कर्ज माफी में पंजाब को ज्यादा लाभ

संजीव मुखर्जी | नई दिल्‍ली Jul 18, 2017 10:21 PM IST

पंजाब की बल्‍ले-बल्‍ले

कर्ज माफी की घोषणा करने वाले राज्यों में पंजाब के किसानों को सबसे ज्यादा लाभ होने जा रहा है। इसकी वजह है कि अन्य राज्यों की तुलना में पंजाब में ग्रामीण इलाकों में संस्थागत व्यवस्था के तहत बड़े पैमाने पर कर्ज लिया जाता है।पंजाब के किसानों में औसतन हर खाताधारक किसान ने 2016-17 के पहले 11 महीनों में करीब 2.23 लाख रुपये कर्ज लिया था। गन्ने को छोड़कर  अन्य फसलों के लिए कम अवधि का कर्ज  एक साल के लिए होता है, लेकिन फसलों की कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट होने पर कर्ज का भुगतान समस्या बन जाती है और कर्ज बढ़ता जाता है। 

सहकारी बैंकों व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों सहित विभिन्न बैंकिंग चैनलों से लिए गए आंकड़ों के मुताबिक किसानों का कर्ज माफ करने वाले 5 बड़े राज्यों में पिछले तीन साल के दौरान किसानों पर कर्ज बहुत तेजी से बढ़ा है। यह बढ़ोतरी खाताधारकों की संख्या और कम अवधि के कर्ज, दोनों ही मामलों में हुई है।  सावधि ऋण सामान्यतया संस्थागत व्यवस्था के तहत दिए गए कर्ज में फसली ऋण से कम होता है। अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में  9.59 लाख करोड़ रुपये कर्ज का वितरण विभिन्न संस्थानों द्वारा किया गया, जिसमें से 65 प्रतिशत फसली ऋण है, जबकि शेष सावधि ऋण है। 

आंकड़ों से पता चला है कि उत्तर प्रदेश में दूसरा बड़ा राज्य है, जिसने एक निश्चित सीमा तक की कर्जमाफी की घोषणा की है। आंकड़ों के मुताबिक राज्य में फसली ऋण लेने वाले 84 लाख खाताधारक हैं, जिन्होंने 2016-17 में फरवरी के आखिर तक 52,442 करोड़ रुपये कर्ज लिया था। इसका मतलब यह है कि हर खाताधारक ने औसतन 62,000 रुपये कर्ज लिया है। किसानों का कर्ज माफ करने वाले महाराष्ट्र के आंकड़ों से पता चलता है कि 60 लाख बैंंक खातों में 37,790 करोड़ रुपये कर्ज दिया गया है। दूसरे शब्दों में इस अवधि के दौरान एक खाते पर औसतन 62,000 रुपये कर्ज दिया गया। 

इन आंकड़ों में सभी तरह के फसली ऋण शामिल हैं, जो सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों व वाणिज्यिक बैंकों ने दिए हैं। फरवरी 2017 तक दिए गए 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा फसली ऋण में वाणिज्यिक बैंकों ने 67 प्रतिशत से ज्यादा कर्ज दिया है। इसके बाद सहकारी बैंकों ने 18 प्रतिशत और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने 14.4 प्रतिशत के करीब कर्ज दिया है। आंकड़ों से पता चलता है कि मध्य प्रदेश में 2014-15 से 2015-16 के बीच कर्ज 11 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है, जहां किसान पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की तर्ज पर फसली ऋण माफ कि ए जाने की मांग कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के साथ महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश ने फसली ऋण माफ करने की घोषणा की है, जिनके अलग अलग मानक हैं। ज्यादातर मामलों में राज्य सरकारें फसली ऋण की कुछ मात्रा की माफी की घोषणा की है, जो वह खुद के संसाधनों से कर रही हैं।
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