छोटे अंबानी को फायदा मिलने की उम्मीद कम

ज्योति मुकुल | नई दिल्ली May 10, 2010 02:15 AM IST

अंबानी बंधु गैस आपूर्ति समझौते पर जल्द ही फिर से विचार कर सकते हैं, लेकिन अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस नैचुरल रिसोर्सेस लिमिटेड (आरएनआरएल) को इससे बहुत ज्यादा फायदा मिलता नजर नहीं आ रहा है।

ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि सरकार पहले ही आरआईएल के केजी बेसिन के डी 6 ब्लॉक से पांच साल के लिए रोजाना 90 एमएससीएमडी गैस की आपूर्ति आवंटित कर चुकी है। ऐसे में आरएनआरएल के लिए इस फील्ड में शायद ही इस अवधि के लिए गैस उपलब्ध हो सके।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 80 एमएससीएमडी गैस के आवंटन का पत्र पहले ही जारी किया जा चुका है। अधिकारी ने बताया कि आरआईएल अभी इस फील्ड से रोजाना 62 एमएससीएमडी गैस का उत्पादन कर रही है।

ऐसे में आवंटन की मात्रा उत्पादन से कहीं ज्यादा है। इसके साथ ही 10 एमएससीएमडी गैस का कोटा अभी आवंटित नहीं किया गया है, लेकिन उत्पादन बढ़ने पर इसे कैप्टिव ऊर्जा संयंत्रों को दिया जा सकता है। वैसे, 8 सालों तक आरआईएल का गैस उत्पादन 80 एमएससीएमडी से अधिक होने की उम्मीद नहीं है।

आरएनआरएल पारिवारिक समझौते के तहत आरआईएल से 17 सालों के लिए रोजाना 28 एमएससीएमडी गैस की आपूर्ति 2.34 डॉलर प्रति इकाई करने की मांग कर रही थी। आरआईएल ने इसका विरोध किया और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।

जहां शुक्रवार को कोर्ट ने आरएनआरएल के पारिवारिक समझौते को अमान्य करार देते हुए कहा कि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति और कीमत तय करने का अधिकार सरकार के पास है। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि दोनों पक्ष इस बारे में फिर से बातचीत कर हल निकालें। वार्ता में सरकार की नीतिओं को भी ध्यान में रखने की बात कही गई है।

सरकार ने 16 नवंबर, 2009 को प्रेस नोट में कहा था कि 61.61 एमएससीएमडी गैस की आपूर्ति फर्म आधारित होगी, जबकि 30 एमएससीएमडी की आपूर्ति फॉल बैक आधार पर होगी। फर्म आधारित आपूर्ति के तहत खास क्षेत्र की कंपनियों को गैस पाने का पहला अधिकार होगा, जबकि गैस का उत्पादन बढ़ने पर तात्कालिक आधार पर आपूर्ति की जाएगी।

प्रेस नोटस में यह भी कहा गया है कि 2009-10 से पहले तैयार ऊर्जा संयंत्रों को गैस की आपूर्ति की समीक्षा अधिकार प्रात्प मंत्रिसमूह करेगा। इस आधार पर अनिल अंबानी का दादरी संयंत्र कहीं भी प्रतिस्पर्धा में नहीं है। अधिकारी ने कहा कि जो ऊर्जा संयंत्र पहले तैयार होंगे, उन्हें गैस की जरूरत होगी और फॉल बैक आधार पर उसे गैस की आपूर्ति की जा सकती है।

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