आय कर विभाग की आक्रामक योजना : कर चोरों पर तुरंत होगा मुकदमा

श्रीमी चौधरी | मुंबई Jul 06, 2017 10:49 PM IST

कर चोरों पर कार्रवाई के लिए कार्य योजना तैयार

कर चोरी और बेनामी संपत्ति पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करेगा आयकर विभाग
पुख्ता सबूत होने पर तुरंत शुरू होगा मुकदमा
अभी कर आकलन पूरा होने के बाद ही होती है अदालती कार्यवाही
बेनामी सौदों के मामले मार्च 2018 तक निपटाने का लक्ष्य
जुलाई तक निपटाएं 2014, 2015 और 2016 के बेनामी मामले

आय कर विभाग ने कर चोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए एक आक्रामक योजना बनाई है। इसके तहत अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं तो कर आकलन पूरा होने से पहले ही उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है। विभाग ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के निर्देश पर यह कदम उठाया है। बोर्ड ने कर चोरों को दबोचने के लिए एक व्यापक कार्य योजना बनाई थी। बोर्ड ने कहा था कि कर अधिकारियों को उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि काले धन के कारोबार में लिप्त लोगों के मन में कानून का खौफ पैदा हो। वित्त वर्ष 2018 के लिए तैयार की गई कार्ययोजना में विभाग ने कहा है कि कर चोरी के जिन मामलों में मजबूत साक्ष्य हैं उनमें अभियोजन शुरू करने के लिए कर आकलन पूरा होने तक रुकने की जरूरत नहीं है। 

इस योजना की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा, 'विभाग ने अब अपनी रणनीति बदल दी है। पहले हम लंबी प्रक्रिया के बाद सिर्फ कर का नोटिस भेजते थे लेकिन अब हम एक कदम आगे बढ़कर कर चोरी करने वालों को अदालतों में घसीटने जा रहे हैं।' आमतौर पर विभाग कर आकलन के बाद यह निर्णय लेता है कि कोई मामला अभियोजन के लायक है या नहीं। उसी के बाद आय कर कानून की धारा 276सीसी के तहत कर चोरों के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही शुरू की जाती है या आरोपपत्र दायर किया जाता है। इस धारा के तहत कर चोरी एक दंडनीय अपराध है और इसमें जुर्माने के साथ-साथ 3 महीने से लेकर 7 साल की सजा का प्रावधान है।

एक अन्य कर अधिकारी ने कहा, 'अगर कोई व्यक्ति कर चोरी का अपराधी पाया जाता है तो आकलन अधिकारी उसके खिलाफ अदालत में शिकायत कर सकता है। इस शिकायत पर उसके खिलाफ मुकदमा चलेगा। नई योजना के मुताबिक हम छापेमारी के तुरंत बाद या अगले दिन अदालत में जा सकते हैं।' अधिकारी ने कहा, 'ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि कर चोरी के मामले बहुत सारे हैं। अक्सर लोग कर बचाने के चक्कर में अपनी आय कम दिखाते हैं, अपनी आय के स्रोत को छिपाने के लिए खातों में हेरफेर करते हैं, गलत जानकारी देते हैं या कर का नोटिस मिलते ही भाग जाते हैं। उन पर  सख्ती करने की जरूरत है।'

कर बचाने के लिए अक्सर बेनामी सौदे भी किए जाते हैं। इस बार कर विभाग की इन पर भी सख्त नजर है। कार्ययोजना में बताया गया है कि नए बेनामी सौदा कानून के तहत किस तरह बेनामी सौदों की जांच की जानी है। सीबीडीटी ने आयकर विभाग से कानून का उल्लंघन करने वालों को पहचानने, उनकी जांच करने और तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहा है। उसने मामलों की जांच करने और उन्हें निपटाने के लिए लक्ष्य और मियाद भी तय कर दिए हैं।

आयकर विभाग को वित्त वर्ष 2014, 2015 और 2016 के बेनामी मामले इस महीने के अंत तक  निपटाने होंगे। इसके साथ ही कर अधिकारियों को बैंकों और दूसरी खुफिया इकाइयों से मिली संदिग्ध लेनदेन की जानकारी पर भी कार्रवाई करने के निर्देश थे। कर विभाग को पहले उन मामलों में जांच पूरी करनी है जिनमें 100 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की अघोषित आय का पता चला है। यह काम दिसंबर तक पूरा करना है।

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