इंडियन ऑयल ने कमाया सबसे ज्यादा मुनाफा

भाषा | नई दिल्ली May 31, 2018 03:35 PM IST

सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कार्पाेरेशन (आईओसी) लगातार दूसरे साल सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली सरकारी कंपनी बनी है। उसने तेल एवं गैस का उत्पादन करने वाली ओएनजीसी को भी छोड़ दिया है। आईओसी के सबसे ज्यादा मुनाफे में रहने के बाद इस बात को लेकर सवाल उठने लगा है कि पेट्रोल, डीजल के चढ़ते दाम के बीच कंपनी को ईंधन सस्ते में बेचने के लिए सब्सिडी क्यों दी जानी चाहिए।

हाल में इस तरह की खबरें आई थी कि सरकार ओएनजीसी तथा तेल, गैस उत्पादन से जुड़ी दूसरी कंपनियों को सब्सिडी में योगदान के लिए कह सकती है। आईओसी कारोबार के लिहाज से दशकों तक देश की सबसे बड़ी कंपनी रही। आईओसी का शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2017-18 में 12 प्रतिशत बढ़कर 21,346 करोड़ रुपये रहा। इससे पूर्व वित्त वर्ष में यह 19,106 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी ने पिछले सप्ताह ही वित्तीय परिणाम की घोषणा की। वहीं ऑयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन (ओएनजीसी) का शुद्ध लाभ 2017-18 में 11.4 प्रतिशत बढ़कर 19,945 करोड़ रुपये रहा।

हालांकि, दिग्गज कारोबारी मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लगातार तीसरे साल सबसे मूल्यवान कंपनी बनी रही। कंपनी का मुनाफा 36,075 करोड़ रुपये रहा। देश की सबसे बड़ी साफ्टवेयर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का शुद्ध लाभ 2017-18 में 25,580 करोड़ रुपये रहा और यह दूसरी सर्वाधिक मूल्यवान कंपनी रही। ओएनजीसी लंबे समय तक सर्वाधिक लाभ कमाने वाली कंपनी रही लेकिन तीन साल पहले निजी क्षेत्र की रिलायंस और टीसीएस से यह पिछड़ गई।

वास्तव में ओएनजीसी का लाभ सार्वजनिक क्षेत्र की तीन खुदरा कंपनियों, इंडियन ऑयल कार्पाेरेशन (आईओसी) , हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लि. (एचपीसीएल) तथा भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लि. (बीपीसीएल) के संयुक्त लाभ से भी अधिक था। लेकिन अब वह आईओसी से पिछड़ गई है। पिछले सप्ताह एचपीसीएल ने वित्त वर्ष 2017-18 के वित्तीय परिणाम की घोषणा की और उसका शुद्ध लाभ 2017-18 में 6,357 करोड़ रुपये जबकि कारोबार 2.43 लाख करोड़ रुपये रहा।

वहीं बीपीसीएल का शुद्ध लाभ पिछले वित्त वर्ष में 7,919 करोड़ रुपये रहा। आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी पेट्रोलियम पदार्थों की खुदरा बिक्री करने वाली कंपनियां अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। ऐसी स्थिति में ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को पेट्रोल, डीजल की सस्ते दाम पर बिक्री करने पर सब्सिडी में योगदान करने के लिए कहने पर सवाल उठने लगे हैं।

ओएनजीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'उनके लाभ को देखिए। उन्हें किसी सब्सिडी समर्थन की जरूरत नहीं है।' ओएनजीसी 30,000 से 35,000 करोड़ रुपये सालाना निवेश कर रही है और अगर फिर से उससे सब्सिडी पर ईंधन मांगा जाता है, तो उसके लिए स्थिति कठिन होगी। ओएनजीसी और ऑयल इंडिया ने जून 2015 तक कच्चे तेल पर 40 प्रतिशत ईंधन सब्सिडी का भुगतान किया है।

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