औद्योगिक ऋण पर भारी खुदरा ऋण

कृष्ण कांत | मुंबई Jun 06, 2018 12:16 PM IST

बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए अब खुदरा ऋण का बाजार उद्योग और कॉर्पोरेट क्षेत्र के ऋण बाजार से बड़ा हो गया है। अब तक उद्योग और कॉर्पोरेट क्षेत्र बैंकों और एनबीएफसी के लिए सबसे बड़ा क्षेत्र हुआ करता था।  इस साल मार्च के अंत तक कुल बकाया खुदरा ऋण 31 लाख करोड़ रुपये हो गया था जबकि उद्योगों को बैंक से मिला ऋण 27 लाख करोड़ रुपये था।  

हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनैंस कॉर्पोरेशन (एचडीएफसी), एलआईसी हाउसिंग और बजाज फाइनैंस सहित अन्य गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के कुल खुदरा ऋण में इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 23.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई जबकि इस दौरान उद्योगों को बैंकों से मिलने वाले ऋण महज एक फीसदी बढ़ा। पिछले 3 वर्षों में उद्योगों को बैंक ऋण की सालाना चक्रवृद्घि दर 0.5 फीसदी रही जबकि इस दौरान खुदरा ऋण की रफ्तार 20.1 फीसदी रही।

पिछले वित्त वर्ष में सबसे अधिक आवास क्षेत्र में खुदरा ऋण दिया गया। बैंकों के बकाया खुदरा ऋण में इस क्षेत्र की सबसे अधिक 51.1 फीसदी हिस्सेदारी रही। लेकिन क्रेडिट कार्ड और अन्य व्यक्तिगत ऋणों के तेजी से बढऩे से इसकी हिस्सेदारी कम हो रही है। उदाहरण के लिए वित्त वर्ष 2018 में अन्य व्यक्तिगत ऋण की हिस्सेदारी 35.3 फीसदी रही और बैंकों के खुदरा ऋण में इसकी हिस्सेदारी 26.6 फीसदी हो गई जो वित्त वर्ष 2013 में 20 फीसदी थी।

इस श्रेणी में आवास ऋण, वाहन ऋण, क्रेडिट कार्ड ऋण, शिक्षा ऋण और बैंक जमा, शेयर और सिक्योरिटीज पर अग्रिम ऋण के अलावा सभी ऋण आते हैं।  वित्त वर्ष 2018 में वाणिज्यिक बैंकों से खुदरा ऋण में 17.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 19 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इससे पिछले वित्त वर्ष में खुदरा की हिस्सेदारी में 22.8 फीसदी की तेजी आई थी जबकि 5 साल पहले यह 18.2 फीसदी बढ़ा था।

 

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