हिप्पो आया नए अवतार में

प्रदीप्ता मुखर्जी |  Mar 17, 2010 10:21 PM IST

पार्के एग्रो की संयुक्त निदेशक नादिया चौहान साफ तौर पर कहती हैं कि हिप्पो आलू से निर्मित स्नैक नहीं है।

उल्लेखनीय है कि पार्क एग्रो ने 6,500 करोड़ रुपये के स्नैक बाजार में हिप्पो ब्रांड के साथ कदम रखा था। चौहान कहते हैं 'हिप्पो बेक्ड व्हीट मंचीज है जो स्वास्थ्य मानदंडों पर पूरी तरह खरा उतरता है।'

इस समय हिप्पो छह फ्लेवरों इटालियन पिज्जा, चाइनीज मंचूरियन, हॉट-एन-स्वीट टोमैटो, थाई चिली, यॉगहर्ट मिंट चटनी और इंडियन चटपटा में उपलब्ध है। इसमें कोलेस्ट्रॉल बिल्कु ल नहीं है ट्रांस फैट का स्तर शून्य है।

लेकिन इतने फ्लेवरों में उपलब्ध होने के बाद भी 1,000 करोड़ रुपये की बेवरेज कंपनी पार्के 'हिप्पो' को हेल्थ प्लेटफॉर्म पर नहीं उतार रही है। इसकी वजह यह है कि हेल्थ फूड बाजार में इसे स्नैक के तौर पर उतारे जाने के बाद इसके कारोबार करने को लेकर कोई भी आश्वस्त नहीं दिख रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि हेल्थ फूड कारोबार में हिप्पो की पोजीशिनिंग क रना काफी चुनौती भरा और यह एक  लंबी प्रक्रिया हो सकती है, क्योंकि भारत में इस समय इस कारोबार में काफी प्रतिस्पध्र्दा है और हरेक कंपनियों की इस समय यही सोच है कि जो कुछ भी स्वास्थ्य से जुड़ा है, उससे खासा मुनाफा कमाया जा सकता है।

ब्रांड बिल्डिंग और प्लानिंग ऑर्गेनाइजेशन क्लोरोफिल के सहसंस्थापक आनंद हाल्वे कहते हैं 'फूड कैटेगरी कारोबार में इस बात को बढा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है कि ग्राहक काफी मात्रा में हेल्थ फूड चाहते हैं और इस बात को तूल देने में विपणनकर्ताओं की काफी अधिक भूमिका होती है। वास्तविकता तो यही है कि स्नैकिंग स्वास्थ्य क्षेत्र से जुडा नहीं है।

अगर आप ग्राहकों को ब्रेड और अनाज से बने उत्पाद मुहैया कराते हैं तो यह समझ में आता है, लेकिन स्नैक्स को तो लोग फन के लिए खाते हैं।' हाल्वे ने कहा कि मिसाल के तौर पर सफोला जो एक स्नैक थी लेकिन यह बाजार में नहीं चल पाई। हालांकि, हिप्पो ने अपने ब्रांड कम्युनिकेशन कैम्पेन में सोशल मैसेजिंग के जरिये अपनी एक अलग पहचान बनाने की कोशिश की है।

टेलीविजन पर दिखाए जा रहे हिप्पो के विज्ञापन में एक पुरानी हिंदी फिल्म के गाने 'प्यार बांटते चलो' के साथ इसे लोगों के बीच लोकप्रिय बनाने की कोशिश की गई है। हिप्पो के इस विज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया है कि दुनिया में सारे फसाद की वजह भूख है और सबसे पहले इसे समाप्त किया जाना चाहिए और बाकी समस्या का समाधान स्वयं हो जाएगा।

चौहान का कहना है कि हिप्पो न तो चिप्स है न ही बिस्कुट की श्रेणी में आती है और उन्होंने मुंचीज के नाम से एक नई श्रेणी विकसित करने की कोशिश की है। चौहान कहते हैं कि उनका शुरुआती प्रयास काफी सराहनीय रहा है और कंपनी पूरे दम-खम के साथ इसके प्रचार-प्रसार में लगना चाहती है, क्योंकि इसमें कारोबार की अपार संभावनाएं हैं।

इस समय संगठित स्नैक्स मार्केट सालाना 25 फीसदी की दर से आगे बढ रहा है। दूसरी बात यह है कि भारत में स्नैक बाजार में अब भी कारोबार की काफी संभावनाएं मौजूद है। बाजार में इस समय हिप्पो 5,10 और 20 रुपये के पैक में उपलब्ध है।

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