उपभोक्ता वस्तु कंपनियों का दमदार प्रदर्शन, आगे चुनौतियां

विवेट सुजन पिंटो | मुंबई May 16, 2018 09:48 PM IST

घरेलू उपभोक्ता वस्तु बाजार में लगातार तेजी दिख रही है। हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल), डाबर, इमामी, बजाज कॉर्प, नेस्ले, जीएसके कंज्यूमर, एशियन पेंट्ïस और गोदरेज कंज्यूमर (जीसीपीएल) जैसी कंपनियों ने चौथी तिमाही के लिए दमदार वित्तीय परिणाम जारी किए हैं। इन कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन को कमजोर आधार के साथ-साथ ग्रामीण मांग में सुधार होने से बल मिला। हालांकि सबसे पहले इसकी झलक वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही में दिखी थी जब आधार अपेक्षाकृत कमजोर रहा था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है।
 
उपभोक्ता वस्तुएं बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी एचयूएल ने बाजार के अनुमानों को धत्ता बताते हुए सोमवार को दमदार नतीजे जारी किए। चौथी तिमाही के दौरान कंपनी की शुद्ध बिक्री 11.1 फीसदी बढ़ गई जबकि शुद्ध लाभ में 14.2 फीसदी का इजाफा हुआ। लगातार दूसरी तिमाही के दौरान कंपनी बिक्री में 11 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। एडलवाइस के वरिष्ठï उपाध्यक्ष (संस्थागत इक्विटीज) अबनीश रॉय ने कहा कि इससे उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र में कहीं लगातार सुधार का संकेत मिलता है। डाबर, इमामी, बजाज कॉर्प, जीएसके कंज्यूमर, एशियन पेंट्ïस और जीसीपीएल ने भी चौथी तिमाही के दौरान बिक्री में 6 से 12 फीसदी के दायरे में वृद्धि दर्ज की हैं। उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि इनमें से तमाम कंपनियों को ग्रामीण बिक्री बढऩे से रफ्तार मिली। दूसरी ओर नेस्ले ने चौथी तिमाही के दौरान सकल राजस्व में 10.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है। उसने मार्च तिमाही के लिए बिक्री में वृद्धि का आंकड़ा जारी नहीं किया था।
 
इनमें से अधिकतर कंपनियों के परिचालन मार्जिन में भी मार्च तिमाही के दौरान 200 से 300 आधार अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। विज्ञापन एवं बिक्री प्रोत्साहन खर्च पर नियंत्रण एवं परिचालन कुशलता बढऩे से परिचालन मार्जिन को बल मिला। डाबर इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी सुनील दुग्गल ने कहा, 'हमारे मार्जिन प्रोफाइल में सुधार के लिए जोखिम प्रबंधन एवं लागत दक्षता की भूमिका अहम रही।' मार्च तिमाही के लिए डाबर का परिचालन मार्जिन पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 210 आधार अंकों के सुधार के साथ 23.9 फीसदी को छू गया। 
 
कंपनियों को जीएसटी की कम दरों से भी फायदा मिला क्योंकि जीएसटी दर को 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि दाम घटाने और जीएसटी दरों में कटौती का फायदा तत्काल ग्राहकों को देने से आगे चुनौतियां बरकरार रहेंगी। सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी है जो फिलहाल करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से मुद्राफीतिक दबाव बढ़ेगा और अंतत: उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। एचयूएल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी संजीव मेहता ने कहा, 'चिंता के संकेत दिख रहे हैं लेकिन कीमत को लेकर निर्णय सोच-समझकर लिया जाएगा।' डाबर एवं अन्य कंपनियां पहले की कह चुकी हैं कि कीमतों में वृद्धि इनपुट लागत के दबाव पर निर्भर करेगा।
कीवर्ड HUL, Q4, FMCG,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक