ़ गया।

कीमतों को लेकर भी कंपनी खेल करती रही है। कंपनी ने इसके दो वैरिएंट की कीमत 6 और 15 रुपये रखी हुई है। सहगल कहते हैं, 'तमिलनाडु में सिंथॉल रेग्यूलर की कीमत 23 रुपये है। हमें लगता है कि अगर हम कुछ स्टॉक की कीमतें कम कर दें तो बिक्री और बढ़ जाएगी।'

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