एयर इंडिया की बोली की शर्तें हुईं आसान

अनीश फडणीस | मुंबई May 02, 2018 12:24 PM IST

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया के लिए रुचिपत्र दाखिल करने की तिथि एक पखवाड़ा बढ़ाकर 31 मई कर दी है। सरकार ने चुने गए बोलीकर्ताओं को अंतिम पेशकश दाखिल करने के पहले कंसोर्टियम में साझेदार बदलने की अनुमति देने का भी फैसला किया है।  संभावित आवेदकों की ओर से निवेदन को देखते हुए बोली की शर्तों में बदलाव की घोषणा मंगलवार को की गई। इसके अलावा चुने गए बोलीकर्ता को मानव संसाधन, परिचालन, बिक्री और खरीद के मामले में परिचालन संबंधी सुविधाओं की अनुमति दी गई है, जबकि अन्य कारोबार को इससे दूर रखा गया है।

सरकार ने एयर इंडिया के साथ एयर इंडिया एक्सप्रेस और इसकी ग्राउंड हैंडलिंग वाली सहायक इकाई एआईएसएटीएस में 76 प्रतिशत विनिवेश का प्रस्ताव किया है।  मूल रूप से बोलीकर्ता को 14 मई तक रुचिपत्र दाखिल करने को कहा गया था और अंतरिम रूप से चुने गए बोलीकर्ताओं को 28 मई तक हिस्सा लेना था। अब इसके लिए अंतिम तिथि बढ़ाकर क्रमश: 31 मई और 15 जून कर दिया गया है।

पहले जहां सरकार ने कंसोर्टियम में किसी बदलाव की अनुमति नहीं दी थी, वहीं अब मानक सरल कर एक बार बदलाव करने की अनुमति दे दी गई है। एकल बोलीकर्ता को कंसोर्टियम बनाने की अनुमति दी गई है और मौजूदा कंसोर्टियम अब नए सदस्यों को शामिल कर सकता है। वहींं कुल संपत्ति और मुनाफे को लेकर बोली का मानदंड यथावत रखा गया है।

बहरहाल कंसोर्टियम में नेतृत्व करने वाले सदस्य में कोई बदलाव नहींं होगा और एक कंसोर्टियम से दूसरे कंसोर्टियम में जाने की अनुमति भी नहींं होगी। संभावित बोलीकर्ताओं की ओर से मांगी गई 160 जानकारी और उनके जवाब भी मंत्रालय ने जारी कर दिए हैं। इसमेंं साफ किया गया है कि किसी व्यक्ति को (एयर इंडिया के कर्मचारियोंं को छोड़कर) एयर इंडिया की बोली लगाने के योग्य नहीं माना जाएगा।  नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि यह सोच विचार कर फैसला किया गया है कि सरकार एयरलाइंस मेंं 24 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रखेगी।

मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है, 'कंपनी अधिनियम और शेयरहोल्डर समझौते के मुताबिक सरकार को अल्पांश निवेशक की तहत अधिकार होंंगे।' इस सौदे से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि चुने गए बोलीकर्ता के लिए सौदे के 3 साल के भीतर आरंभिक साïर्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने जैसी कोई शर्त नहीं होगी। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि वह आवेदन प्रस्ताव (आरएफपी) के समय खुलासा करेगा कि शेयर बिक्री समझौसे में कॉल और पुट ऑप्शन की क्या स्थिति होगी।

पुट ऑप्शन मेंं मौजूदा शेयरधारकों को अधिकार होता है कि वे किसी विशेष मूल्य पर प्रतिभूतियों की बिक्री कर सकते हैं और इस तरीके से उन्हें कंपनी से बाहर निकलने का विकल्प होता है। कॉल ऑप्शन में खरीदार को पूर्व निधारित मूल्य पर शेयर खरीदने की अनुमति होती है।  

उड्डय से जुड़े सूत्र ने कहा, 'सरकार ने खुद के मालिकाना को लेकर शर्तों में राहत नहीं दी है और नए मालिक द्वारा ऋण बरकरार रखा जाएगा। यह संभावित बोलीकर्ताओं की प्रमुख चिंता है और आरएफपी जारी होने के पहले इसका समाधान किया जाना चाहिए।'  

घरेलू एयरलाइंस इंडिगो और जेट एयरवेज ने एयर इंडिया के लिए बोली न लगाने का फैसला किया है, बिक्री की प्रक्रिया कुछ विदेशी एयलाइंस, निजी इक्विटी फर्मों जैसे वारबर्ग पिंकस, सॉवरिन वेल्थ फंड और विश्व बैंक की निजी निवेश इकाई, अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम को आकर्षित कर रही है। 

 

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