कमजोर रही चौथी तिमाही

कृष्ण कांत | मुंबई Jun 04, 2018 10:47 AM IST

वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में शुद्ध मुनाफा वृद्धि और परिचालन मार्जिन पिछली 16 तिमाहियों के निचले स्तर पर, 2018-19 भी रह सकता है चुनौतीपूर्ण

वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में भारतीय कंपनियों के वित्तीय नतीजे उतने उत्साहजनक नहीं रहे। हालांकि शुद्ध बिक्री में लगातार दूसरी तिमाही में साल भर पहले की तुलना में दो अंकों में तेजी आई, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले आलोच्य अवधि में वृद्धि की रफ्तार कमजोर रही।  भारतीय कंपनियां आय अर्जित करने के मोर्चे पर फिर फिसड्डी साबित हुईं।

कंपनियों (वित्तीय एवं ऊर्जा क्षेत्र को छोड़कर) का संयुक्त एवं शुद्ध मुनाफा चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 14.4 प्रतिशत कम रहा। पिछले चार सालों में यह सबसे कमजोर प्रदर्शन रहा है। परिचालन मार्जिन कमजोर रहने से मुनाफे पर असर पड़ा, वहीं बिक्री उम्मीद से कम रहने और विनिर्माण कंपनियों पर ब्याज का दबाव जारी रहने से भी आंकड़ों पर नकारात्मक असर पड़ा।

वित्तीय क्षेत्र, तेल एवं गैस को छोड़कर कंपनियों की संयुक्त शुद्ध बिक्री जनवरी-मार्च 2018 में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत अधिक रही, जो दिसंबर 2017 के 11.4 प्रतिशत के मुकाबले कमतर साबित हुई। घरेलू बाजार पर केंद्रित कंपनियों की भी कहानी भी कुछ ऐसी ही रही। राजस्व अर्जित करने की इनकी वृद्धि दर चौथी तिमाही में कम होकर 11.5 प्रतिशत रह गई, जो पिछली तिमाही में 12.9 प्रतिशत रही थी।

विश्लेषकों का कहना है कि इन आंकड़ों से एक बात साफ है कि कंपनी जगत के लिए वित्त वर्ष 2019 में तेजी से आगे बढऩा मुनासिब नहीं रह पाएगा। विश्लेषकों के अनुसार सरकार और उपभोक्ताओं दोनों के लिए वृहद आर्थिक हालात खासे चुनौैतीपूर्ण रह सकते हैं। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेस के धनंजय सिन्हा कहते हैं, 'ईंधन कीमतों में तेजी और बॉन्ड पर प्राप्तियों से मांग पर असर से सरकार और उपभोक्ताओं की वित्तीय हालत तंग रहेगी।'

विश्लेषकों के अनुसार तेल कीमतों में तेजी और रुपये में गिरावट से वित्त वर्ष 2019 में कंपनियेां का मार्जिन कम रह सकता है। सिन्हा ने कहा, 'कच्चे माल की ऊंची कीमतें और अन्य कारणों से कंपनियों के लिए राजस्व को तेजी से कमाई में तब्दील करना आसान नहीं होगा।'

 

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