वॉलमार्ट के सहारे फोनपे को भारत का ई-पमेंट दिग्गज बनने का भरोसा

समरीन अहमद | बेंगलूरु May 11, 2018 12:31 PM IST

फ्लिपकार्ट का डिजिटल पेमेंट ऐप अमेरिकी खुदरा दिग्गज वॉलमार्ट के संसाधनों के दम पर आगे बढऩे की उम्मीद कर रहा है, जिसने बुधवार को ऐलान किया कि वह भारतीय ई-कॉमर्स फर्म की 77 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर रही है। फोनपे को उम्मीद है कि वह अगले दो साल में देश की सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट सेवा प्रदाता बन जाएगी। फोनपे की इच्छा अलीबाबा व सॉफ्टबैंक के निवेश वाली प्रतिद्वंद्वी पेटीएम की बादशाहत को खत्म करना चाहती है।

कंपनी का दावा है कि वॉलमार्ट से मिलने वाली अतिरिक्त पूंजी से उसे तेजी से आगे बढऩे में मदद मिलेगी। वॉलमार्ट के मुख्य कार्याधिकारी डग मैकमिलन का कहना है कि फोनपे में फ्लिपकार्ट की गाड़ी को आगे ले जाने के लिए चालक बनने की क्षमता है। लगता है कि उसकी इस हौसलाअफजाई से फोनपे का मनोबल सातवें आसमान पर है।

कंपनी के सह संस्थापक और मुख्य तकनीकी अधिकारी राहुल चारी ने कहा, 'हमारा लक्ष्य अगले दो साल में नंबर वन बनने का है।' उनका मानना है कि नया निवेश आने से शोध एवं अनुसंधान पर ज्यादा खर्च होगा और ज्यादा इनोवेशन होगा। उन्होंने कहा, 'जब आप अच्छी प्रतिभाओं को अपने साथ जोड़ते हैं और आपकी कार्य संस्कृति प्रौद्योगिकी के जरिये समस्याओं का समाधान करने की है तो फिर स्वाभाविक रूप से आप नया इनोवेशन देखना शुरू करते हैं।'

अलबत्ता कंपनी ने जून में शुरू किए जा रहे बड़े फीचर पर चुप्पी साध रखी है। कंपनी का दावा है कि उसने कई नई चीजें उतारी हैं जिनमें पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें शामिल हैं। इसके जरिये छोटे दुकानदार भी डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकते हैं। साथ ही कंपनी रेडबस जैसे ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं के साथ भी साझेदारी कर रही है ताकि उनके प्लेटफॉर्म को सीधे अपने ऐप और वेबसाइट पर लाया जा सके।

ऑनलाइन भुगतान बाजार तेजी से बढ़ रहा है और अधिक से अधिक लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ रहे हैं। गूगल और व्हॉट्सऐप जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी इस बाजार में कूद पड़ी हैं। इन कंपनियों से निपटने के लिए फ्लिपकार्ट ने मार्च में अपने भुगतान ऐप में 5.18 अरब रुपये का निवेश किया था। वॉलमार्ट के अधिकारियों ने बुधवार को निवेशकों के साथ बातचीत में फ्लिपकार्ट के जरिये भारत के डिजिटल भुगतान बाजार में प्रवेश को लेकर काफी उत्सुकता दिखाई थी।

फोनपे को उम्मीद है कि वॉलमार्ट का यह उत्साह निवेश के रूप में दिखाई देगा और इससे उसे पेटीएम का मुकाबला करने में मदद मिलेगी।विजय शंकर शर्मा की अगुआई वाली पेटीएम का भारत के डिजिटल भुगतान कारोबार में दबदबा है। पिछले महीने हुए 19 करोड़ यूपीआई आधारित लेनदेन में उसकी 33 फीसदी हिस्सेदारी थी। साथ ही यह देश की प्रमुख डिजिटल वॉलेट प्रदाता भी है।

अलबत्ता फोनपे ने पेटीएम के इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि मार्च में पेटीएम के लेनदेन का औसत मूल्य 40 रुपये था जबकि उसका अपना औसत मूल्य 1,800 रुपये था। वॉलमार्ट परिवार का सदस्य बनने के बावजूद फ्लिपकार्ट की भुगतान कंपनी का जोर उन स्थानीय समस्याओं पर रहेगा जो समाधान के लिए प्रौद्योगिकी की तलाश में हैं। कंपनी भारत में व्यापक अवसर देख रही है। चारी ने कहा, 'अभी हमारी कोई वैश्विक योजना नहीं है।'

 

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