फ्लिपकार्ट से वॉलमार्ट को होगा कितना लाभ

कृष्ण कांत | मुंबई May 15, 2018 10:55 AM IST

क्या 21 अरब डॉलर की कीमत पर फ्लिपकार्ट का अधिग्रहण करना वॉलमार्ट के लिए फायदे का सौदा साबित होगा? वॉलमार्ट को अपने शुरुआती निवेश पर 10 फीसदी प्रतिफल हासिल करना है तो फ्लिपकार्ट को सालाना 2 अरब डॉलर (मौजूदा विनिमय दर पर 135 अरब रुपये) का शुद्घ मुनाफे की जरूरत होगी। अगर फ्लिपकार्ट को वॉलमार्ट की तरह 2.1 फीसदी शुद्घ लाभ मार्जिन हासिल करना है तो उसे अगले कुछ वर्षों में 100 अरब डॉलर (6,700 अरब रुपये) का सालाना राजस्व कमाना होगा। एमेजॉनडॉटकॉम का शुद्घ मुनाफा मार्जिन भी इतना ही है। इस अवधि में अमेरिका के खुदरा उद्योग (ऑफलाइन) का शुद्घ मुनाफा मार्जिन 3.2 फीसदी था।

दूसरी तरफ भारतीय ऑफलाइन रिटेलरों का मुनाफा अधिक रहा। फ्यूचर रिटेल ने 3.3 फीसदी का शुद्घ मार्जिन हासिल किया जबकि एवेन्यू सुपरमाट्र्स (डी मार्ट) का 5.2 फीसदी और ट्रेंट का 5.5 फीसदी रहा। विश्लेषकों का कहना है कि फ्लिपकार्ट के लिए इस तरह का मार्जिन हासिल करना मुश्किल होगा क्योंकि वित्त वर्ष 2017 में उसका राजस्व करीब 3 अरब डॉलर (199 अरब डॉलर) और शुद्घ घाटा 0.84 अरब डॉलर रहा।

विश्लेषकों  का कहना है कि 100 अरब डॉलर का राजस्व हासिल करने के लिए वॉलमार्ट को फ्लिपकार्ट में और निवेश करना होगा। इससे कंपनी के घाटे की स्थिति से बाहर आने की मियाद बढ़ जाएगी और नकारात्मकता से कंपनी के निवेश पर रिटर्न प्रभावित होगा। वॉलमार्ट ने पिछले एक साल के दौरान अपने निवेश पर 8.5 फीसदी प्रतिफल हासिल किया जो उसे 5 साल के औसत 11.2 फीसदी से कम है। फ्लिपकार्ट के लिए राजस्व लक्ष्य का आधा हिस्सा पाना भी मुश्किल है।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक और प्रबंध निदेशक जी चोक्कालिंगम कहते हैं, 'फ्लिपकार्ट अगले 7-8 वर्ष में सालाना 50 अरब डॉलर तक का राजस्व हासिल कर सकती है लेकिन यह तभी होगा जब भारत के ई-कॉमर्स क्षेत्र में दो ही कंपनियां होंगी। अभी भारतीय बाजार में उसकी आधी हिस्सेदारी है। लेकिन बाजार बढऩे से प्रतिस्पद्र्घा भी बढ़ेगी क्योंकि ई-कॉमर्स क्षेत्र में उतरना आसान है।'


उनका मानना है कि भारत में तकनीकी प्रतिभा और उद्यमिता की संस्कृति को देखते हुए श्रेणी विशेष की ई-कॉमर्स कंपनियों से ज्यादा प्रतिस्पद्र्घा मिलने की उम्मीद है। खुदरा सलाहकार कंपनी टेक्रोपाक एडवाइजर्स के मुताबिक 2017 में भारत के ई-कॉमर्स उद्योग का राजस्व करीब 16 अरब डॉलर रहा। वॉलमार्ट को उम्मीद है कि भारत का ई-कॉमर्स बाजार अगले 5 साल में 36 फीसदी की सालाना चक्रवृद्घि दर से बढ़ेगा। इससे ई-कॉमर्स की पहुंच मौजूदा 2.1 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2023 में 6.2 फीसदी हो जाएगी।  

विश्लेषकों का कहना है कि वॉलमार्ट की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए फ्लिपकार्ट को फूड और ग्रोसेरी क्षेत्र में भी उतरना पड़ेगा। जेपी मॉर्गन के मुताबिक देश के 710 अरब डॉलर के कुल खुदरा कारोबार में फूड और ग्रोसरी की हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई है। इसमें ई-कॉमर्स की हिस्सेदारी महज 0.5 फीसदी है। अलबत्ता इस क्षेत्र में प्रतिस्पद्र्घा बहुत ज्यादा है और मार्जिन बहुत कम है।

फ्लिपकार्ट अभी मोबाइल फोन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन (मिंट्रा और जबॉन्ग के जरिये) के क्षेत्र में मौजूद है। टेक्रोपाक के अरविंद सिंघल का मानना है कि भारत में व्यापक स्तर पर ई-कॉमर्स कंपनी बनाने के लिए शुरुआती स्तर पर बहुत बाधाएं हैं। अलबत्ता वॉलमार्ट खुदरा क्षेत्र की दुनिया की दिग्गज कंपनी है जिसके पास फ्लिपकार्ट के नए निवेश को झेलने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। 

कीवर्ड walmart, flipkart, e commerce, amazon, फ्लिपकार्ट, अधिग्रहण, वॉलमार्ट, खुदरा उद्योग,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक