आरआईएल: वापस बुनियाद की ओर

मालिनी भुप्ता |  Sep 14, 2011 10:55 PM IST

उत्पादन साझेदारी अनुबंध (खासकर केजी-डी6) की सक्षमता पर सीएजी की रिपोर्ट पिछले गुरुवार को संसद में रखी गई। इस रिपोर्ट में सरकार और हाडड्रोकार्बन के महानिदेशक की जमकर खिंचाई की गई है वहीं विश्लेषकों का मानना है कि मसौदा रिपोर्ट के मुकाबले इस रिपोर्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के खिलाफ कम तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट आने की खबरों के बाद आरआईएल के शेयरों में खासी तेजी दर्ज की गई।
गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'हालांकि रिपोर्ट में आरआईएल द्वारा शर्तों की बात दोहराई गई है लेकिन डी-6 में पूंजीगत व्यय के 2004-2006 के बीच 2.4 अरब डॉलर से बढ़कर 8.8 अरब डॉलर होने की बात पर कोई बड़ा सवाल खड़ा नहीं किया गया है।'
विश्लेषक दावा करते हैं कि सीएजी ने ऊंचे पूंजीगत व्यय पर चुप्पी साध रखी है और इतने पूंजी निवेश के बाद गैस उत्पादन में आई कमी को लेकर सवाल पूछा है। आरआईएल ने शुक्रवार को विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कंपनी का रुख स्पष्टï किया।
विज्ञप्ति में अन्स्र्ट ऐंड यंग की प्रॉक्योरमेंट ऑडिट का हवाला देते हुए कहा गया हैं, 'ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं मिला है जिससे यह सिद्ध होता है कि तीसरे पक्ष या संबंधित पक्षों से खरीदारी में केजी-डी6 खर्च को बढ़ा कर पेश किया गया है।'
रिपोर्ट में  आरआईएल द्वारा ऊंचे मूल्य की खरीदारी और और अन्वेषण के हरेक चरण के बाद क्षेत्र के अनुबंधित क्षेत्र का 25 फीसदी हिस्सा खाली करने के प्रावधान को पूरा नहीं किए जाने के कारण तेल मंत्रालय और हाइड्रोकार्बन महानिदेशक पर तीखी टिप्पणी की गई है। सरकार ने सीएजी के सामने अपना पक्ष रखा और सफाई दी है।
जेपी मॉर्गन एशिया पैसेफिक इक्विटी रिसर्च के अनुसार सीएजी ने नई अन्वेषण लाइसेंसिंग नीति (नेल्प) राहत और उत्पादन साक्षा अनुबंध की बुनियादी बातों पर सवाल उठाए हैं। 'हमने पाया है कि अन्वेषण और उत्पादन क्षेत्र में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नेल्प की स्थापना की गई है। गहरे जल में अन्वेषण के काम में निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्रों को मुनाफा अर्जित करने का अवसर दिया जाना जरूरी होगा। सीएजी द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए लेकिन सरकार की ओर से अधिक जांच निवेश के लिए हानिकारक हो सकता है।'

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